शाहजहांपुर जिले के तिलहर क्षेत्र में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए एक सक्रिय ऑटो लिफ्टर गैंग का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने तीन शातिर युवकों को गिरफ्तार किया है, जो लंबे समय से बाइक चोरी की घटनाओं को अंजाम दे रहे थे। इनके कब्जे से छह चोरी की बाइक भी बरामद की गई हैं।

पुलिस के अनुसार, यह गैंग बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था और चोरी के बाद पुलिस से बचने के लिए खास रणनीति अपनाता था। आरोपियों ने पूछताछ में कई अहम खुलासे किए हैं, जिससे इस पूरे नेटवर्क की परतें खुलने लगी हैं।
सूचना के आधार पर बिछाया गया जाल
तिलहर पुलिस को बुधवार सुबह एक गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ युवक चोरी की बाइकें बेचने के इरादे से जैतीपुर मार्ग की ओर आने वाले हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए कोतवाली प्रभारी जुगुल किशोर पाल ने तुरंत एक टीम गठित की। टीम में एसआई नितिन मलिक और मो. मारूफ सहित अन्य पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया।
पुलिस ने जैतीपुर मार्ग पर चेकिंग अभियान शुरू किया और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी। कुछ ही समय बाद दो बाइकों पर सवार तीन युवक वहां आते दिखाई दिए। पुलिस ने उन्हें रुकने का इशारा किया, लेकिन आरोपियों ने स्थिति भांपते हुए भागने की कोशिश की।
फिल्मी अंदाज में पीछा, फिर गिरफ्तारी
जैसे ही आरोपियों ने भागने की कोशिश की, पुलिस टीम ने उनका पीछा शुरू कर दिया। कुछ दूरी तक दौड़ने के बाद पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। पूछताछ में उनकी पहचान कटरा थाना क्षेत्र के रमापुर गांव निवासी रामलखन उर्फ नन्हे, अवनीश और फीलनगर निवासी इमरान खान के रूप में हुई।
निशानदेही पर बरामद हुईं छह बाइकें
गिरफ्तारी के बाद जब आरोपियों से सख्ती से पूछताछ की गई, तो उन्होंने अपने अपराध कबूल कर लिए। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने अलग-अलग स्थानों से छह चोरी की बाइकें बरामद कीं। इन बाइकों में कुछ नई और महंगी बाइकें भी शामिल हैं।
पुलिस अब इन बाइकों के असली मालिकों का पता लगाने में जुटी है और यह भी जांच की जा रही है कि ये वाहन किन-किन इलाकों से चोरी किए गए थे।
ऐसे करते थे चोरी और बिक्री का खेल
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपने काम करने का तरीका भी बताया। उन्होंने कहा कि वे जिस जिले से बाइक चोरी करते थे, वहां उसे नहीं बेचते थे। ऐसा इसलिए ताकि स्थानीय पुलिस को शक न हो और पकड़ से बचा जा सके।
चोरी करने के बाद वे बाइक को तुरंत बेचने के बजाय किसी सुनसान जगह पर कुछ घंटों के लिए खड़ी कर देते थे। जब माहौल सामान्य हो जाता था, तब उसे उठाकर दूसरे जिले में ले जाते और वहां आधी कीमत पर बेच देते थे।
कई जिलों में फैला था नेटवर्क
आरोपियों ने यह भी खुलासा किया कि इस पूरे काम में उनके साथ कई अन्य लोग भी जुड़े हुए हैं, जो अलग-अलग जिलों में सक्रिय हैं। ये लोग चोरी की बाइक खरीदकर आगे बेचने का काम करते थे। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
पुलिस की कार्रवाई जारी
इस सफल कार्रवाई के बाद क्षेत्राधिकारी ज्योति यादव ने पुलिस टीम की सराहना की और कहा कि यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले में अपराध के खिलाफ सख्त अभियान जारी रहेगा और किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा।
और भी खुलासे होने की उम्मीद
पुलिस का मानना है कि यह सिर्फ शुरुआत है और आने वाले दिनों में इस गैंग से जुड़े और भी लोग सामने आ सकते हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितनी बाइकें चोरी की हैं और कितने जिलों में अपना नेटवर्क फैला रखा है।
समाज के लिए चेतावनी
यह घटना एक बार फिर इस बात को उजागर करती है कि वाहन चोरी के मामले अब संगठित अपराध का रूप ले चुके हैं। अपराधी नई-नई तरकीबें अपनाकर कानून से बचने की कोशिश करते हैं, लेकिन पुलिस की सतर्कता और तकनीकी जांच के चलते ऐसे गिरोह ज्यादा दिन तक नहीं बच पाते।
फिलहाल तीनों आरोपी पुलिस हिरासत में हैं और उनसे आगे की पूछताछ जारी है। पुलिस को उम्मीद है कि इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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