उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में बुधवार को एक भीषण सड़क हादसे ने कई परिवारों की खुशियों को पलभर में उजाड़ दिया। सुमेरपुर-बक्सर मार्ग पर कीरतपुर गांव के पास खरही पुल के अंधे मोड़ पर एक तेज रफ्तार डंपर के पलटने से बोलेरो सवार छह लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे की सबसे हृदयविदारक बात यह रही कि मृतकों में चार लोग एक ही परिवार के थे। यह घटना न केवल एक दुर्घटना है, बल्कि लापरवाही और यातायात नियमों की अनदेखी का खौफनाक परिणाम भी है।

खुशियों से लौटते परिवार पर टूटा कहर
पठई गांव के निवासी नरेंद्र सिंह का परिवार बुधवार सुबह एक खुशी के मौके से लौट रहा था। उनके पोते शुभ का मुंडन संस्कार बक्सर स्थित मां चंद्रिका देवी मंदिर में संपन्न हुआ था। पूरा परिवार इस शुभ अवसर पर शामिल हुआ था और पूजा-अर्चना के बाद सभी एक बोलेरो में सवार होकर घर लौट रहे थे। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा।
सुबह करीब साढ़े नौ बजे, जब बोलेरो कीरतपुर गांव के पास खरही पुल के अंधे मोड़ पर पहुंची, तभी अचानक हादसा हो गया। बताया जा रहा है कि बोलेरो चालक ने आगे चल रहे डंपर को ओवरटेक करने की कोशिश की। उसी दौरान सामने से दूसरा डंपर आता दिखाई दिया। स्थिति संभालने के लिए चालक ने अचानक ब्रेक लगाया, लेकिन पीछे से आ रहे डंपर ने जोरदार टक्कर मार दी।
पलभर में कब्र बनी बोलेरो
टक्कर इतनी जोरदार थी कि बोलेरो अनियंत्रित होकर पलट गई और उसी समय पीछे वाला डंपर भी नियंत्रण खो बैठा और बोलेरो के ऊपर पलट गया। भारी भरकम डंपर के नीचे दबकर बोलेरो पूरी तरह चकनाचूर हो गई। अंदर बैठे लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला और कई लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।
इस हादसे ने मौके को एक भयावह मंजर में बदल दिया। स्थानीय लोग जब वहां पहुंचे, तो बोलेरो पूरी तरह डंपर के नीचे दबी हुई थी और अंदर से चीख-पुकार की आवाजें आ रही थीं। तुरंत पुलिस और राहत दल को सूचना दी गई।
रेस्क्यू ऑपरेशन: कटर मशीन से निकाले गए लोग
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचा। बोलेरो और डंपर की हालत इतनी खराब थी कि उसमें फंसे लोगों को निकालना आसान नहीं था। इसके लिए कटर मशीन मंगाई गई और काफी मशक्कत के बाद गाड़ियों को काटकर घायलों और शवों को बाहर निकाला गया।
सभी घायलों को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पताल भेजा गया। गंभीर रूप से घायल कुछ लोगों को कानपुर के हैलट अस्पताल रेफर किया गया।
एक परिवार उजड़ गया
इस हादसे में नरेंद्र सिंह की पत्नी गीता, बेटी सुनीता, भाभी बिटान और भतीजी ज्योति की मौत हो गई। परिवार के कई अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हैं। पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे नरेंद्र सिंह जब अपने परिवार के शवों के सामने खड़े हुए, तो खुद को संभाल नहीं सके। उनकी आंखों के सामने उनकी पूरी दुनिया उजड़ चुकी थी। उन्होंने टूटे शब्दों में कहा, “सब खत्म हो गया… बस बहू, बेटे और बच्चों को बचा लो।”
उनका बेटा सूरज गंभीर रूप से घायल है, जबकि बहू मानसी, पोता शुभ और अन्य बच्चे भी अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
दूसरे परिवारों पर भी टूटा दुख का पहाड़
इस हादसे ने सिर्फ एक ही नहीं, बल्कि कई परिवारों को गहरे दुख में डाल दिया। मृतकों में शामिल अर्चना बाजपेयी के परिवार पर भी संकट टूट पड़ा है। उनके बच्चे अब अपनी मां के बिना जीवन बिताने को मजबूर हैं।
बोलेरो चालक रामधनी की भी इस हादसे में मौत हो गई। उनके परिवार में पत्नी और चार बच्चे हैं, जो अब पूरी तरह बेसहारा हो गए हैं। घर का कमाने वाला सदस्य खोने से उनका भविष्य संकट में आ गया है।
इसी तरह, ज्योति और उनकी मां बिटान की मौत से उनका परिवार भी पूरी तरह बिखर गया है। ज्योति के पति रामप्रताप जब पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और पत्नी व सास के शव देखे, तो फूट-फूटकर रो पड़े। उन्होंने कहा कि अब उनके बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो गया है।
अधिक सवारी बनी हादसे की एक वजह
इस दुर्घटना में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई कि सात सीट वाली बोलेरो में कुल 11 लोग सवार थे। यानी वाहन की क्षमता से कहीं अधिक लोग उसमें बैठे थे। यदि वाहन में कम लोग होते, तो संभव है कि कुछ लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर कब तक लोग यातायात नियमों की अनदेखी करते रहेंगे और अपनी जान जोखिम में डालते रहेंगे।
दावत की तैयारी रह गई अधूरी
इस हादसे ने न केवल लोगों की जान ली, बल्कि खुशियों को भी मातम में बदल दिया। परिवार मुंडन संस्कार के बाद गांव लौटकर दावत करने वाला था। इसके लिए पहले से हलवाई बुलाया गया था और सारी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं।
लेकिन हादसे की खबर मिलते ही पूरा गांव सदमे में डूब गया। जो घर कुछ घंटों पहले खुशियों से भरा था, वहां अब मातम पसरा हुआ है।
प्रशासन और नेताओं ने जताया शोक
इस दुखद घटना पर कई राजनीतिक और सामाजिक नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने भी मृतकों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और फरार डंपर चालकों की तलाश की जा रही है।
सबक देने वाली घटना
उन्नाव का यह हादसा कई सवाल छोड़ गया है। क्या अंधे मोड़ों पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हैं? क्या भारी वाहनों के संचालन पर नियंत्रण है? और सबसे अहम, क्या लोग खुद अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक हैं?
यह घटना बताती है कि सड़क पर जरा सी लापरवाही किस तरह बड़ी त्रासदी में बदल सकती है। जरूरत है कि यातायात नियमों का सख्ती से पालन किया जाए और लोगों में जागरूकता बढ़ाई जाए।
निष्कर्ष
उन्नाव में हुआ यह दर्दनाक हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि कई परिवारों की जिंदगी में स्थायी दुख छोड़ जाने वाली घटना है। एक खुशहाल परिवार पलभर में उजड़ गया और कई बच्चे अनाथ जैसे हालात में पहुंच गए।
यह समय है कि हम सबक लें और सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता दें, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
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