फरीदाबाद के प्रतिष्ठित सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले में शनिवार शाम एक दर्दनाक हादसे ने खुशियों के माहौल को मातम में बदल दिया। झूला ग्राउंड में लगा नावनुमा ‘सुनामी झूला’ अचानक एक ओर से टूटकर नीचे गिर गया। हादसे के वक्त झूले पर 15 से अधिक लोग सवार थे, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

हादसे ने अंतरराष्ट्रीय आयोजन पर लगाया दाग
घटना के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई। पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने हादसे को बेहद गंभीर बताते हुए इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि विश्व स्तर पर पहचान बना चुके सूरजकुंड मेले में इस तरह की लापरवाही ने न केवल आयोजन की साख को ठेस पहुंचाई है, बल्कि हरियाणा की छवि को भी नुकसान पहुंचाया है।
दुष्यंत चौटाला ने सीधे तौर पर पर्यटन विभाग को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि बीते कुछ वर्षों से मेले को कमाई का साधन बना दिया गया है और सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज कर असुरक्षित झूलों को अनुमति दी जा रही है।
50 देशों के शिल्पकार, लाखों पर्यटक
उन्होंने याद दिलाया कि सूरजकुंड मेला केवल मनोरंजन का स्थान नहीं, बल्कि दुनिया भर के 50 से अधिक देशों के 700 से ज्यादा शिल्पकारों को मंच देने वाला सांस्कृतिक उत्सव है। ऐसे आयोजन में सुरक्षा में चूक होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
मुख्यमंत्री की घोषणा: नौकरी और आर्थिक सहायता
हादसे में जान गंवाने वाले पुलिसकर्मी इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद के प्रति मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने घोषणा की कि शहीद इंस्पेक्टर के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी, ताकि परिवार की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
मुख्यमंत्री ने घायलों के इलाज की भी समीक्षा की। जानकारी के अनुसार, हादसे में घायल आठ लोगों में से चार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, जबकि चार का इलाज जारी है। सभी घायलों को सरकार की ओर से एक-एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।
भविष्य में लापरवाही नहीं होगी: सीएम
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि भविष्य में ऐसे आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था की सख्त समीक्षा की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि नागरिकों की जान से किसी भी तरह का समझौता न हो।
झूलों की अनुमति नीति पर सवाल
दुष्यंत चौटाला ने सरकार से मांग की कि सूरजकुंड जैसे सांस्कृतिक आयोजनों में एडवेंचर झूलों की अनुमति देने की नीति पर पुनर्विचार किया जाए। उनका कहना है कि ये झूले न सिर्फ खतरनाक हैं, बल्कि मेले के मूल उद्देश्य—हस्तशिल्प और कारीगरों—से भी ध्यान भटकाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि हादसे में जान गंवाने वाले पुलिसकर्मी ने ड्यूटी निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है, इसलिए सरकार को कैबिनेट स्तर पर निर्णय लेकर परिवार को एक्स-ग्रेशिया सहायता और स्थायी राहत प्रदान करनी चाहिए।
जांच और जवाबदेही की मांग
हादसे के बाद झूला संचालक कंपनी और सुरक्षा मानकों को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। राजनीतिक दलों और आम जनता की मांग है कि जांच केवल औपचारिक न होकर, जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई के साथ पूरी की जाए।
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