हरियाणा के अंबाला और नारायणगढ़ क्षेत्र में मंगलवार और उससे पहले हुई दो अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आकर एक युवक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, वहीं दूसरी ओर कार की टक्कर से एक बुजुर्ग दंपती गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों घटनाओं ने न सिर्फ पीड़ित परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है, बल्कि आम लोगों के बीच भी डर और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है।

पहली घटना नारायणगढ़ क्षेत्र के लौटों गांव के पुल के पास की है, जहां मंगलवार शाम करीब 7 बजे एक तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक सवार युवक को जोरदार टक्कर मार दी। मृतक की पहचान यमुनानगर के अली शेरपुर निवासी प्रवीण कुमार के रूप में हुई है। हादसा इतना भयावह था कि टक्कर के बाद ट्रक प्रवीण के ऊपर से गुजर गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
प्रवीण कुमार कालाआम्ब में एक निजी संस्थान में सिक्योरिटी गार्ड के रूप में कार्यरत था और रोजाना की तरह अपनी ड्यूटी खत्म कर घर लौट रहा था। उसके साथ उसका चचेरा भाई चरण सिंह भी मौजूद था, जो उसी दिन उससे मिलने कालाआम्ब आया हुआ था। चरण सिंह ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि ड्यूटी समाप्त होने के बाद दोनों अपनी-अपनी बाइक पर सवार होकर नारायणगढ़ की ओर जा रहे थे।
जब वे लौटों गांव के पुल के पास पहुंचे, तभी पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने प्रवीण की बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि प्रवीण सड़क पर गिर पड़ा और ट्रक चालक वाहन को नियंत्रित नहीं कर सका, जिससे ट्रक उसके ऊपर से गुजर गया। इस दर्दनाक दृश्य को देख आसपास के लोग भी दहशत में आ गए।
हादसे के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हो गया, जिससे लोगों में आक्रोश फैल गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और अज्ञात ट्रक चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
प्रवीण की मौत की खबर जैसे ही उसके परिवार तक पहुंची, घर में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बताया जा रहा है कि प्रवीण अपने परिवार का मुख्य कमाने वाला सदस्य था और उसकी अचानक मौत से परिवार पर आर्थिक संकट भी गहरा गया है।
वहीं, दूसरी घटना अंबाला कैंट क्षेत्र में एसडी कॉलेज के पास की है, जहां एक तेज रफ्तार कार ने एक्टिवा सवार बुजुर्ग दंपती को टक्कर मार दी। इस हादसे में 79 वर्षीय हरभजन सिंह और उनकी पत्नी कुलदीप कौर गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
घायल हरभजन सिंह भारतीय नौसेना से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं और वर्तमान में वशिष्ठ नगर में रहते हैं। उन्होंने पुलिस को दी जानकारी में बताया कि 30 मार्च की सुबह करीब 8 बजे वह अपनी पत्नी के साथ एक्टिवा पर सवार होकर ईसीएचएस अस्पताल दवाई लेने जा रहे थे।
जैसे ही वे एसडी कॉलेज के सामने कट से मुड़ने लगे, तभी तेज रफ्तार से आ रही कार ने उनकी एक्टिवा को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों सड़क पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए। कुलदीप कौर के सिर में गहरी चोट आई है, जबकि दोनों पैरों में फ्रैक्चर बताया जा रहा है।
हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत घायलों को अस्पताल पहुंचाया और पुलिस को सूचना दी। अंबाला कैंट थाना पुलिस ने मामले में कार चालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है और जांच शुरू कर दी है।
इन दोनों घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर सड़क पर चलना कितना सुरक्षित है? तेज रफ्तार, लापरवाही और यातायात नियमों की अनदेखी लगातार लोगों की जान ले रही है, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में कोई ठोस सुधार नजर नहीं आ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क हादसों के पीछे सबसे बड़ी वजह लापरवाही और नियमों का पालन न करना है। कई बार चालक तेज रफ्तार में वाहन चलाते हैं, ओवरटेकिंग के दौरान सावधानी नहीं बरतते और ट्रैफिक सिग्नल्स की अनदेखी करते हैं, जिससे ऐसे हादसे होते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लौटों गांव के पुल के पास पहले भी कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद वहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि उस क्षेत्र में स्पीड ब्रेकर लगाए जाएं और ट्रैफिक निगरानी बढ़ाई जाए ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।
वहीं, अंबाला कैंट के एसडी कॉलेज के पास भी ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर कई बार शिकायतें सामने आ चुकी हैं। यहां अक्सर तेज रफ्तार वाहन चलते हैं और कट के पास दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वहां ट्रैफिक पुलिस की तैनाती बढ़ाई जानी चाहिए और वाहनों की गति पर नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।
इन हादसों ने यह भी दिखाया है कि आपात स्थिति में लोगों की मदद करने की भावना अभी भी जिंदा है। दोनों घटनाओं में स्थानीय लोगों ने तुरंत पीड़ितों की मदद की और उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जिससे यह साबित होता है कि समाज में मानवता अभी भी कायम है।
फिलहाल पुलिस दोनों मामलों की जांच कर रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कह रही है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इन घटनाओं से कोई सबक लिया जाएगा? क्या प्रशासन और आम लोग मिलकर सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर होंगे?
प्रवीण कुमार की असमय मौत और बुजुर्ग दंपती की गंभीर चोटें इस बात का संकेत हैं कि सड़क पर जरा सी लापरवाही कितनी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है। जरूरत है कि हर व्यक्ति यातायात नियमों का पालन करे और जिम्मेदारी से वाहन चलाए, ताकि ऐसे हादसों को रोका जा सके।
इन घटनाओं ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि सड़क सुरक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक की भी उतनी ही जिम्मेदारी है। जब तक हम सभी मिलकर इस दिशा में प्रयास नहीं करेंगे, तब तक ऐसे हादसे होते रहेंगे और निर्दोष लोग अपनी जान गंवाते रहेंगे।
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