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दरभंगा में पत्रकारों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन :: पत्रकार सुरक्षा, निष्पक्ष जांच और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा की उठी मांग

सौरभ शेखर श्रीवास्तव की ब्यूरो रिपोर्ट दरभंगा। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ माने जाने वाले पत्रकारों की सुरक्षा, निष्पक्ष जांच प्रक्रिया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर बुधवार को दरभंगा के पत्रकारों ने एकजुट होकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। जिले में पत्रकारों के विरुद्ध दर्ज हो रहे मामलों, बढ़ती गिरफ्तारियों तथा बिना पर्याप्त जांच के की जा रही कानूनी कार्रवाइयों के विरोध में पत्रकारों ने अपनी आवाज बुलंद की और प्रशासन से पारदर्शी एवं न्यायसंगत व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।

 

इस अवसर पर प्रेस क्लब, दरभंगा में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी कौशल कुमार तथा मिथिला प्रक्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) मनोज कुमार तिवारी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से पत्रकारों ने अपनी चिंताओं से प्रशासन को अवगत कराते हुए पत्रकारों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने की मांग की।

पत्रकारों ने जताई चिंता

ज्ञापन में पत्रकारों ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान जिले के विभिन्न थानों में पत्रकारों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने और गिरफ्तारी की घटनाओं में वृद्धि हुई है। कई मामलों में पत्रकारों को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर दिए बिना ही उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी जाती है। ऐसी स्थिति न केवल पत्रकारों के अधिकारों को प्रभावित करती है, बल्कि स्वतंत्र एवं निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए भी चुनौती उत्पन्न करती है।

पत्रकारों का कहना था कि समाचार संकलन, जनहित से जुड़े मुद्दों को उजागर करना तथा प्रशासनिक और सामाजिक गतिविधियों पर निगरानी रखना पत्रकारों की जिम्मेदारी है। यदि पत्रकार भय और दबाव के वातावरण में कार्य करेंगे तो लोकतंत्र की मूल भावना प्रभावित होगी और जनता तक सही एवं निष्पक्ष जानकारी पहुंचाने की प्रक्रिया बाधित हो सकती है।

 

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एफआईआर दर्ज करने से पहले जांच की मांग

ज्ञापन में पत्रकारों ने मांग की कि किसी भी पत्रकार के विरुद्ध शिकायत प्राप्त होने की स्थिति में तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने के बजाय पहले निष्पक्ष जांच की प्रक्रिया अपनाई जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि किसी पत्रकार के खिलाफ शिकायत मिलने पर इसकी जानकारी जिला प्रशासन और वरीय पुलिस अधिकारियों को दी जाए तथा संबंधित पत्रकार को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर प्रदान किया जाए।

पत्रकारों ने यह भी कहा कि पत्रकारों से जुड़े मामलों की प्रारंभिक जांच डीएसपी स्तर या उससे ऊपर के अधिकारी द्वारा कराई जानी चाहिए। जांच प्रतिवेदन के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाए, ताकि किसी निर्दोष पत्रकार को अनावश्यक कानूनी परेशानियों का सामना न करना पड़े।

पारदर्शी और न्यायसंगत प्रक्रिया की आवश्यकता

पत्रकारों ने प्रशासन के समक्ष यह मांग भी रखी कि पत्रकारों से संबंधित मामलों के निष्पादन के लिए एक स्पष्ट, पारदर्शी और न्यायसंगत प्रक्रिया निर्धारित की जाए। उनका कहना था कि यदि किसी पत्रकार के विरुद्ध शिकायत प्राप्त होती है तो उसकी जांच निष्पक्ष रूप से की जानी चाहिए और तथ्यों के सत्यापन के बाद ही कोई कठोर कदम उठाया जाना चाहिए।

ज्ञापन में कहा गया कि बिना पर्याप्त जांच और साक्ष्यों के गिरफ्तारी या अन्य दंडात्मक कार्रवाई करना न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। इससे न केवल पत्रकारों का मनोबल प्रभावित होता है, बल्कि समाज में भी गलत संदेश जाता है।

पत्रकार संगठनों और प्रशासन के बीच समन्वय की मांग

पत्रकारों ने जिला प्रशासन से यह भी आग्रह किया कि पत्रकार संगठनों और प्रशासन के बीच नियमित संवाद एवं समन्वय की व्यवस्था बनाई जाए। इसके लिए समय-समय पर बैठकें आयोजित की जाएं, जिनमें पत्रकारों की समस्याओं, चुनौतियों और सुझावों पर चर्चा हो सके।

पत्रकारों का मानना है कि संवाद और समन्वय के माध्यम से कई विवादों और गलतफहमियों का समाधान प्रारंभिक स्तर पर ही किया जा सकता है। इससे प्रशासन और मीडिया के बीच बेहतर संबंध स्थापित होंगे तथा जनहित से जुड़े कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी।

दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई रोकने की मांग

ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि पत्रकारों के विरुद्ध दर्ज मामलों की समय-समय पर समीक्षा की जाए। यदि किसी मामले में दुर्भावनापूर्ण या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की आशंका हो तो उसकी निष्पक्ष जांच कर उचित निर्णय लिया जाए।

पत्रकारों ने कहा कि मीडिया समाज का आईना है और पत्रकारों का दायित्व सत्ता, प्रशासन तथा समाज से जुड़े मुद्दों को निष्पक्ष रूप से जनता के सामने लाना है। ऐसे में यदि किसी पत्रकार को उसके कार्य के कारण प्रताड़ित किया जाता है तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंताजनक स्थिति होगी।

प्रेस क्लब से समाहरणालय तक निकाला मार्च

ज्ञापन सौंपने से पूर्व पत्रकारों ने प्रेस क्लब, दरभंगा से समाहरणालय तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला। इस मार्च में बड़ी संख्या में पत्रकार शामिल हुए। पूरे कार्यक्रम के दौरान अनुशासन और शालीनता का विशेष ध्यान रखा गया।

मार्च के दौरान पत्रकारों ने किसी प्रकार की नारेबाजी या उग्र प्रदर्शन नहीं किया, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया। पत्रकारों का कहना था कि उनका उद्देश्य किसी संस्था या व्यक्ति के खिलाफ आंदोलन करना नहीं, बल्कि पत्रकारों की सुरक्षा और निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित करने की दिशा में सकारात्मक पहल की मांग करना है।

गांधी प्रतिमा के समक्ष रखा मौन

समाहरणालय पहुंचने के बाद पत्रकार लहेरियासराय टावर स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष एकत्रित हुए। यहां सभी पत्रकारों ने कुछ समय के लिए मौन धारण कर अपनी मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया।

मौन कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों ने कहा कि गांधीजी के सत्य, अहिंसा और लोकतांत्रिक मूल्यों से प्रेरणा लेते हुए वे अपनी बात प्रशासन और समाज के समक्ष रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य भी सत्य को सामने लाना और समाज को जागरूक करना है, इसलिए पत्रकारों को सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण मिलना आवश्यक है।

 

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लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की भूमिका पर जोर

कार्यक्रम में मौजूद पत्रकारों ने कहा कि लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। पत्रकार समाज और प्रशासन के बीच सेतु का कार्य करते हैं तथा जनता की समस्याओं और अपेक्षाओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाते हैं। इसके साथ ही प्रशासन की योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी भी जनता तक पहुंचाते हैं।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता लोकतंत्र की मजबूती का आधार है। यदि पत्रकारों को बिना उचित कारण के कानूनी दबाव या भय का सामना करना पड़ेगा तो निष्पक्ष रिपोर्टिंग प्रभावित हो सकती है। इसलिए पत्रकारों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है।

प्रशासन से सकारात्मक पहल की उम्मीद

पत्रकारों ने जिलाधिकारी और डीआईजी को सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से उम्मीद जताई कि प्रशासन उनकी मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार करेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पत्रकारों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा निष्पक्ष जांच प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

पत्रकारों का कहना था कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था का निर्माण है जिसमें पत्रकार अपने कर्तव्यों का निर्वहन स्वतंत्र और सुरक्षित वातावरण में कर सकें तथा प्रशासन भी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य कर सके।

बड़ी संख्या में पत्रकार रहे उपस्थित

इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन और ज्ञापन कार्यक्रम में जिले के अनेक पत्रकार शामिल हुए। उपस्थित पत्रकारों में संजय कुमार, अभिषेक कुमार, गुड्डू राज, लाल बाबू, एमएच खान, नौशाद अहमद, चंद्रप्रकाश कर्ण उर्फ टिंकू, विवेक मुस्कान पंडित, फैजान दानिश, आशीष महापात्र, ज़ाहिद अनवर राजू, रोहित कुमार, सूरज कुमार, प्रो. संतोष दत्त झा, कौशल किशोर कर्ण, राहुल चौधरी, लक्ष्मण कुमार, नीरज कुमार राय, सरफराज़ आलम, राकेश झा, धर्मेंद्र मिश्रा, रमन चौधरी, संजय राय, मनोज कुमार झा, प्रभास रंजन, सोनू झा, मोहन झा, लालटून शर्मा, रमेश शर्मा एवं वीरू पासवान सहित बड़ी संख्या में पत्रकार मौजूद रहे।

कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ। पत्रकारों ने एक स्वर में कहा कि लोकतंत्र में स्वतंत्र पत्रकारिता की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है तथा इस दिशा में प्रशासन और समाज दोनों को सकारात्मक भूमिका निभानी होगी।

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