भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता को एक और मजबूती मिलने जा रही है। स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस मार्क-1ए (Tejas Mk-1A) के पहले पांच विमान भारतीय वायुसेना में शामिल होने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इन विमानों की तैनाती पाकिस्तान सीमा के समीप प्रस्तावित है, जिससे पश्चिमी मोर्चे पर भारत की हवाई शक्ति में उल्लेखनीय इजाफा होगा।
सरकारी रक्षा कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने तेजस की आपूर्ति को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए स्पष्ट किया है कि पांचों विमान पूरी तरह तैयार हैं और वायुसेना के साथ इन्हें सौंपने को लेकर लगातार बातचीत चल रही है। कंपनी ने भरोसा दिलाया है कि उत्पादन और आपूर्ति से जुड़े सभी लक्ष्य समय पर पूरे किए जाएंगे।
पाकिस्तान सीमा के पास रणनीतिक तैनाती
तेजस मार्क-1ए को राजस्थान के बीकानेर स्थित नाल एयरबेस पर तैनात करने की योजना है। यह एयरबेस पाकिस्तान सीमा के बेहद नजदीक स्थित है और सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां तेजस की मौजूदगी से वायुसेना की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और निगरानी शक्ति दोनों में इजाफा होगा।
एचएएल का भरोसा, समय पर होगी इंजन आपूर्ति
एचएएल ने अपने बयान में यह भी कहा है कि भविष्य में इंजन की आपूर्ति उसकी उत्पादन योजना के अनुरूप होगी। कंपनी चालू वित्त वर्ष के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और वायुसेना के साथ समन्वय में लगातार काम कर रही है।
2033 तक वायुसेना को मिलेंगे 180 तेजस विमान
भारतीय वायुसेना के बेड़े में तेजस Mk-1A की संख्या आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ने वाली है। रक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2021 में एचएएल के साथ 83 तेजस मार्क-1ए विमानों की आपूर्ति के लिए करीब 48,000 करोड़ रुपये का करार किया था।
इसके बाद सितंबर 2025 में रक्षा मंत्रालय ने 97 अतिरिक्त लड़ाकू विमानों के लिए 62,370 करोड़ रुपये के दूसरे बड़े सौदे पर हस्ताक्षर किए। इस सौदे के तहत वायुसेना को 68 सिंगल-सीटर और 29 ट्विन-सीटर तेजस विमान मिलेंगे। एचएएल का लक्ष्य वर्ष 2032-33 तक कुल 180 तेजस Mk-1A विमान वायुसेना को सौंपने का है।
तेजस Mk-1A की ताकत और खासियत
तेजस मार्क-1ए, भारत में विकसित एलसीए (Light Combat Aircraft) का आधुनिक और ज्यादा ताकतवर संस्करण है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी स्वदेशी तकनीक है।
करीब 65 प्रतिशत से अधिक उपकरण भारत में निर्मित
4.5 पीढ़ी का हल्का लेकिन अत्याधुनिक लड़ाकू विमान
अधिकतम गति लगभग 2200 किमी प्रति घंटा
करीब 9 टन तक हथियार ले जाने की क्षमता
एक साथ कई लक्ष्यों को भेदने में सक्षम
बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइलों से लैस
आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट और उन्नत रडार सिस्टम
‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती
तेजस Mk-1A की तैनाती न केवल वायुसेना की युद्ध क्षमता बढ़ाएगी, बल्कि मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मजबूती देगी। स्वदेशी तकनीक से बने इन विमानों के जरिए भारत रक्षा क्षेत्र में विदेशी निर्भरता कम करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।
कुल मिलाकर, तेजस मार्क-1ए का वायुसेना में शामिल होना भारत की सामरिक शक्ति और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।
स्वर्णिम टाईम्स : Swarnim Times आपका अपना इंटरनेट अख़बार !
