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फरवरी में ही तपने लगी धरती — हरियाणा में अप्रैल जैसी गर्मी, बढ़ते पारे ने बढ़ाई चिंता; किसानों और मौसम वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी

उत्तर भारत में मौसम का मिजाज इस साल कुछ अलग ही नजर आ रहा है। आमतौर पर फरवरी को हल्की ठंड और सुहावने मौसम के लिए जाना जाता है, लेकिन इस बार हालात उलट दिख रहे हैं। हरियाणा में फरवरी के अंतिम सप्ताह में ही लोगों को अप्रैल जैसी गर्मी महसूस होने लगी है। तेज धूप, बढ़ता तापमान और दिन में चुभन पैदा करने वाली गर्म हवाएं इस बात का संकेत दे रही हैं कि इस बार गर्मी जल्दी दस्तक दे चुकी है

मौसम विभाग के अनुसार इस महीने के आखिरी दिनों में अधिकतम तापमान कई स्थानों पर 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। कुछ जगहों पर यह इससे भी ऊपर दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यही रफ्तार बनी रही तो मार्च की शुरुआत तक तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है।

विशेष रूप से हिसार में तापमान में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। यहां आने वाले दिनों में पारा 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की आशंका जताई गई है। यह सामान्य से काफी अधिक माना जा रहा है, क्योंकि फरवरी में आमतौर पर इतनी गर्मी देखने को नहीं मिलती। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस तरह का असामान्य तापमान जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को दर्शाता है।

मौसम वैज्ञानिक प्रोफेसर चंद्रमोहन ने बताया कि फरवरी समाप्त होने से पहले ही तापमान में उछाल साफ दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार पिछले कुछ वर्षों में मौसम का पैटर्न तेजी से बदला है। कभी रिकॉर्ड बारिश, कभी असामान्य ठंड और अब समय से पहले गर्मी — ये सभी संकेत जलवायु असंतुलन की ओर इशारा करते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि पिछले वर्ष मानसून के दौरान कई इलाकों में रिकॉर्ड बारिश दर्ज की गई थी, जबकि जनवरी में कड़ाके की सर्दी पड़ी। अब फरवरी में अचानक गर्मी का बढ़ना इस बात का प्रमाण है कि मौसम चक्र अस्थिर होता जा रहा है। उनका मानना है कि यदि यह रुझान जारी रहा तो इस साल गर्मी कई रिकॉर्ड तोड़ सकती है।

गर्मी का असर सिर्फ लोगों की दिनचर्या पर ही नहीं, बल्कि खेती पर भी पड़ सकता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अभी तक 30 डिग्री तक का तापमान गेहूं, चना और ज्वार जैसी फसलों के लिए बहुत अधिक नुकसानदायक नहीं है। लेकिन यदि औसतन तापमान 35 डिग्री या उससे ऊपर पहुंचता है, तो यह फसल की वृद्धि को प्रभावित कर सकता है। खासकर गेहूं की बालियों के बनने के समय अधिक गर्मी उत्पादन को कम कर सकती है।

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में नमी बनाए रखने के उपाय करें। बेहतर सिंचाई प्रबंधन, मल्चिंग और नई कृषि तकनीकों का उपयोग करने से फसलों को गर्मी के असर से बचाया जा सकता है। उनका कहना है कि अब खेती को मौसम के बदलते स्वरूप के अनुसार ढालना जरूरी हो गया है।

गर्मी का असर शहरों में भी साफ दिख रहा है। दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में भी दिन के समय तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों को परेशान करना शुरू कर दिया है। दोपहर के समय सड़कों पर चहल-पहल कम होने लगी है और लोग धूप से बचने के उपाय करने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मार्च में तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी इस अचानक बढ़ती गर्मी को लेकर सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि मौसम में तेजी से बदलाव शरीर पर असर डाल सकता है। लोगों को पर्याप्त पानी पीने, धूप में अधिक समय तक न रहने और हल्के कपड़े पहनने की सलाह दी जा रही है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक मौसमीय घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। यदि तापमान का यही रुझान बना रहा, तो आने वाले वर्षों में सर्दियां छोटी और गर्मियां लंबी हो सकती हैं। इसका असर जल संसाधनों, कृषि उत्पादन और जनस्वास्थ्य — तीनों पर पड़ेगा।

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि अब समय आ गया है जब मौसम के बदलते स्वरूप को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक रणनीतियां बनाई जाएं। जल संरक्षण, हरित क्षेत्र बढ़ाना, टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना और प्रदूषण नियंत्रण जैसे कदम भविष्य में ऐसे बदलावों से निपटने में मदद कर सकते हैं।

फिलहाल मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है, साथ ही कुछ इलाकों में तेज हवाएं भी चल सकती हैं। इससे दिन के समय गर्मी और अधिक महसूस होगी।

फरवरी में ही गर्मी का यह रूप लोगों के लिए चौंकाने वाला जरूर है, लेकिन विशेषज्ञ इसे आने वाले मौसम की झलक मान रहे हैं। अब सबकी नजरें मार्च के मौसम पर टिकी हैं — क्या गर्मी और तेजी से बढ़ेगी, या मौसम कुछ राहत देगा?

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