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पलभर में उजड़ गया घर, पालम की आग ने ली 9 जिंदगियां

राजधानी दिल्ली के पालम इलाके में बुधवार की सुबह एक ऐसी त्रासदी लेकर आई, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। एक बहुमंजिला इमारत में लगी भीषण आग ने एक ही परिवार के नौ लोगों की जिंदगी छीन ली। इस हादसे ने न सिर्फ एक परिवार को खत्म कर दिया, बल्कि कई अनुत्तरित सवाल भी छोड़ दिए हैं।

बताया जा रहा है कि यह इमारत रिहायशी और व्यावसायिक दोनों तरह से इस्तेमाल हो रही थी। इसके बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और पहली मंजिल पर कपड़े और कॉस्मेटिक्स का शोरूम संचालित होता था, जबकि दूसरी और तीसरी मंजिल पर शोरूम मालिक राजेंद्र कश्यप अपने परिवार के साथ रहते थे।

बुधवार सुबह अचानक इमारत से धुआं उठने लगा। शुरुआत में किसी को अंदाजा नहीं था कि यह आग इतनी भयानक रूप ले लेगी। कुछ ही मिनटों में आग ने निचली मंजिलों से ऊपरी हिस्सों तक फैलते हुए पूरे भवन को अपनी चपेट में ले लिया। धुएं ने सीढ़ियों और कमरों को भर दिया, जिससे अंदर फंसे लोगों के लिए बाहर निकलना लगभग असंभव हो गया।

इस दर्दनाक हादसे में परिवार की बुजुर्ग महिला लाडो (70) की मौत हो गई। उनके साथ उनके बेटे प्रवेश (33) और कमल (39) भी इस आग की चपेट में आ गए। कमल की पत्नी आशु (35) और उनकी तीन मासूम बेटियां—15 साल, 6 साल और 3 साल की—भी इस हादसे में अपनी जान गंवा बैठीं। इसके अलावा, लाडो की बेटी हिमांशी (22) और बहू दीपिका (28) की भी इस आग में मौत हो गई।

एक ही परिवार के इतने लोगों का एक साथ यूं चला जाना पूरे इलाके के लिए किसी सदमे से कम नहीं है। हर तरफ सन्नाटा और गम का माहौल है।

हादसे के दौरान कुछ लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए बेहद जोखिम भरे कदम उठाए। राजेंद्र कश्यप के बेटे अनिल (32) ने अपनी दो साल की बेटी को बचाने की कोशिश की। वह उसे सीढ़ियों से नीचे ले जा रहे थे, लेकिन अफरा-तफरी और धुएं के बीच बच्ची का संतुलन बिगड़ गया और वह नीचे गिर गई। इसके बाद अनिल ने भी जान बचाने के लिए छलांग लगा दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

इसी तरह, सचिन (29) नामक युवक ने भी आग से बचने के लिए पास की इमारत में छलांग लगा दी। वह किसी तरह अपनी जान बचाने में सफल रहा, लेकिन इस दौरान उसे भी गंभीर चोटें आईं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि आग लगते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और बचाव कार्य में मदद करने की कोशिश करने लगे। लेकिन आग इतनी तेज थी कि कोई भी अंदर जाकर लोगों को बाहर नहीं निकाल पाया।

सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का काम शुरू किया गया। कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इमारत के अंदर फंसे नौ लोगों की जान जा चुकी थी।

घायलों को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार कुछ की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।

प्रारंभिक जांच में आग लगने के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है, लेकिन माना जा रहा है कि शॉर्ट सर्किट या ज्वलनशील सामान के कारण आग तेजी से फैली। चूंकि निचली मंजिलों पर कपड़े और कॉस्मेटिक का शोरूम था, इसलिए आग ने बहुत जल्दी विकराल रूप ले लिया।

यह हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या हमारे शहरों में इमारतों में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं? क्या फायर सेफ्टी के नियमों का सही तरीके से पालन हो रहा है?

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी इमारतों में जहां व्यावसायिक और रिहायशी दोनों गतिविधियां होती हैं, वहां सुरक्षा मानकों का और भी सख्ती से पालन होना चाहिए। इमरजेंसी एग्जिट, फायर अलार्म और अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता बेहद जरूरी होती है, ताकि समय रहते लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कहीं किसी तरह की लापरवाही तो इस हादसे की वजह नहीं बनी। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही जा रही है।

इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि लापरवाही और सुरक्षा की अनदेखी कितनी भारी पड़ सकती है। एक पल में पूरा परिवार खत्म हो गया और पीछे छूट गया सिर्फ दर्द, आंसू और यादें।

यह हादसा सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक चेतावनी है—कि सुरक्षा के नियमों को नजरअंदाज करना कभी-कभी जिंदगी की सबसे बड़ी कीमत वसूल लेता है।

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