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कुरुक्षेत्र एनआईटी में फिर मौत का सन्नाटा: 10 दिन में दूसरी आत्महत्या, 22 वर्षीय छात्र ने हॉस्टल में लगाई फांसी

हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कुरुक्षेत्र (एनआईटी) में एक बार फिर दर्दनाक घटना सामने आई है। संस्थान के छात्रावास में 22 वर्षीय एक छात्र ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। हैरानी की बात यह है कि इससे महज 10 दिन पहले भी इसी परिसर में एक अन्य छात्र ने इसी तरह अपनी जान दे दी थी। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने न केवल संस्थान प्रशासन बल्कि छात्रों और अभिभावकों को भी गहरी चिंता में डाल दिया है।

आधी रात को हॉस्टल में हुई घटना

जानकारी के अनुसार, यह घटना छात्रावास नंबर 8 के कमरा नंबर 352 में देर रात सामने आई। सिविल इंजीनियरिंग का छात्र, जिसकी पहचान प्रियांशु के रूप में हुई है, ने अपने कमरे में पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। जब अन्य छात्रों को इसकी भनक लगी तो तुरंत हॉस्टल प्रशासन को सूचना दी गई।

सूचना मिलते ही संस्थान में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंची टीम ने दरवाजा खुलवाया और अंदर का मंजर देखकर सभी सन्न रह गए। छात्र का शव पंखे से लटका हुआ था।

पुलिस ने संभाला मोर्चा

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल के मोर्चरी हाउस में भेज दिया गया। पुलिस ने मौके से साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए हैं और कमरे की तलाशी भी ली गई।

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय क्षेत्र की पुलिस चौकी के प्रभारी विनोद कुमार ने बताया कि फिलहाल मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। ऐसे में आत्महत्या के पीछे की वजह साफ नहीं हो पाई है।

10 दिन पहले भी हुआ था ऐसा ही मामला

इस घटना ने इसलिए भी ज्यादा गंभीर रूप ले लिया है क्योंकि 2 अप्रैल को भी इसी छात्रावास में एक और छात्र ने आत्महत्या की थी। उस छात्र की पहचान पवन कुमार के रूप में हुई थी, जो नूंह जिले का रहने वाला था।

पहली घटना की जांच अभी पूरी भी नहीं हो पाई थी कि दूसरी घटना सामने आ गई। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर संस्थान में ऐसा क्या हो रहा है कि छात्र इस तरह के कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं।

छात्र था सिरसा का रहने वाला

मृतक छात्र प्रियांशु हरियाणा के सिरसा जिले के शेरपुरा गांव का निवासी बताया जा रहा है। वह एनआईटी में बीटेक की पढ़ाई कर रहा था और सिविल इंजीनियरिंग शाखा का छात्र था।

उसके परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है। जैसे ही यह खबर गांव पहुंची, वहां मातम पसर गया। परिवार के लोग इस घटना से पूरी तरह टूट चुके हैं और उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा।

संस्थान प्रशासन पर उठे सवाल

लगातार हो रही आत्महत्याओं के बाद संस्थान प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, इस मामले में कोई भी अधिकारी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है।

छात्रों का कहना है कि पढ़ाई का दबाव, मानसिक तनाव और अकेलापन जैसी समस्याएं अक्सर छात्रों को प्रभावित करती हैं। ऐसे में संस्थान में काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सहायता की बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए।

हॉस्टल में पसरा सन्नाटा

घटना के बाद छात्रावास में सन्नाटा छा गया है। छात्र सहमे हुए हैं और कई लोग अपने कमरों में ही बंद हो गए हैं। हर कोई इस घटना से मानसिक रूप से प्रभावित नजर आ रहा है।

कुछ छात्रों ने बताया कि मृतक सामान्य व्यवहार करता था और किसी को अंदाजा नहीं था कि वह ऐसा कदम उठा सकता है। यही वजह है कि यह घटना सभी के लिए एक बड़ा झटका बन गई है।

पुलिस हर एंगल से कर रही जांच

पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। मृतक के दोस्तों, सहपाठियों और शिक्षकों से पूछताछ की जा रही है ताकि यह समझा जा सके कि आखिर उसने यह कदम क्यों उठाया।

मोबाइल फोन और अन्य व्यक्तिगत सामान की भी जांच की जा रही है, जिससे कोई सुराग मिल सके। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति और स्पष्ट हो पाएगी।

मानसिक स्वास्थ्य पर फिर उठी बहस

इस घटना के बाद एक बार फिर छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आज के प्रतिस्पर्धी माहौल में छात्रों पर पढ़ाई और करियर का दबाव बहुत ज्यादा होता है।

अगर समय रहते उन्हें सही मार्गदर्शन और भावनात्मक समर्थन न मिले, तो वे अवसाद और तनाव का शिकार हो सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि शैक्षणिक संस्थान इस दिशा में ठोस कदम उठाएं।

परिजनों और छात्रों में गहरा शोक

मृतक के परिवार में गम का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, संस्थान के छात्रों और शिक्षकों ने भी इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

कई छात्रों ने मांग की है कि संस्थान में मानसिक स्वास्थ्य सहायता केंद्र को मजबूत किया जाए और छात्रों के लिए नियमित काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जाएं।

निष्कर्ष: गंभीरता से लेने की जरूरत

एनआईटी कुरुक्षेत्र में लगातार हो रही आत्महत्याएं एक गंभीर चेतावनी हैं। यह सिर्फ एक संस्थान का मामला नहीं है, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र के लिए एक बड़ा सवाल है।

जरूरत है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। छात्रों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने, उनकी समस्याओं को समझने और समय पर सहायता देने की दिशा में काम करना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को इस तरह का दुख न झेलना पड़े।

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