केंद्र सरकार ने असम में Brahmaputra River के नीचे एक अत्याधुनिक ट्विन ट्यूब सुरंग बनाने की महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी दी है। यह सुरंग सामरिक, आर्थिक और परिवहन—तीनों दृष्टियों से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रस्तावित परियोजना देश की पहली और दुनिया की दूसरी ऐसी सुरंग होगी, जिसमें एक ट्यूब से सड़क मार्ग और दूसरी से रेल लाइन संचालित होगी।

करीब 33.7 किलोमीटर लंबी इस परियोजना पर लगभग 18,662 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में यह परियोजना सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के साथ व्यापार और परिवहन के नए रास्ते भी खोलेगी।
पूर्वोत्तर राज्यों को मिलेगा बड़ा फायदा
प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की समिति ने असम में एनएच-15 पर गोहपुर से नुमालीगढ़ तक चार लेन एक्सेस-कंट्रोल ग्रीनफील्ड कनेक्टिविटी परियोजना को मंजूरी दी है।
इसमें नदी के नीचे लगभग 15.79 किलोमीटर लंबी सड़क और रेल सुरंग शामिल होगी। परियोजना के पूरा होने से असम के साथ-साथ अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के बीच संपर्क बेहतर होगा।
साथ ही माल ढुलाई तेज होगी, लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। अभी नुमालीगढ़ से गोहपुर तक पहुंचने के लिए करीब 240 किलोमीटर का लंबा रास्ता तय करना पड़ता है, जिसमें लगभग छह घंटे लगते हैं। सुरंग बनने के बाद यह दूरी घटकर लगभग आधे घंटे में तय की जा सकेगी।
रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से अहम
सरकार के अनुसार यह परियोजना सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य आवाजाही को तेज और सुरक्षित बनाने में मदद करेगी। साथ ही औद्योगिक केंद्रों, तेल रिफाइनरियों और व्यापारिक हब के बीच संपर्क मजबूत होगा।
इसके पूरा होने पर क्षेत्र में निवेश बढ़ने, उद्योगों को गति मिलने और स्थानीय रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। अनुमान है कि निर्माण कार्य के दौरान लगभग 80 लाख व्यक्ति-दिवस का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न होगा।
रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को भी मंजूरी
कैबिनेट ने रेलवे की तीन प्रमुख मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। इनमें कसारा-मनमाड, दिल्ली-अंबाला और बेल्लारी-होस्पेटे रेल खंडों पर तीसरी और चौथी लाइन बिछाई जाएंगी।
इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत लगभग 18,509 करोड़ रुपये है और इन्हें 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इनसे दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और कर्नाटक के 12 जिलों को लाभ होगा।
नई रेल लाइनों के निर्माण से लगभग 3,902 गांवों तक बेहतर संपर्क पहुंचेगा और करीब 97 लाख लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है।
पर्यटन और व्यापार दोनों को मिलेगा बढ़ावा
इन परिवहन परियोजनाओं से कई प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंच आसान हो जाएगी। महाराष्ट्र का Trimbakeshwar Jyotirlinga, कर्नाटक का विश्व प्रसिद्ध धरोहर स्थल Hampi, ऐतिहासिक Bellary Fort तथा Tungabhadra Dam जैसे पर्यटन स्थलों तक यात्रियों का सफर आसान होगा।
बेहतर रेल और सड़क नेटवर्क से पर्यटन उद्योग को गति मिलेगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
माल ढुलाई क्षमता में बड़ा इजाफा
रेल और सड़क ढांचे में सुधार से कोयला, स्टील, लौह अयस्क, सीमेंट, खाद्यान्न, उर्वरक, कंटेनर और पेट्रोलियम उत्पाद जैसे प्रमुख माल के परिवहन में तेजी आएगी।
सरकारी आकलन के अनुसार इन परियोजनाओं से माल ढुलाई क्षमता में प्रति वर्ष अतिरिक्त 96 मिलियन टन तक वृद्धि संभव है। इससे उद्योगों को लागत घटाने और समय बचाने में मदद मिलेगी।
अन्य सड़क परियोजनाओं को भी हरी झंडी
सरकार ने महाराष्ट्र में एनएच-160ए के घोटी-त्रिंबक-जव्हार-मनोर-पालघर खंड के पुनर्विकास को मंजूरी दी है, जिसकी लागत लगभग 3,320 करोड़ रुपये है।
इसके अलावा गुजरात में धामसिया-बिटाडा/मोवी और नासरपुर-मालोथा के चार लेन सड़क निर्माण कार्यों को स्वीकृति मिली है। वहीं तेलंगाना में गुडेबेलूर से महबूबनगर तक राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण की योजना को भी मंजूरी दी गई है।
पूर्वोत्तर के लिए विकास का नया अध्याय
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रह्मपुत्र के नीचे बनने वाली ट्विन ट्यूब सुरंग पूर्वोत्तर भारत के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। इससे न केवल रणनीतिक दृष्टि से सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि उद्योग, व्यापार, पर्यटन और रोजगार—चारों क्षेत्रों में विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी।
सरकार की यह पहल देश के दूरदराज इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
स्वर्णिम टाईम्स : Swarnim Times आपका अपना इंटरनेट अख़बार !