राजधानी दिल्ली से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एचआईवी संक्रमण से बचाव के लिए एक व्यक्ति ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से दवा की जानकारी जुटाई और बिना किसी चिकित्सकीय परामर्श के स्वयं इलाज शुरू कर दिया। यह कदम मरीज के लिए जानलेवा साबित हुआ। दवा के गंभीर दुष्प्रभाव सामने आने के बाद उसकी हालत बिगड़ गई और उसे आनन-फानन में दिल्ली के एक बड़े सरकारी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जहां उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है

बिना डॉक्टर की सलाह, एआई पर भरोसा
जानकारी के मुताबिक, मरीज ने हाई-रिस्क यौन संबंध के बाद एचआईवी संक्रमण के खतरे को देखते हुए इंटरनेट और एआई टूल्स से दवा संबंधी जानकारी हासिल की। इसके बाद वह एक केमिस्ट की दुकान पर पहुंचा और एचआईवी से बचाव के लिए 28 दिन के कोर्स वाली दवा खरीदकर खुद ही लेना शुरू कर दिया।
करीब एक सप्ताह बाद मरीज में दवा के गंभीर साइड इफेक्ट्स दिखने लगे। आंखों और त्वचा से जुड़ी परेशानियां बढ़ती चली गईं, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया।
स्टीवंस-जॉनसन सिंड्रोम की पुष्टि
अस्पताल में जांच के दौरान डॉक्टरों ने मरीज को स्टीवंस-जॉनसन सिंड्रोम (SJS) से पीड़ित पाया। डॉक्टरों के अनुसार यह एक दुर्लभ लेकिन बेहद खतरनाक बीमारी है, जो आमतौर पर दवाओं से होने वाली एलर्जी या संक्रमण के कारण होती है।
इस बीमारी की शुरुआत फ्लू जैसे लक्षणों से होती है, लेकिन जल्द ही यह दर्दनाक चकत्तों, छालों और त्वचा के छिलने में बदल जाती है। यह स्थिति मेडिकल इमरजेंसी मानी जाती है और इसमें तुरंत अस्पताल में भर्ती कर इलाज जरूरी होता है।
ड्रग कंट्रोल विभाग हुआ सक्रिय
मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली सरकार का ड्रग कंट्रोल विभाग हरकत में आ गया है। विभाग ने मरीज से संबंधित उस केमिस्ट की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है, जिसने बिना पर्चे के यह दवा बेची। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
एआई से इलाज का खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एआई केवल जानकारी का माध्यम हो सकता है, लेकिन वह डॉक्टर का विकल्प नहीं है। खासतौर पर एचआईवी जैसी गंभीर बीमारी में बिना मेडिकल जांच और विशेषज्ञ सलाह के दवा लेना जानलेवा साबित हो सकता है।
एड्स से मौतों में बड़ी गिरावट
इस बीच, देश के लिए राहत की खबर यह है कि एड्स से होने वाली मौतों में करीब 80 फीसदी तक कमी आई है। वहीं, नए एचआईवी संक्रमण के मामलों में भी लगभग 48 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, एम्स और आईसीएमआर के डॉक्टरों द्वारा किए गए अध्ययनों में यह सामने आया है कि ‘जांच कराओ और तुरंत इलाज शुरू करो’ नीति ने एचआईवी पर काफी हद तक लगाम लगाई है।
इलाज से बदली एचआईवी मरीजों की जिंदगी
विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर इलाज और आधुनिक दवाओं की मदद से अब एचआईवी संक्रमित व्यक्ति शादी कर सकता है, बच्चे पैदा कर सकता है और लंबी, स्वस्थ जिंदगी जी सकता है।
रिसर्च बताती है कि देश में 50 वर्ष से अधिक उम्र के एचआईवी मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2000 में यह आंकड़ा जहां 17 फीसदी था, वहीं अब यह बढ़कर 37 फीसदी तक पहुंच गया है।
इसके अलावा, मां से बच्चे में एचआईवी संक्रमण का खतरा लगभग शून्य हो चुका है, जो इलाज की सफलता को दर्शाता है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
डॉक्टरों ने साफ चेतावनी दी है कि इंटरनेट या एआई से मिली जानकारी के आधार पर खुद दवा लेना बेहद खतरनाक हो सकता है। किसी भी तरह के जोखिम या संक्रमण की आशंका होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना ही सुरक्षित और सही विकल्प है।
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