उत्तर प्रदेश के Varanasi में एक बार फिर घाटों पर नाविकों के बीच विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। सवारी बैठाने की होड़ में दो गुट आमने-सामने आ गए और देखते ही देखते मामला इतना बिगड़ गया कि दोनों पक्षों में जमकर पथराव शुरू हो गया। इस घटना ने न केवल स्थानीय लोगों को डरा दिया, बल्कि घाट क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना Teliyanala Ghat की है, जो Prahlad Ghat के पास स्थित है। शुक्रवार शाम का समय था और घाट पर रोज की तरह पर्यटकों और स्थानीय लोगों की आवाजाही बनी हुई थी। इसी दौरान नाव पर सवारी बैठाने को लेकर दो पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। पहले तो मामला सामान्य बहस तक सीमित था, लेकिन कुछ ही देर में यह झड़प में बदल गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद अचानक इतना बढ़ गया कि दोनों गुटों ने एक-दूसरे पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। घाट के आसपास मौजूद लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। करीब आधे घंटे तक पूरे क्षेत्र में अफरातफरी और अराजकता का माहौल बना रहा। इस दौरान तेलियानाला से सक्काघाट जाने वाले मार्ग पर आवाजाही भी बाधित हो गई।
सूचना मिलते ही Adampur Police Station की पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में किया। पुलिस ने दोनों पक्षों को खदेड़ते हुए स्थिति को शांत कराया। हालांकि तब तक कई लोग मामूली रूप से घायल हो चुके थे और क्षेत्र में डर का माहौल बन चुका था।
घटना के बाद दोनों पक्षों ने थाने में एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। एक पक्ष की ओर से संगीता देवी ने आरोप लगाया कि उनके परिवार के सदस्य—राजकुमार साहनी, छोटू साहनी, प्रशांत साहनी उर्फ लड्डू और कर्मचारी सनी यादव—घाट किनारे नाव पर सवारी बैठा रहे थे। इसी दौरान दूसरे पक्ष के सिजय साहनी, गोपी साहनी, अजय साहनी और दिवाकर साहनी समेत अन्य लोग वहां पहुंचे और विवाद शुरू कर दिया। आरोप है कि देखते ही देखते उन्होंने पथराव शुरू कर दिया और मारपीट की।
वहीं, दूसरे पक्ष का कहना है कि यह विवाद एकतरफा नहीं था। गोपी साहनी का आरोप है कि राजकुमार साहनी और उनके सहयोगी घाट पर अन्य नाविकों को अपनी नाव लगाने नहीं देते। उनका कहना है कि घाट पर कब्जा जमाने की कोशिश लंबे समय से चल रही है, जिसके चलते यह विवाद बार-बार सामने आता है। इसी बात को लेकर कहासुनी हुई, जो बाद में हिंसक झड़प में बदल गई।
पुलिस के अनुसार, दोनों पक्षों की तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच शुरू कर दी गई है। क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि पथराव और मारपीट में शामिल लोगों की सही पहचान की जा सके। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इंस्पेक्टर विमल मिश्रा ने बताया कि घाट पर पहले भी इस तरह के विवाद सामने आते रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस इस मामले को गंभीरता से ले रही है और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए विशेष योजना बनाई जाएगी।
दरअसल, तेलियानाला घाट और सक्काघाट पर नाव बांधने और सवारी बैठाने को लेकर लंबे समय से तनाव बना हुआ है। स्थानीय नाविकों के बीच प्रतिस्पर्धा इतनी बढ़ गई है कि छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा शुरू हो जाता है। कई बार यह झगड़ा हिंसा में भी बदल चुका है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ नाविक घाट पर अपना वर्चस्व बनाए रखना चाहते हैं। आरोप है कि कुछ परिवारों की बड़ी संख्या में नावें यहां चलती हैं और वे अन्य नाविकों को काम करने से रोकते हैं। यदि कोई नया नाविक यहां अपनी नाव लगाने की कोशिश करता है, तो उसके साथ विवाद हो जाता है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक घाटों पर इस तरह की अराजकता चलती रहेगी। पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण Varanasi Ghats पर इस तरह की घटनाएं शहर की छवि को भी नुकसान पहुंचा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का समाधान केवल पुलिस कार्रवाई से नहीं होगा, बल्कि प्रशासन को नाविकों के बीच स्पष्ट नियम और व्यवस्था लागू करनी होगी। घाटों पर नाव संचालन के लिए एक व्यवस्थित प्रणाली बनाना जरूरी है, ताकि सभी नाविकों को समान अवसर मिल सके और विवाद की स्थिति न बने।
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन पर भी दबाव बढ़ गया है कि वह इस मुद्दे का स्थायी समाधान निकाले। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में इस तरह की घटनाएं और बढ़ सकती हैं।
फिलहाल, पुलिस ने इलाके में निगरानी बढ़ा दी है और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। साथ ही, दोनों पक्षों को सख्त चेतावनी दी गई है कि भविष्य में किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कुल मिलाकर, यह घटना केवल एक झगड़ा नहीं, बल्कि एक बड़ी समस्या की ओर इशारा करती है—जहां रोज़गार की प्रतिस्पर्धा और आपसी मतभेद हिंसा का रूप ले लेते हैं। जरूरत है कि प्रशासन, पुलिस और स्थानीय लोग मिलकर इस समस्या का समाधान निकालें, ताकि घाटों पर शांति और व्यवस्था बनी रहे और शहर की पहचान सुरक्षित रह सके।
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