नई दिल्ली। 2021 के चर्चित कार्डेलिया क्रूज ड्रग्स केस से जुड़े आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने के केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के आदेश में हस्तक्षेप करने से दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ इनकार कर दिया है। केंद्र सरकार ने इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

न्यायमूर्ति अनिल क्षतरपाल और न्यायमूर्ति अमित महाजन की खंडपीठ ने केंद्र की अपील पर सुनवाई करते हुए कैट को निर्देश दिया कि वह मुख्य मामले का निपटारा 14 जनवरी को या अधिकतम अगले 10 दिनों के भीतर करने का गंभीर प्रयास करे।
समीर वानखेड़े वर्ष 2021 में मुंबई स्थित नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) में तैनात थे। उसी दौरान शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की गिरफ्तारी से जुड़े कार्डेलिया क्रूज ड्रग्स मामले में उनका नाम सुर्खियों में आया था। उन पर आरोप लगे थे कि उन्होंने आर्यन खान को मामले में फंसाने की धमकी देकर परिवार से 25 करोड़ रुपये की मांग की थी।
वानखेड़े ने कैट में याचिका दायर कर अपने खिलाफ शुरू की गई विभागीय जांच को चुनौती दी थी। आरोप था कि एनसीबी से मुक्त होने के बाद उन्होंने एजेंसी के कानूनी विभाग से जांच से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश की और जांच को प्रभावित करने के उद्देश्य से कानूनी अधिकारी से आश्वासन भी मांगा। कैट ने 27 अगस्त 2025 को इस जांच पर रोक लगा दी थी।
सोमवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि जांच पर रोक लगे लगभग पांच महीने हो चुके हैं, लेकिन इस दौरान विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अदालत ने सवाल उठाया कि जब मामला अब अंतिम बहस के चरण में है, तो यह स्पष्ट किया जाए कि ट्रिब्यूनल किस आधार पर स्थगन आदेश से अप्रभावित होकर निर्णय देगा।
केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि कैट ने बंबई हाईकोर्ट के एक पुराने आदेश का गलत तरीके से हवाला देते हुए जांच पर रोक लगाई, जबकि वह आदेश एक अलग भ्रष्टाचार मामले से संबंधित था। वहीं, वानखेड़े के वकील ने बताया कि 14 जनवरी को मामले की सुनवाई तय है और कैट से अंतिम फैसला कराने की प्रक्रिया ही उपयुक्त होगी।
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