उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। यहां पति-पत्नी के बीच हुए विवाद के बाद एक 35 वर्षीय महिला ने फंदा लगाकर अपनी जान दे दी। इस घटना से पूरे परिवार में शोक की लहर दौड़ गई है। महिला अपने पीछे तीन छोटे बच्चों को छोड़ गई है, जिनके सिर से मां का साया हमेशा के लिए उठ गया।

घटना चंदपा थाना क्षेत्र के गांव कोका की बताई जा रही है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण फांसी लगना बताया गया है। फिलहाल इस मामले में किसी भी पक्ष की ओर से कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है, हालांकि पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।
16 साल पहले हुई थी शादी
जानकारी के अनुसार मृतका बेबी मूल रूप से जलेसर क्षेत्र के गांव सांता नवीपुर की रहने वाली थी। लगभग 16 वर्ष पहले उसकी शादी हाथरस के गांव कोका निवासी महेंद्र के साथ हुई थी। शादी के बाद से वह अपने पति और बच्चों के साथ ससुराल में ही रह रही थी।
परिजनों के अनुसार शुरू में सब कुछ सामान्य था, लेकिन पिछले कुछ महीनों से महिला मानसिक रूप से परेशान रहने लगी थी। हालांकि परेशानी की वजह क्या थी, इसे लेकर परिवार के लोग स्पष्ट रूप से कुछ नहीं बता पा रहे हैं।
बेटी की पिटाई को लेकर हुआ विवाद
बताया जा रहा है कि 7 मार्च की शाम घर में एक छोटी-सी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ था। उस दिन महिला बेबी ने किसी बात पर अपनी बेटी की पिटाई कर दी थी।
जब उसके पति महेंद्र को इस बात का पता चला तो उन्होंने इस पर आपत्ति जताई। उन्होंने पत्नी से कहा कि बच्चों के साथ इस तरह का व्यवहार ठीक नहीं है। इसी बात को लेकर पति-पत्नी के बीच कहासुनी शुरू हो गई।
शुरुआत में यह सामान्य बहस थी, लेकिन धीरे-धीरे दोनों के बीच तनाव बढ़ गया। बात इतनी बढ़ गई कि दोनों के बीच तीखी बहस होने लगी।
पति घर से बाहर चला गया
परिजनों के अनुसार विवाद के बाद महेंद्र घर से बाहर चले गए थे। उनका मानना था कि कुछ देर बाद स्थिति सामान्य हो जाएगी और माहौल शांत हो जाएगा।
लेकिन इसी दौरान बेबी गुस्से और आवेश में अपने कमरे में चली गई। उसने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। उस समय किसी को भी अंदाजा नहीं था कि वह इतना बड़ा कदम उठा सकती है।
कमरे में फंदे से लटका मिला शव
बताया जा रहा है कि कमरे में जाने के बाद बेबी ने पंखे के कुंदे से दुपट्टे का फंदा बनाकर फांसी लगा ली। कुछ देर तक जब वह कमरे से बाहर नहीं आई तो परिजनों को शक हुआ।
परिवार के लोग उसे आवाज लगाने लगे, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं आया। इसके बाद परिजन कमरे के पास पहुंचे और किसी तरह अंदर झांककर देखा तो उनके होश उड़ गए।
कमरे के अंदर बेबी का शव पंखे से लटका हुआ था। यह दृश्य देखकर परिवार के लोगों की चीख निकल गई और घर में कोहराम मच गया।
पुलिस को दी गई सूचना
घटना की जानकारी तुरंत पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही चंदपा थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने शव को नीचे उतरवाया और पूरे मामले की जांच शुरू की।
इसके बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस ने मौके पर मौजूद लोगों से भी घटना के बारे में जानकारी जुटाई।
मायके वाले भी पहुंचे गांव
घटना की खबर मिलते ही महिला के मायके वाले भी गांव कोका पहुंच गए। बेटी की मौत की खबर सुनते ही परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
मायके पक्ष के लोग भी इस घटना से स्तब्ध थे। उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा था कि बेबी अब इस दुनिया में नहीं रही।
तीन बच्चों के सिर से उठा मां का साया
बेबी की मौत के बाद सबसे ज्यादा असर उसके बच्चों पर पड़ा है। महिला अपने पीछे तीन बच्चों को छोड़ गई है। बच्चों की उम्र अभी काफी कम बताई जा रही है।
मां के अचानक चले जाने से बच्चों का भविष्य भी चिंता का विषय बन गया है। गांव के लोग भी इस बात को लेकर दुखी हैं कि अब इन बच्चों की परवरिश कैसे होगी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया सच
इस मामले में पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में महिला की मौत का कारण हैंगिंग यानी फांसी लगना बताया गया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या का मामला प्रतीत हो रहा है।
पुलिस का बयान
इस पूरे मामले को लेकर सादाबाद क्षेत्राधिकारी अमित पाठक ने बताया कि महिला ने फांसी लगाकर आत्महत्या की है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी यही कारण सामने आया है।
उन्होंने कहा कि फिलहाल इस मामले में किसी भी पक्ष की ओर से कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। यदि कोई तहरीर मिलती है तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
परिवार में पसरा मातम
महिला की मौत के बाद गांव में शोक का माहौल है। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है। जिस घर में कुछ समय पहले तक सामान्य जीवन चल रहा था, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है।
गांव के लोग भी इस घटना को लेकर काफी दुखी हैं। उनका कहना है कि कभी-कभी छोटी-छोटी पारिवारिक बातें भी बड़ा रूप ले लेती हैं और उसका परिणाम बेहद दुखद होता है।
एक पल का गुस्सा बना जिंदगी भर का दुख
यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि गुस्से या आवेश में लिया गया फैसला कई बार पूरे परिवार की जिंदगी बदल देता है। एक छोटी सी बहस ने तीन बच्चों से उनकी मां को हमेशा के लिए छीन लिया।
ऐसे मामलों में धैर्य और समझदारी बहुत जरूरी होती है। परिवार और समाज को भी इस दिशा में जागरूक होने की जरूरत है, ताकि ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।
हाथरस की यह घटना सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं है, बल्कि यह समाज के लिए भी एक गंभीर संदेश है कि भावनात्मक तनाव और पारिवारिक विवादों को समय रहते समझना और संभालना बेहद जरूरी है।
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