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आंधी-बारिश का कहर: दीवार और पेड़ गिरने से तीन की मौत, दो मासूम भी हादसे का शिकार, कई घायल

तेज आंधी और बारिश ने उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में तबाही मचा दी। एक ही दिन में अलग-अलग घटनाओं में दो मासूम बच्चों समेत तीन लोगों की जान चली गई, जबकि कई लोग घायल हो गए। प्राकृतिक आपदा के इस कहर ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं और गांवों में मातम पसरा हुआ है।

सादाबाद में दर्दनाक हादसा, खेलते-खेलते गई दो बच्चों की जान

Sadabad क्षेत्र के गांव बिलारा में गुरुवार शाम तेज आंधी और बारिश के दौरान बड़ा हादसा हुआ। यहां एक निर्माणाधीन मकान की पुरानी दीवार अचानक गिर गई, जिसके मलबे में दबकर दो मासूम बच्चों की मौत हो गई।

जानकारी के अनुसार, किसान जयप्रकाश उर्फ लल्लू के घर पर निर्माण कार्य चल रहा था। मकान का एक हिस्सा पुराना था और उसकी दीवार पहले से कमजोर बताई जा रही थी। शाम करीब पांच बजे मौसम अचानक बदला और तेज आंधी के साथ बारिश शुरू हो गई। हवा का दबाव इतना अधिक था कि पुरानी दीवार उसे सहन नहीं कर सकी और भरभराकर गिर पड़ी।

उस वक्त जयप्रकाश की 10 वर्षीय बेटी नेहा और पड़ोसी जितेंद्र का 9 वर्षीय बेटा मनीष वहीं पास में खेल रहे थे। दीवार गिरने से दोनों बच्चे मलबे के नीचे दब गए। नेहा की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल मनीष को परिजन अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।

गांव में पसरा मातम, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

इस दर्दनाक हादसे के बाद दोनों परिवारों में कोहराम मच गया। गांव में हर कोई इस घटना से स्तब्ध है। बच्चों की मौत से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और राहत कार्य में जुट गए।

राजस्व विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने पीड़ित परिवारों से बातचीत कर घटना की रिपोर्ट तैयार की है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता दी जाए।

नगला जयलाल में भी दीवार गिरने से युवक घायल

आंधी-बारिश का असर केवल बिलारा गांव तक सीमित नहीं रहा। Sadabad क्षेत्र के ही नगला जयलाल गांव में भी एक मकान की दीवार अचानक गिर गई। इस हादसे में नारायण सिंह नामक व्यक्ति घायल हो गए। उन्हें तुरंत उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

मुरसान में पेड़ गिरने से किसान की मौत

वहीं Mursan क्षेत्र के गांव बर्द्धवारी में एक और दुखद घटना सामने आई। यहां 52 वर्षीय किसान खजान सिंह खेत में बकरियां चरा रहे थे, तभी तेज आंधी के चलते एक बड़ा पेड़ उनके ऊपर गिर गया।

पेड़ के नीचे दबने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के दौरान उनके साथ मौजूद 10 बकरियां भी मारी गईं। आसपास मौजूद लोगों ने उनकी चीख-पुकार सुनकर उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन पेड़ भारी होने के कारण उन्हें तुरंत नहीं निकाला जा सका।

बाद में जेसीबी मशीन बुलाकर पेड़ को हटाया गया और खजान सिंह को बाहर निकाला गया। उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

खजान सिंह की मौत से उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वह अपने पीछे पत्नी और विवाहित बेटे-बेटियों को छोड़ गए हैं। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में शोक का माहौल है और हर कोई इस घटना से गहरे सदमे में है।

नगला बाबू में भी कई लोग घायल

आंधी-बारिश का असर Mursan क्षेत्र के नगला बाबू गांव में भी देखने को मिला। यहां एक दीवार गिरने से कई युवक घायल हो गए। हादसे के समय कुछ युवक क्रिकेट खेल रहे थे और कुछ लोग पास में बैठे थे।

दीवार गिरने से विवेक (24), रोहित (22), मंजीत (22), काके (25) और महाराज सिंह (45) घायल हो गए। सभी घायलों को तुरंत निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

प्रशासन हरकत में, जांच शुरू

घटनाओं की सूचना मिलते ही प्रशासन सक्रिय हो गया। एसडीएम मनीष चौधरी ने बताया कि राजस्व विभाग की टीम को मौके पर भेजा गया है और पूरे मामले की जांच की जा रही है। पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया गया है।

पुलिस ने मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। साथ ही, प्रशासन द्वारा आपदा राहत कोष से आर्थिक मदद देने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।

ग्रामीणों की मांग—मिले उचित मुआवजा

स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मृतकों के परिवारों को पर्याप्त आर्थिक सहायता दी जाए। उनका कहना है कि ऐसे हादसों में गरीब परिवार पूरी तरह टूट जाते हैं, इसलिए सरकार को आगे आकर उनकी मदद करनी चाहिए।

ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि पुराने और जर्जर मकानों की जांच कर उन्हें समय रहते सुरक्षित बनाया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसे न हों।

मौसम की मार से बढ़ा खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते मौसम के कारण अचानक तेज आंधी और बारिश की घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे में कच्चे और पुराने मकान ज्यादा खतरे में रहते हैं। ग्रामीण इलाकों में जहां निर्माण कार्य अधूरा होता है या पुरानी दीवारें कमजोर होती हैं, वहां हादसे की संभावना और बढ़ जाती है।

सावधानी ही बचाव

इस तरह की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सतर्क रहना बेहद जरूरी है। आंधी-तूफान के समय खुले स्थानों से दूर रहना, कमजोर संरचनाओं के पास न जाना और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेना जरूरी है।

निष्कर्ष

सादाबाद और मुरसान में हुई ये घटनाएं बेहद दर्दनाक हैं, जिन्होंने कई परिवारों को गहरे दुख में डाल दिया है। दो मासूम बच्चों समेत तीन लोगों की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है।

प्रशासन जहां एक ओर राहत और सहायता की प्रक्रिया में जुटा है, वहीं यह हादसा एक बड़ी चेतावनी भी है कि बदलते मौसम के साथ सतर्कता और मजबूत बुनियादी ढांचे की जरूरत पहले से ज्यादा बढ़ गई है।

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