मध्य-पूर्व में चल रहे तनावपूर्ण हालात के बीच पंजाब के कपूरथला जिले के एक प्रवासी भारतीय की घर वापसी की कहानी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुखविंदर सिंह नाम के इस युवक ने छह साल तक विदेश में संघर्ष किया, लेकिन बदले में उसे शोषण, धोखाधड़ी और जेल की सजा झेलनी पड़ी। आखिरकार राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल के प्रयासों से वह सुरक्षित अपने घर लौट सका।

कपूरथला के सुल्तानपुर लोधी क्षेत्र के महमूदवाल गांव के रहने वाले सुखविंदर सिंह 2020 में बेहतर भविष्य की तलाश में दुबई गए थे। परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और बच्चों के लिए बेहतर जीवन देने की उम्मीद के साथ उन्होंने विदेश का रुख किया था। लेकिन वहां पहुंचने के बाद उनके साथ जो हुआ, वह किसी बुरे सपने से कम नहीं था।
सुखविंदर के अनुसार, जिस कंपनी में उन्हें नौकरी मिली, उसने शुरुआत से ही उनके साथ धोखाधड़ी की। उनका पासपोर्ट कंपनी द्वारा अपने कब्जे में ले लिया गया, जिससे वह पूरी तरह उनके नियंत्रण में आ गए। तीन साल तक लगातार काम करने के बावजूद उन्हें केवल पांच महीने की ही तनख्वाह दी गई। यह न केवल आर्थिक शोषण था, बल्कि उनके अधिकारों का भी खुला उल्लंघन था।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब कंपनी ने उन पर झूठे आरोप लगाकर उन्हें कानूनी मामलों में फंसा दिया। सुखविंदर को बिना किसी ठोस कारण के जेल भेज दिया गया, जहां उन्हें कई महीनों तक रहना पड़ा। उन्होंने बताया कि जेल में रहते हुए उन्हें मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। सबसे बड़ा दर्द यह था कि वह अपने परिवार से संपर्क नहीं कर पा रहे थे।
6 दिसंबर के बाद उनका अपने घरवालों से संपर्क पूरी तरह टूट गया था। भारत में उनका परिवार गहरे संकट में था। उनकी पत्नी पर बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी आ गई थी। आर्थिक तंगी के साथ-साथ मानसिक तनाव भी परिवार को झेलना पड़ रहा था। उन्हें यह भी नहीं पता था कि सुखविंदर किस हालत में हैं और कब वापस लौट पाएंगे।
आखिरकार सुखविंदर की पत्नी ने हिम्मत जुटाकर राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल से संपर्क किया। सीचेवाल, जो सामाजिक कार्यों और प्रवासी भारतीयों की मदद के लिए जाने जाते हैं, ने इस मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने तुरंत विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास से संपर्क साधा और सुखविंदर की रिहाई के प्रयास शुरू किए।
इसी बीच मध्य-पूर्व में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने स्थिति को और जटिल बना दिया। युद्ध जैसे हालात के कारण वहां रह रहे भारतीयों के लिए खतरा और बढ़ गया था। ऐसे माहौल में सुखविंदर की सुरक्षित वापसी एक बड़ी चुनौती बन गई थी।
लगातार प्रयासों के बाद अंततः सुखविंदर को रिहा कराया गया और शारजाह से दिल्ली के लिए एक उड़ान के जरिए उन्हें भारत लाया गया। रात के अंधेरे में भरी गई इस उड़ान ने उन्हें उनके परिवार तक पहुंचाया। छह साल बाद जब वह अपने घर लौटे, तो यह पल उनके और उनके परिवार के लिए बेहद भावुक था।
भारत लौटने के बाद सुखविंदर सिंह ने सुल्तानपुर लोधी स्थित निर्मल कुटिया पहुंचकर संत सीचेवाल का आभार जताया। उन्होंने मीडिया के सामने अपनी आपबीती साझा करते हुए कहा कि अगर समय पर मदद नहीं मिलती, तो शायद वह आज भी वहां जेल में फंसे रहते। उन्होंने यह भी बताया कि उनके जैसे कई भारतीय अभी भी विदेशों की जेलों में बंद हैं, जो या तो ओवरस्टे के कारण या फिर झूठे मामलों में फंसाए गए हैं।
सुखविंदर ने सरकार से अपील की है कि उनकी बकाया तनख्वाह दिलाने के लिए भी कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि भले ही केस उनके पक्ष में रहा, लेकिन उन्हें अभी तक उनका पूरा हक नहीं मिला है। उन्होंने यह भी मांग की कि विदेशों में काम करने वाले भारतीय मजदूरों की सुरक्षा और अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए सख्त नियम बनाए जाएं।
वहीं संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विदेशों में फंसे हर भारतीय की मदद करना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास का धन्यवाद किया और कहा कि उनके सहयोग से ही सुखविंदर की वापसी संभव हो सकी। उन्होंने सरकार से अपील की कि ऐसे मामलों को प्राथमिकता दी जाए और जो भारतीय अभी भी विदेशों में फंसे हैं, उन्हें जल्द से जल्द सुरक्षित वापस लाया जाए।
यह घटना केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि उन हजारों भारतीयों की हकीकत को सामने लाती है, जो बेहतर भविष्य की तलाश में विदेश जाते हैं, लेकिन वहां शोषण और अन्याय का शिकार हो जाते हैं। यह जरूरी है कि ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया जाए और प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
सुखविंदर की घर वापसी एक राहत की खबर जरूर है, लेकिन यह भी याद दिलाती है कि अभी भी कई लोग विदेशों में मदद का इंतजार कर रहे हैं। उनकी आवाज को सुनना और उन्हें न्याय दिलाना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।
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