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उन्नाव में “बरगद बचाओ महाअभियान” बना जनआंदोलन की मिसाल, अनूप मिश्र और प्रदीप वर्मा की पहल से बच्चों ने लिया प्रकृति संरक्षण का संकल्प

उन्नाव में “बरगद बचाओ महाअभियान” बना जनआंदोलन की मिसाल, अनूप मिश्र और प्रदीप वर्मा की पहल से बच्चों ने लिया प्रकृति संरक्षण का संकल्प

सौरभ शेखर श्रीवास्तव की रिपोर्ट। पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने की दिशा में उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद स्थित विकास क्षेत्र औरास के उच्च प्राथमिक विद्यालय रामपुर गढ़ौवा ने एक बार फिर अपनी अनूठी पहल से मिसाल पेश की है। विद्यालय परिसर में आयोजित “वृक्षजल कथा” एवं “बरगद बचाओ महाअभियान” ने न केवल विद्यार्थियों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाया, बल्कि शिक्षकों, अभिभावकों और स्थानीय समुदाय को भी पर्यावरण संरक्षण के लिए एकजुट कर दिया। कार्यक्रम का नेतृत्व पुलिस कंट्रोल रूम प्रभारी एवं वरिष्ठ उपनिरीक्षक अनूप मिश्र ‘अपूर्व’ तथा विद्यालय के शिक्षक प्रदीप कुमार वर्मा ने किया।

यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि पर्यावरण शिक्षा, सामाजिक उत्तरदायित्व और जनजागरूकता का ऐसा संगम बना, जिसने उपस्थित सभी लोगों को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराया। पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर पर्यावरण संरक्षण के नारों, बच्चों के उत्साह और हरियाली के संदेशों से गूंजता रहा।

बरगद और माँ सरस्वती के पूजन से हुई कार्यक्रम की शुरुआत

कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के बजाय माँ सरस्वती और बरगद के पौधे के पूजन के साथ किया गया। अतिथियों ने पौधे में जल अर्पित कर यह संदेश दिया कि भारतीय संस्कृति में वृक्ष केवल पर्यावरण का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवन और संस्कृति के आधार हैं। इस अनूठी शुरुआत ने कार्यक्रम को एक अलग पहचान दी और उपस्थित विद्यार्थियों को प्रकृति के प्रति सम्मान का भाव सिखाया।

 

हरी झंडी दिखाकर रवाना हुई “बरगद बचाओ” जनजागरण रैली

शुभारंभ के बाद वरिष्ठ उपनिरीक्षक अनूप मिश्र ने हरी झंडी दिखाकर “बरगद बचाओ महाअभियान” की जनजागरण रैली को रवाना किया। विद्यालय के छात्र-छात्राएं हाथों में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संदेशों वाली तख्तियां लेकर पूरे उत्साह के साथ रैली में शामिल हुए।

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“बरगद हम बचाएंगे, बरगद हम लगाएंगे”,

“पेड़ लगाओ, जीवन बचाओ”,

“जल है तो कल है” जैसे नारों से पूरा वातावरण पर्यावरण चेतना से भर उठा।

 

रैली विद्यालय परिसर के साथ आसपास के क्षेत्रों से भी होकर गुजरी, जहां स्थानीय लोगों ने बच्चों के उत्साह का स्वागत किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने लोगों से अधिक से अधिक वृक्ष लगाने और पुराने बरगद जैसे विशाल वृक्षों को संरक्षित रखने की अपील की।

“वृक्षजल कथा” ने समझाया वृक्ष, जल और जीवन का संबंध

रैली के बाद आयोजित “वृक्षजल कथा” कार्यक्रम आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। इसमें वरिष्ठ उपनिरीक्षक अनूप मिश्र ने सरल भाषा और प्रेरक उदाहरणों के माध्यम से वृक्ष, जल और मानव जीवन के गहरे संबंध को समझाया।

उन्होंने बताया कि यदि धरती पर जल को बचाना है तो वृक्षों को बचाना अनिवार्य है। वृक्ष केवल ऑक्सीजन ही नहीं देते, बल्कि वर्षा चक्र को संतुलित रखते हैं, भूजल स्तर बढ़ाते हैं, तापमान नियंत्रित करते हैं और जैव विविधता को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने विशेष रूप से बरगद के वृक्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में बरगद दीर्घायु, स्थिरता और जीवन का प्रतीक माना जाता है। इसकी विशाल छाया, पर्यावरणीय महत्व और सामाजिक उपयोगिता इसे अन्य वृक्षों से विशिष्ट बनाती है।

कार्यक्रम में उपस्थित लगभग एक सैकड़ा विद्यार्थियों, शिक्षकों और अतिथियों ने पर्यावरण संरक्षण का सामूहिक संकल्प लेते हुए अधिक से अधिक वृक्ष लगाने और उनकी देखभाल करने का वचन दिया।

बच्चों के सवाल बने कार्यक्रम का आकर्षण

कार्यक्रम का सबसे प्रेरणादायक हिस्सा पॉडकास्ट संवाद रहा, जिसमें वरिष्ठ उपनिरीक्षक अनूप मिश्र, शिक्षक प्रदीप कुमार वर्मा और विद्यार्थियों के बीच खुली चर्चा आयोजित की गई।

छात्राओं समरीन, अंकिता, दीपाली और शगुन ने पर्यावरण से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे। बच्चों ने जल संकट, बढ़ते तापमान, वृक्षों की उपयोगिता, वर्षा पर पेड़ों के प्रभाव तथा भविष्य की पर्यावरणीय चुनौतियों को लेकर अपनी जिज्ञासाएं व्यक्त कीं।

