पानीपत के एक फैक्टरी इलाके में हुआ एक दर्दनाक हादसा हर किसी को झकझोर कर रख देता है। यहां दो युवा चचेरे भाइयों की मौत उस वक्त हो गई, जब उन्हें फैक्टरी के दूषित पानी के टैंक की सफाई के लिए उतारा गया। यह उनकी पहली ड्यूटी थी, लेकिन यही उनकी जिंदगी की आखिरी साबित हुई।

मृतक नितिन और शिवम, जो कि उत्तर प्रदेश के शामली जिले के रहने वाले थे, अपने परिवार की मदद के लिए काम की तलाश में पानीपत पहुंचे थे। उनके साथ उनका एक रिश्तेदार पहले से ही उसी फैक्टरी में काम करता था। उसी के कहने पर दोनों युवक काम करने के लिए वहां पहुंचे थे।
सोमवार की सुबह फैक्टरी में पहुंचते ही उन्हें एक खतरनाक काम सौंप दिया गया। फैक्टरी परिसर में बने दूषित पानी के टैंक को साफ करने के लिए दोनों को अंदर भेजा गया। टैंक काफी गहरा था और उसमें लंबे समय से गंदा पानी जमा होने के कारण जहरीली गैस बन चुकी थी।
परिजनों का आरोप है कि फैक्टरी प्रबंधन ने सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए थे। न तो गैस मास्क दिया गया और न ही ऑक्सीजन सिलेंडर। दोनों को सीधे टैंक में उतार दिया गया। जैसे ही वे अंदर पहुंचे, जहरीली गैस ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया और उनका दम घुटने लगा।
कुछ ही देर में दोनों बेहोश होकर टैंक के अंदर गिर पड़े। काफी समय तक जब वे बाहर नहीं आए, तो फैक्टरी के अन्य कर्मचारियों को चिंता हुई। इसके बाद एक अन्य व्यक्ति को रस्सी बांधकर अंदर भेजा गया, जिसने दोनों को बेहोश हालत में पाया।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।
इस घटना के बाद मृतकों के परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का कहना है कि फैक्टरी की लापरवाही के कारण ही उनके बच्चों की जान गई है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साथ ही फैक्टरी में सुरक्षा मानकों की भी जांच की जा रही है। यह हादसा यह बताने के लिए काफी है कि काम के दौरान सुरक्षा को नजरअंदाज करना कितना घातक हो सकता है।
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