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राष्ट्रीय लोक अदालत में हजारों मामलों का समाधान, 25 करोड़ से अधिक का समझौता

गुरुग्राम जिला न्यायालय परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लंबित मामलों का आपसी सहमति के आधार पर निपटारा किया गया। इस लोक अदालत के माध्यम से हजारों लोगों को त्वरित न्याय मिला और अदालतों में लंबित मामलों की संख्या को कम करने में भी मदद मिली। लोक अदालत के दौरान 77 हजार से अधिक मामलों का समाधान किया गया और करीब 25 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि का सेटलमेंट हुआ।

राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण की ओर से किया गया था। यह कार्यक्रम पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। इसके साथ ही जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण गुरुग्राम की चेयरपर्सन वाणी गोपाल शर्मा के निर्देशन में पूरे आयोजन को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराया गया।

लोक अदालत के सफल संचालन के लिए जिला न्यायालय परिसर में अलग-अलग बेंचों का गठन किया गया था। जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह-अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गुरुग्राम की ओर से कुल 21 पीठें बनाई गई थीं। इन सभी बेंचों में विभिन्न प्रकार के मामलों की सुनवाई की गई और पक्षकारों के बीच समझौता कराकर विवादों को समाप्त करने का प्रयास किया गया।

गुरुग्राम के साथ-साथ उपमंडल स्तर पर भी लोक अदालत का आयोजन किया गया। सोहना और पटौदी में भी लोक अदालत आयोजित की गई, जहां एक-एक बेंच स्थापित की गई थी। इन दोनों स्थानों पर भी लोगों ने अपने मामलों का निपटारा कराने के लिए भाग लिया और कई विवाद आपसी सहमति से खत्म हुए।

जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण गुरुग्राम के सचिव और मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी राकेश कादियान ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 86 हजार 716 मामलों को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था। इनमें से 77 हजार 337 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा कर दिया गया। इन मामलों में कुल 25 करोड़ 16 लाख 59 हजार 153 रुपये की राशि का समझौता कराया गया।

लोक अदालत का उद्देश्य लोगों को त्वरित और सुलभ न्याय उपलब्ध कराना होता है। इसमें उन मामलों को प्राथमिकता दी जाती है जिनका समाधान आपसी समझौते से संभव होता है। इस प्रक्रिया से न केवल अदालतों का समय बचता है बल्कि लोगों को भी लंबे समय तक चलने वाली कानूनी प्रक्रिया से राहत मिलती है।

लोक अदालत में कई प्रकार के मामलों को शामिल किया गया था। इनमें ट्रैफिक चालान, बैंक ऋण से जुड़े विवाद, बिजली और पानी के बिलों से संबंधित मामले, चेक बाउंस के मामले, पारिवारिक विवाद और अन्य दीवानी मामलों को रखा गया था। इन मामलों में दोनों पक्षों की सहमति से समझौता कराकर विवादों का समाधान किया गया।

इस आयोजन में पैनल अधिवक्ताओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। लोक अदालत की प्रत्येक बेंच पर एक-एक पैनल अधिवक्ता की नियुक्ति की गई थी। इन अधिवक्ताओं ने अदालत में मौजूद रहकर लोगों को कानूनी जानकारी दी और समझौते की प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद की।

बेंचों की संख्या के अनुसार पैनल अधिवक्ताओं को तैनात किया गया था ताकि हर मामले को उचित समय मिल सके और विवादों का जल्द समाधान किया जा सके। अधिवक्ताओं ने दोनों पक्षों को समझाकर समझौते के लिए प्रेरित किया, जिससे कई पुराने विवाद भी समाप्त हो सके।

लोक अदालत में ट्रैफिक चालान से जुड़े मामलों के लिए विशेष सुविधा भी उपलब्ध कराई गई थी। लोगों की मदद के लिए हेल्प डेस्क स्थापित की गई थी, जहां लोग अपने चालान की जानकारी प्राप्त कर सकते थे और उनका निपटारा भी कर सकते थे।

इस हेल्प डेस्क के माध्यम से लोगों को अपने लंबित चालानों को निकालने और मौके पर ही उनका भुगतान करने में काफी आसानी हुई। बड़ी संख्या में लोगों ने इस सुविधा का लाभ उठाया और अपने ट्रैफिक चालानों का निपटारा कराया।

राष्ट्रीय लोक अदालत में आम लोगों की अच्छी भागीदारी देखने को मिली। कई लोग ऐसे भी थे जिनके मामले लंबे समय से अदालतों में लंबित थे। लोक अदालत के माध्यम से उन्हें बिना ज्यादा समय और खर्च किए अपने विवादों का समाधान मिल गया।

जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि लोक अदालत न्याय प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके माध्यम से लोगों को सस्ता, सरल और त्वरित न्याय मिलता है। साथ ही अदालतों में लंबित मामलों का बोझ भी कम होता है।

अधिकारियों ने बताया कि लोक अदालत में हुए समझौते को कानूनी मान्यता प्राप्त होती है और यह अंतिम माना जाता है। इसलिए लोग अपने मामलों को जल्दी खत्म करने के लिए लोक अदालत में आने को प्राथमिकता देते हैं।

भविष्य में भी इसी तरह की लोक अदालतों का आयोजन किया जाता रहेगा ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका लाभ उठा सकें। इसके साथ ही अदालतों में लंबित मामलों की संख्या को भी कम किया जा सके।

कुल मिलाकर गुरुग्राम में आयोजित इस राष्ट्रीय लोक अदालत ने न्याय व्यवस्था को काफी राहत दी है। हजारों मामलों का समाधान और 25 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का सेटलमेंट इस लोक अदालत की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

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