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एक पतंग ने छीनी मासूम की जान—हाई वोल्टेज तार की चपेट में आकर 13 साल के दीपांशु की मौत, दो दोस्त जिंदगी के लिए जूझ रहे

हरियाणा के पानीपत जिले के अर्जुन नगर इलाके में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। जहां बच्चों का पसंदीदा खेल पतंगबाजी अचानक एक भयावह दुर्घटना में बदल गया। हाई वोल्टेज बिजली के तारों की चपेट में आने से तीन बच्चे गंभीर रूप से झुलस गए, जिनमें से 13 वर्षीय दीपांशु ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं उसके दो दोस्त अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, यह हादसा उस समय हुआ जब दीपांशु अपने दोस्तों के साथ घर की छत पर पतंग उड़ा रहा था। गर्मी के दिनों में पतंग उड़ाना बच्चों का आम शौक होता है और उस दिन भी बच्चे इसी मस्ती में मग्न थे। अचानक एक कटी हुई पतंग आसमान में उड़ती हुई दिखाई दी, जिसे पकड़ने के लिए बच्चों में उत्साह बढ़ गया।

बताया जा रहा है कि दीपांशु ने उस पतंग को पकड़ने के लिए एक पतली लोहे की तार का इस्तेमाल किया। उसने उस तार को पतंग की दिशा में फेंका, ताकि वह उसे खींच सके। लेकिन यह कोशिश उसके लिए जानलेवा साबित हुई। जैसे ही वह लोहे की तार ऊपर से गुजर रही हाई वोल्टेज बिजली की लाइन से टकराई, तेज करंट पूरे तार में दौड़ गया और दीपांशु समेत उसके दोनों दोस्त इसकी चपेट में आ गए।

करंट का झटका इतना तेज था कि तीनों बच्चे मौके पर ही बुरी तरह झुलस गए और बेहोश होकर गिर पड़े। आसपास के लोगों ने जब यह मंजर देखा तो हड़कंप मच गया। परिजन और स्थानीय लोग तुरंत बच्चों को उठाकर पानीपत के सामान्य अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उनका इलाज शुरू किया गया।

डॉक्टरों ने तीनों बच्चों की हालत को गंभीर बताया। दीपांशु की स्थिति सबसे ज्यादा नाजुक थी, क्योंकि वह बुरी तरह झुलस चुका था। डॉक्टरों की टीम ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन आखिरकार वह जिंदगी की जंग हार गया। उसकी मौत की खबर सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया और पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।

वहीं, दीपांशु के दोनों दोस्तों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। डॉक्टरों के अनुसार, दोनों बच्चे भी गंभीर रूप से झुलसे हुए हैं और उन्हें लगातार निगरानी में रखा गया है। उनकी हालत में सुधार लाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

इस हादसे के बाद अर्जुन नगर के लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला। स्थानीय निवासियों ने बिजली विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि इलाके में लंबे समय से हाई वोल्टेज बिजली की तारें बेहद नीचे लटकी हुई हैं, जो हमेशा खतरे का कारण बनी रहती हैं।

लोगों ने बताया कि इस संबंध में कई बार शिकायतें भी की गई थीं, लेकिन विभाग ने कभी इस पर ध्यान नहीं दिया। अगर समय रहते इन तारों को हटाया या सुरक्षित ऊंचाई पर लगाया गया होता, तो शायद यह हादसा नहीं होता और एक मासूम की जान बच जाती।

इस घटना ने यह भी उजागर किया है कि बच्चों में जागरूकता की कमी भी कई बार हादसों का कारण बनती है। पतंग उड़ाते समय लोहे की तार का इस्तेमाल करना बेहद खतरनाक होता है, क्योंकि यह बिजली का सुचालक होता है। ऐसे में हाई वोल्टेज तारों के संपर्क में आने पर करंट लगने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को इस तरह के खतरों के बारे में समय-समय पर जानकारी देना बेहद जरूरी है। स्कूलों और घरों में उन्हें सिखाया जाना चाहिए कि पतंग उड़ाते समय किन सावधानियों का पालन करना चाहिए। इसके अलावा, माता-पिता को भी बच्चों पर नजर रखनी चाहिए, खासकर जब वे छत पर खेल रहे हों।

प्रशासन के लिए भी यह हादसा एक चेतावनी है। अब जरूरी है कि ऐसे इलाकों की पहचान की जाए, जहां बिजली की तारें घरों के बहुत करीब हैं या नीचे लटकी हुई हैं। उन्हें तुरंत सुरक्षित दूरी पर शिफ्ट किया जाए और आवश्यक सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं।

दीपांशु की मौत ने उसके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। एक हंसता-खेलता बच्चा, जो कुछ समय पहले तक अपने दोस्तों के साथ खुशी-खुशी खेल रहा था, अब इस दुनिया में नहीं रहा। उसके माता-पिता के लिए इस दुख को सहना बेहद मुश्किल है।

अंत में, यह घटना हमें यह सिखाती है कि लापरवाही और अनजाने में की गई छोटी-सी गलती भी कितनी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है। जरूरत है कि हम सभी सतर्क रहें, बच्चों को सही दिशा में मार्गदर्शन दें और प्रशासन भी अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाए, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके।

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