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QR कोड से उड़ गया 12वीं का पेपर — सोनीपत के सरकारी स्कूल में लीक कांड, दो सुपरवाइजर हटे, छात्रा पर एफआईआर की तैयारी

हरियाणा में बोर्ड परीक्षाओं के बीच एक बार फिर पेपर लीक का मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा व्यवस्था की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला सोनीपत जिले के भावड़ गांव स्थित एक सरकारी स्कूल से जुड़ा है, जहां 12वीं कक्षा के अंग्रेजी विषय का प्रश्नपत्र परीक्षा के दौरान ही लीक होने की बात सामने आई है। घटना के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है और तुरंत कार्रवाई करते हुए दो सुपरवाइजरों को ड्यूटी से हटा दिया गया है।

बताया जा रहा है कि बुधवार को आयोजित अंग्रेजी की बोर्ड परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र का क्यूआर कोड स्कैन कर उसे बाहर भेज दिया गया। कुछ ही देर में पेपर सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। जब यह जानकारी शिक्षा बोर्ड तक पहुंची तो जांच शुरू कर दी गई। शुरुआती जांच में परीक्षा केंद्र के अंतिम कमरे से पेपर आउट होने की पुष्टि हुई है।

यह परीक्षा हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित की जा रही थी। बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने पेपर लीक की बात स्वीकार करते हुए कहा कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

गोहाना खंड के शिक्षा अधिकारी राजेंद्र सांगवान ने बताया कि जिस कमरे से पेपर लीक हुआ, वहां मौजूद एक परीक्षार्थी पर संदेह है। बताया जा रहा है कि संबंधित छात्रा विद्या सागर स्कूल से जुड़ी है। परीक्षा केंद्र के अधीक्षक की ओर से उसके खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि छात्रा अकेले शामिल थी या किसी संगठित नेटवर्क का हिस्सा।

प्रशासनिक कार्रवाई के तहत दो सुपरवाइजरों को तुरंत प्रभाव से हटा दिया गया है। इनमें से एक सुपरवाइजर निजी स्कूल का शिक्षक बताया जा रहा है, जिसकी ड्यूटी बोर्ड ने परीक्षा केंद्र पर लगाई थी। अधिकारियों का कहना है कि ड्यूटी में लापरवाही और परीक्षा गोपनीयता बनाए रखने में विफल रहने के कारण यह कार्रवाई की गई है।

घटना के बाद शिक्षा बोर्ड मुख्यालय स्तर पर भी जांच शुरू कर दी गई है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि प्रश्नपत्र लीक होने का स्रोत केवल परीक्षा केंद्र तक सीमित था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। बोर्ड अधिकारियों ने कहा है कि यदि तकनीकी माध्यमों का दुरुपयोग हुआ है, तो साइबर सेल की मदद भी ली जाएगी।

यह पहली बार नहीं है जब भावड़ गांव का यह स्कूल पेपर लीक के कारण चर्चा में आया हो। करीब दो वर्ष पहले भी इसी परीक्षा केंद्र से हिंदी का प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सामने आया था। उस समय भी परीक्षा के दौरान पेपर वायरल हुआ था, जिसके बाद बोर्ड को परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। उस घटना में एसटीएफ की टीम को मौके पर भेजा गया था और जांच में पाया गया था कि एक परीक्षार्थी ने ही पेपर बाहर भेजा था।

पुराने मामले की पुनरावृत्ति होने से यह सवाल उठने लगा है कि आखिर परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था में बार-बार चूक क्यों हो रही है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल तकनीक ने जहां पारदर्शिता बढ़ाई है, वहीं यदि निगरानी मजबूत न हो तो दुरुपयोग की आशंका भी बढ़ जाती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बोर्ड परीक्षाएं छात्रों के भविष्य से जुड़ी होती हैं, ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाएं मेहनती विद्यार्थियों के साथ अन्याय हैं। कई अभिभावकों ने भी नाराजगी जताई है और मांग की है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अब परीक्षा केंद्रों की निगरानी और सख्त की जाएगी। मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच को और कठोर बनाया जाएगा। साथ ही सुपरवाइजरों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी ताकि गोपनीयता से कोई समझौता न हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार पेपर लीक की घटनाएं शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाती हैं। यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो छात्रों का भरोसा कमजोर हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि दोषियों की पहचान कर उन्हें उदाहरण बनाकर सजा दी जाए।

फिलहाल पुलिस शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है और बोर्ड स्तर पर जांच चल रही है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या सामने आता है और दोषियों पर कितनी कड़ी कार्रवाई होती है।

यह घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा केवल तकनीक से नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और ईमानदारी से सुनिश्चित होती है। यदि निगरानी मजबूत हो और जवाबदेही तय हो, तभी छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सकता है।

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