जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी के मामले पर अब विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने आई है। जेएनयू की वाइस चांसलर प्रोफेसर शांतिश्री धुलीपुडी पंडित ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि कुछ अराजक या असंतुलित लोग किसी भी संस्थान की असली पहचान नहीं बन सकते।

एक कार्यक्रम के दौरान वाइस चांसलर ने कहा कि हर विश्वविद्यालय में कुछ ऐसे तत्व हो सकते हैं, लेकिन उनका आचरण पूरे संस्थान के चरित्र को परिभाषित नहीं करता। उन्होंने जोर देकर कहा कि जेएनयू देश के सबसे राष्ट्रवादी विश्वविद्यालयों में से एक है, जहां से सेना, वायुसेना, नौसेना, आईएमए और डीआरडीओ जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों को सेवा देने वाले अधिकारी निकल चुके हैं।
प्रो. पंडित ने विश्वविद्यालय के सकारात्मक पहलुओं को रेखांकित करते हुए बताया कि जेएनयू में देश के गरीब और वंचित वर्ग के छात्र कम शुल्क में उच्च शिक्षा प्राप्त करते हैं। यहां किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जाता और सभी को समान अवसर दिए जाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि नारेबाजी की घटना के बाद 24 घंटे के भीतर ही परिसर में स्थिति पूरी तरह सामान्य हो गई थी और शांति बहाल हो गई थी। वाइस चांसलर के मुताबिक, किसी भी बड़े संस्थान में कुछ असामाजिक तत्व हो सकते हैं, लेकिन वे उस संस्थान के मूल्यों और उसकी परंपरा का प्रतिनिधित्व नहीं करते।
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