दिल्ली की यातायात व्यवस्था में फेज-4 मेट्रो एक बड़ा नवाचार लेकर आई है। पहली बार राजधानी में एक ही पिलर पर नीचे सड़क, बीच में फ्लाईओवर और सबसे ऊपर मेट्रो ट्रैक—तीनों का एकीकृत ढांचा तैयार किया गया है। इस डबल डेकर मॉडल से कम जमीन में अधिक सुविधाएं विकसित होंगी और ट्रैफिक का दबाव उल्लेखनीय रूप से घटेगा।
फेज-4 के तहत विकसित हो रहे तीन डबल डेकर कॉरिडोर इस वर्ष जनता के लिए खोलने की तैयारी में हैं। इस डिजाइन का उद्देश्य सतही सड़कों पर बसों व स्थानीय वाहनों की आवाजाही बनाए रखते हुए, बीच के स्तर पर तेज रफ्तार वाहनों को निर्बाध मार्ग देना और शीर्ष स्तर पर मेट्रो का सुचारु संचालन सुनिश्चित करना है।
उत्तर-पूर्वी दिल्ली के मजलिस पार्क–मौजपुर कॉरिडोर पर यह नजारा सबसे पहले देखने को मिलेगा। यहां डबल डेकर संरचना लगभग पूरी हो चुकी है। मेट्रो ट्रैक संचालन के लिए तैयार है और सड़क से जोड़ने वाली रैंप बनते ही इलाके को रोजाना के जाम से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
दक्षिण दिल्ली में एरोसिटी से तुगलकाबाद तक प्रस्तावित गोल्डन लाइन पर भी यही प्रयोग हो रहा है। संगम विहार से अंबेडकर नगर के बीच महरौली–बदरपुर रोड पर बन रहा डबल डेकर हिस्सा इस व्यस्त मार्ग के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। छह लेन के फ्लाईओवर के साथ मेट्रो कनेक्टिविटी जुड़ने से यात्रा समय घटेगा और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। निर्माण की रफ्तार को देखते हुए इसके भी इस साल पूरा होने की संभावना है।
इसी तरह, जनकपुरी पश्चिम–आरके आश्रम कॉरिडोर पर आजादपुर से डेरावल नगर के बीच डबल डेकर सेक्शन तैयार किया जा रहा है। आजादपुर मंडी क्षेत्र में भारी ट्रैफिक दबाव रहता है। फ्लाईओवर के चालू होते ही सतही सड़कों पर बोझ कम होगा और मेट्रो यात्रियों को तेज व भरोसेमंद विकल्प मिलेगा।
कुल मिलाकर, फेज-4 के ये डबल डेकर कॉरिडोर दिल्ली के शहरी परिवहन में एक नई दिशा तय करेंगे—जहां जगह का बेहतर उपयोग, कम जाम और तेज यात्रा एक साथ संभव
होगी।
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