हरियाणा के अंबाला जिले में किसानों की परेशानियों को देखते हुए एक अहम पहल की गई है। फसल खरीद प्रक्रिया में लागू की गई नई बायोमेट्रिक प्रणाली और ऑनलाइन व्यवस्थाओं के चलते जिन किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था, उनके लिए अब राहत की खबर सामने आई है। अंबाला छावनी स्थित शाहपुर अनाज मंडी में इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) द्वारा ‘कष्ट निवारण केंद्र’ की स्थापना की गई है, जिसका उद्देश्य किसानों की तकनीकी और प्रशासनिक समस्याओं का मौके पर समाधान करना है।

यह निर्णय एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान लिया गया, जो अंकुर चौधरी के कार्यालय में आयोजित की गई थी। बैठक की अध्यक्षता इनेलो के जिलाध्यक्ष जगमाल सिंह रोलों ने की। इस बैठक में पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और किसानों की मौजूदा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि आधुनिक तकनीकी प्रक्रियाओं के चलते खासतौर पर छोटे और सीमांत किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इनेलो के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रकाश भारती और महासचिव शीशपाल जंधेडी ने इस मौके पर कहा कि सरकार द्वारा लागू की गई बायोमेट्रिक प्रणाली और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया का उद्देश्य भले ही पारदर्शिता लाना हो, लेकिन इसके कारण जमीनी स्तर पर कई किसान पीछे छूटते नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि तकनीकी जानकारी के अभाव में किसान अपनी फसल का पंजीकरण नहीं कर पा रहे हैं और गेट पास जैसी प्रक्रियाओं में भी अटक रहे हैं।
इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए शाहपुर मंडी में ‘कष्ट निवारण केंद्र’ की शुरुआत की गई है। इस केंद्र पर इनेलो के प्रशिक्षित कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहेंगे, जो किसानों को बायोमेट्रिक सत्यापन, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, गेट पास बनवाने और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं में सहायता प्रदान करेंगे। इसके साथ ही, यदि किसी किसान को प्रशासनिक स्तर पर कोई दिक्कत आती है, तो उसे भी तुरंत दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
केंद्र का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी किसान केवल तकनीकी जानकारी के अभाव में अपनी फसल बेचने से वंचित न रह जाए। खासतौर पर बुजुर्ग किसान और वे लोग जो डिजिटल साधनों का कम इस्तेमाल करते हैं, उनके लिए यह केंद्र काफी मददगार साबित होगा।
इस पहल को लेकर किसानों में भी सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई किसानों का कहना है कि पिछले कुछ समय से ऑनलाइन प्रक्रियाओं के कारण उन्हें बार-बार मंडी के चक्कर लगाने पड़ रहे थे, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी हो रही थी। अब इस केंद्र के माध्यम से उन्हें एक ही जगह पर सभी समस्याओं का समाधान मिल सकेगा।
बैठक में मौजूद नेताओं ने यह भी कहा कि अगर यह पहल सफल रहती है, तो इसे अन्य मंडियों में भी शुरू किया जा सकता है। उनका मानना है कि किसानों की समस्याओं का समाधान केवल नीतियां बनाने से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करने से ही संभव है।
इस मौके पर इनेलो के कई अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे, जिनमें तेजपाल शर्मा, चरनजीत मोहड़ी और रूबल छपरा प्रमुख रूप से शामिल थे। सभी ने इस पहल को किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और इसे सफल बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता जताई।
विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि क्षेत्र में डिजिटल बदलाव जरूरी है, लेकिन इसके साथ-साथ किसानों को प्रशिक्षित करना और उन्हें तकनीकी सहायता देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो डिजिटल विभाजन के कारण छोटे किसान पीछे रह जाएंगे और इसका सीधा असर उनकी आय पर पड़ेगा।
सरकार द्वारा लागू की गई नई प्रणालियों का उद्देश्य पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है, लेकिन इनका सही लाभ तभी मिल सकता है जब सभी किसान इनका उपयोग करने में सक्षम हों। ऐसे में इनेलो द्वारा शुरू किया गया यह ‘कष्ट निवारण केंद्र’ एक पुल का काम करेगा, जो किसानों और तकनीकी प्रक्रियाओं के बीच की दूरी को कम करेगा।
कृषि विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि मंडियों में इस तरह के सहायता केंद्रों की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। कई बार किसान केवल जानकारी के अभाव में अपनी फसल का सही मूल्य नहीं प्राप्त कर पाते या फिर समय पर बिक्री नहीं कर पाते। ऐसे में यह केंद्र उन्हें सही मार्गदर्शन देगा।
इस पहल से यह भी संकेत मिलता है कि राजनीतिक दल अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करके लोगों की समस्याओं का समाधान करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। हालांकि, यह भी जरूरी है कि ऐसी पहलें निरंतर चलती रहें और केवल एक अभियान तक सीमित न रहें।
अंत में, यह कहा जा सकता है कि शाहपुर मंडी में शुरू किया गया ‘कष्ट निवारण केंद्र’ किसानों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकता है। यह न केवल उनकी तकनीकी समस्याओं को दूर करेगा, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी प्रेरित करेगा। यदि इस तरह की पहलें अन्य मंडियों में भी लागू की जाती हैं, तो इसका व्यापक सकारात्मक प्रभाव पूरे कृषि क्षेत्र पर देखने को मिल सकता है।
किसानों की समस्याओं को समझना और उनका समाधान करना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। ऐसे में यह पहल एक उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है, जो आने वाले समय में किसानों के जीवन को आसान बना सकती है।
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