अनूप मिश्र ने बच्चों के सभी प्रश्नों का सरल, वैज्ञानिक और प्रेरक उत्तर दिया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या किसी संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। यदि बच्चे अभी से प्रकृति के मित्र बन जाएं तो भविष्य सुरक्षित बनाया जा सकता है।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने घर, गांव और विद्यालय में कम से कम एक पौधे की जिम्मेदारी स्वयं लें और उसे बड़ा होने तक उसकी देखभाल करें।

“मैं हूँ बरगद का मित्र” बना आकर्षण का केंद्र

कार्यक्रम में विशेष रूप से तैयार किया गया “मैं हूँ बरगद का मित्र” सेल्फी स्टैंड बच्चों और शिक्षकों के आकर्षण का केंद्र रहा। विद्यार्थियों ने यहां उत्साहपूर्वक तस्वीरें खिंचवाईं और पर्यावरण संरक्षण का संदेश सोशल मीडिया के माध्यम से भी प्रसारित करने का संकल्प लिया।

इसके साथ ही आयोजित “बरगद प्रहरी हस्ताक्षर अभियान” में विद्यार्थियों, शिक्षकों, अतिथियों और अभिभावकों ने हस्ताक्षर कर यह संकल्प लिया कि वे बरगद सहित सभी उपयोगी वृक्षों की रक्षा करेंगे तथा अपने आसपास हरियाली बढ़ाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

ईको टीम को मिला सम्मान

विद्यालय की ईको टीम द्वारा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों की सराहना करते हुए वरिष्ठ उपनिरीक्षक अनूप मिश्र ने पूरी टीम को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि विद्यालय की ईको टीम अन्य स्कूलों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती है।

उन्होंने पर्यावरण के प्रति जागरूकता दिखाने वाले कई विद्यार्थियों को अपने हाथों से पुरस्कार भी प्रदान किए। पुरस्कार पाकर बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा था।

अनूप मिश्र ने कहा कि यदि प्रत्येक विद्यालय अपने यहां पर्यावरण क्लब या ईको टीम को सक्रिय कर दे तो आने वाले वर्षों में हर गांव और शहर हरियाली से भर सकता है।

 

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शिक्षक इंद्रपाल का हुआ सम्मान

विद्यालय परिसर को हराभरा बनाने तथा पौधों के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले शिक्षक इंद्रपाल को भी कार्यक्रम के दौरान विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

अतिथियों ने कहा कि विद्यालय की स्वच्छता, हरियाली और पौधों की उत्कृष्ट देखभाल यह साबित करती है कि यदि शिक्षक संकल्पित हों तो विद्यालय को पर्यावरण शिक्षा का आदर्श केंद्र बनाया जा सकता है।

प्रदीप कुमार वर्मा को मिली नई जिम्मेदारी

कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ उपनिरीक्षक अनूप मिश्र ने शिक्षक प्रदीप कुमार वर्मा को “बरगद बचाओ महाअभियान” को अधिक से अधिक विद्यालयों तक पहुंचाने तथा शिक्षक समाज को इस जनअभियान से जोड़ने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदीप कुमार वर्मा के प्रयासों से यह अभियान केवल एक विद्यालय तक सीमित न रहकर पूरे जनपद और प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण का बड़ा आंदोलन बन सकता है।

विद्यालय की नवाचार संस्कृति की सराहना

अपने संबोधन में अनूप मिश्र ने विद्यालय की स्वच्छता, अनुशासन, हरियाली और शैक्षणिक नवाचारों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि उच्च प्राथमिक विद्यालय रामपुर गढ़ौवा केवल शिक्षा देने वाला संस्थान नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण का प्रेरणादायी केंद्र बन चुका है।

उन्होंने कहा कि विद्यालय में जिस प्रकार पर्यावरण शिक्षा को व्यवहारिक गतिविधियों से जोड़ा गया है, वह अन्य विद्यालयों के लिए अनुकरणीय मॉडल है।

शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी संगम

कार्यक्रम का प्रभावी संचालन शिक्षक प्रदीप कुमार वर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि बच्चों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता विकसित करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि विद्यालय स्तर से ही प्रकृति संरक्षण के संस्कार विकसित किए जाएं तो आने वाली पीढ़ियां पर्यावरण संकट का बेहतर ढंग से सामना कर सकेंगी।

उन्होंने बताया कि विद्यालय भविष्य में भी वृक्षारोपण, जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त परिसर, जैव विविधता संरक्षण तथा पर्यावरण शिक्षा से जुड़े नवाचारों को निरंतर आगे बढ़ाता रहेगा।

समाज के लिए बना प्रेरणादायी संदेश

पूरे आयोजन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है। जब पुलिस, शिक्षक, विद्यार्थी और समाज एक साथ मिलकर किसी अभियान को आगे बढ़ाते हैं, तभी वह जनआंदोलन का रूप लेता है।

“वृक्षजल कथा” और “बरगद बचाओ महाअभियान” ने बच्चों को केवल पौधे लगाने का संदेश नहीं दिया, बल्कि उन्हें प्रकृति के प्रति संवेदनशील नागरिक बनने की प्रेरणा भी दी। विद्यालय परिसर में गूंजे संकल्प, बच्चों के उत्साह और पर्यावरण के प्रति दिखाई गई सामूहिक प्रतिबद्धता ने यह सिद्ध कर दिया कि शिक्षा, विज्ञान, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व का समन्वय ही भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

उच्च प्राथमिक विद्यालय रामपुर गढ़ौवा में आयोजित यह कार्यक्रम इस बात का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया कि यदि विद्यालयों में इस प्रकार के नवाचार नियमित रूप से किए जाएं, तो पर्यावरण संरक्षण केवल एक विषय नहीं रहेगा, बल्कि जनभागीदारी पर आधारित एक सशक्त सामाजिक आंदोलन का रूप ले सकता है।

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