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प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षण हेतु विषयवस्तु का ज्ञान, बेहतरीन अध्यापन- पद्धति तथा प्रभावी व्यक्तित्व अनिवार्य- डॉ अंजू

डेस्क। शिक्षण एक महत्वपूर्ण एवं आदर्श व्यवसाय है, क्योंकि शिक्षक राष्ट्र के भविष्य बच्चों के निर्माता होते हैं। इसी कारण शिक्षकों की भूमिका, उनका उत्तरदायित्व एवं उनके कार्य अधिक जिम्मेदारी पूर्ण होते हैं। वास्तव में शिक्षण- कार्य मात्र रोजी- रोटी का पेशा नहीं, बल्कि समाजसेवा का बड़ा कार्य है, जिसके लिए उचित योग्यता, कार्य कुशलता एवं समर्पण भाव अनिवार्य है।

उक्त बातें ज्ञान सरिता पब्लिक स्कूल, रूहेलागंज, कादिराबाद, दरभंगा में आयोजित “शिक्षक- प्रशिक्षण कार्यक्रम- 2024” को संबोधित करते हुए मुख्य प्रशिक्षिका के रूप में प्लस टू उच्च विद्यालय, कोयलास्थान, दरभंगा की विज्ञान- शिक्षिका डॉ अंजू कुमारी ने कही। उन्होंने कहा कि बच्चों को प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के लिए शिक्षकों को विषयवस्तु का ज्ञान तथा अध्यापन की बेहतरीन पद्धति के साथ ही उनका व्यक्तित्व भी प्रभावशाली होना अनिवार्य है। शिक्षकों के चरित्र एवं व्यक्तित्व का छात्रों पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

 

 

डॉ अंजू ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य सभी नागरिकों को उच्च गुणवत्तापूर्ण एवं उपयोगी शिक्षा प्रदान कर भारत को समृद्ध एवं वैश्विक ज्ञान महाशक्ति के रूप में विकसित करना है। यह शिक्षा नीति सामाजिक चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए नए दृष्टिकोण, आधुनिक तकनीक और कुशल रणनीति के विकास को प्रोत्साहित करेगा। साथ ही छात्र- छात्राओं में सामाजिक जिम्मेदारी एवं जागरूकता की भावना को भी जागृत करेगा।

 

मुख्य अतिथि के रूप में मिथिला विश्वविद्यालय के संस्कृत- प्राध्यापक डॉ आर एन चौरसिया ने शिक्षक- प्रशिक्षण की महत्ता की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि यह निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जिससे शिक्षकों की कार्य- कुशलता एवं उत्पादकता के साथ ही उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है। अच्छे शिक्षकों के लिए पाठ्यक्रम की पूर्ण एवं सही जानकारी तथा अच्छी तरह संवाद करने की क्षमता के साथ ही सॉफ्ट स्किल्स का होना भी परम आवश्यक है।

 

शिक्षक- प्रशिक्षण कार्यक्रम- 2024 का उद्घाटन करते हुए प्राचार्य अमरनाथ साह ने कहा कि हमारे यहां सीबीएसई के मापदंड के अनुसार इस तरह का प्रशिक्षण पहली बार आयोजित किया जा रहा है, जिसमें हमारे विद्यालय के कादिराबाद तथा शीशोडीह, दरभंगा शाखा के 22 से अधिक शिक्षक- शिक्षिकाओं ने भाग लिया है। इस प्रशिक्षण से शिक्षकों के साथ ही छात्रों को भी काफी लाभ होगा। उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण पांच सत्रों- उद्घाटन सत्र, तकनीकी सत्र, कार्यकलाप सत्र, प्रश्नोत्तर तथा मूल्यांकन सत्रों में संपन्न हुआ है। प्रश्नोत्तर सत्र में शिक्षकों ने अनेक तरह के प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने संतोषजनक उत्तर दिया। वहीं शिक्षकों से शिक्षण संबंधी कई तरह के कार्यकलाप भी कराए गए।

 

शिक्षक- प्रशिक्षण कार्यक्रम में स्कूल के प्रबंधक हर्षित राज, शिक्षिका- पूनम, नीलम, सपना, आशा, निक्कू, रेणुका, दुर्गा, कामिनी, अपूर्वा, ज्योति, कशिश तथा सोनी कुमारी, शिक्षक- राकेश, अनिल, प्रशांत, रूपेश, निशांत, सुधीर, दीपू, पप्पू, सुधीर महतो तथा आनंद राज आदि ने भाग लिया। अतिथियों का स्वागत एवं कार्यक्रम का संचालन प्रबंधक हर्षित राज ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन शिक्षक प्रशांत गौतम ने किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ, वहीं समापन राष्ट्रगान जन गण मन… के सामूहिक गायन से हुआ।

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