दिल्ली से मुरथल तक का सफर अक्सर दोस्तों के साथ मौज-मस्ती और स्वादिष्ट पराठों के लिए जाना जाता है, लेकिन इसी खुशी भरे सफर ने सात दोस्तों के एक समूह के लिए दर्दनाक मोड़ ले लिया। देर रात पराठे खाने निकले इन युवकों की वापसी कभी घर तक नहीं पहुंच सकी। सोनीपत के नेशनल हाईवे-44 पर हुए भीषण सड़क हादसे में दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके पांच साथी गंभीर रूप से घायल हो गए।

यह हादसा सोमवार तड़के उस समय हुआ, जब सभी दोस्त मुरथल से वापस दिल्ली लौट रहे थे। बताया जा रहा है कि सातों दोस्त आधी रात को अचानक पराठे खाने का प्लान बनाकर निकले थे। वे सभी दिल्ली के अलग-अलग इलाकों—चांद बाग, नंद नगरी, मुस्तफाबाद, बृजपुरी और आसपास के क्षेत्रों से थे। आपस में गहरी दोस्ती होने के कारण उन्होंने देर रात मुरथल जाने का फैसला किया और अपने साथी बिलाल की होंडा अमेज कार में सवार होकर निकल पड़े।
मुरथल पहुंचकर सभी दोस्तों ने ढाबे पर खाना खाया और कुछ समय बिताने के बाद तड़के करीब चार बजे दिल्ली के लिए वापसी शुरू की। उस वक्त शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा।
जब उनकी कार सोनीपत के गांव राई के पास स्थित राजीव गांधी एजुकेशन सिटी के सामने पहुंची, तभी अचानक कार का संतुलन बिगड़ गया। तेज रफ्तार में चल रही गाड़ी अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार ने लोहे की ग्रिल को तोड़ दिया और कई बार पलटती हुई संपर्क मार्ग के पास जाकर एजुकेशन सिटी की दीवार से टकराकर रुकी।
हादसा इतना भीषण था कि कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। आसपास से गुजर रहे राहगीरों ने जब यह दृश्य देखा तो तुरंत पुलिस को सूचना दी। कुछ लोगों ने मौके पर ही घायलों को बाहर निकालने की कोशिश भी की।
सूचना मिलते ही राई थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस टीम ने स्थानीय लोगों की मदद से कार में फंसे सभी युवकों को बाहर निकाला। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। कार चला रहे बिलाल (25) और उनके साथी विशाल (24) की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। दोनों की मौत ने उनके परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया।
वहीं अन्य पांच युवक—उबेद, राहुल, दानिश, फहाद और शोएब—गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी को तुरंत सोनीपत के नागरिक अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत गंभीर देखते हुए उन्हें पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया गया। बाद में परिजन उन्हें दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में ले गए, जहां उनका इलाज जारी है।
इस हादसे ने एक बार फिर तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने के खतरों को उजागर कर दिया है। शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि कार की गति काफी तेज थी, जिससे चालक नियंत्रण खो बैठा। हाईवे पर थोड़ी सी भी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है, और यह घटना इसका एक दर्दनाक उदाहरण बन गई।
पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। यह भी देखा जा रहा है कि क्या चालक को झपकी आई थी या फिर कोई तकनीकी खराबी इस हादसे की वजह बनी। हालांकि, प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कार की गति काफी अधिक थी, जिससे हादसे की गंभीरता और बढ़ गई।
इस घटना के बाद मृतकों के घरों में मातम पसरा हुआ है। परिवारों को यकीन ही नहीं हो रहा कि जो बच्चे कुछ घंटे पहले हंसते-खेलते घर से निकले थे, वे अब कभी वापस नहीं आएंगे। मोहल्लों में भी शोक का माहौल है और लोग इस हादसे को लेकर दुखी हैं।
मुरथल, जो अपने स्वादिष्ट पराठों के लिए दूर-दूर तक मशहूर है, अक्सर रात में युवाओं का पसंदीदा ठिकाना बन जाता है। लेकिन देर रात लंबी दूरी तय करना, खासकर थकान और तेज रफ्तार के साथ, जोखिम भरा हो सकता है। यह हादसा एक चेतावनी भी है कि सड़क पर सुरक्षा को नजरअंदाज करना कभी भी भारी पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रात के समय ड्राइविंग करते वक्त विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। नींद, थकान और खाली सड़कों पर तेज रफ्तार का संयोजन अक्सर दुर्घटनाओं का कारण बनता है। ऐसे में ड्राइवर को सतर्क रहना और गति सीमित रखना बेहद जरूरी है।
इस दर्दनाक हादसे ने सात दोस्तों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। जहां दो दोस्तों की जान चली गई, वहीं बाकी पांच जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। एक खुशी भरी रात, जो सिर्फ दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए शुरू हुई थी, अब एक दुखद याद बनकर रह गई है।
यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि कुछ पलों की लापरवाही किस तरह पूरी जिंदगी को बदल सकती है। सड़क पर सुरक्षा केवल नियम नहीं, बल्कि जीवन की सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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