गायघाट थाना क्षेत्र के चोरनियां गांव में पुलिस छापेमारी के दौरान हुई फायरिंग की घटना ने गंभीर विवाद का रूप ले लिया है। इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जिसके बाद मृतक के परिजनों ने पुलिस पर सीधे हत्या का आरोप लगाया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने थानाध्यक्ष समेत छापेमारी में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज कर ली है।

मृतक की पहचान जगतवीर राय के रूप में हुई है। उनके बेटे अविनाश राय के बयान के आधार पर यह केस दर्ज किया गया है। अविनाश का आरोप है कि पुलिस की कार्रवाई के दौरान थानाध्यक्ष के व्यवहार ने हालात को बिगाड़ दिया और अंततः फायरिंग की घटना हुई, जिसमें उनके पिता की जान चली गई।
जानकारी के मुताबिक, पुलिस एक अन्य व्यक्ति अजय राय के घर छापेमारी के लिए पहुंची थी। बताया जा रहा है कि पुलिस उसे पकड़कर अपने साथ ले जाने की कोशिश कर रही थी। इस दौरान इलाके में हलचल मच गई और शोर सुनकर आसपास के लोग भी बाहर निकल आए। इसी बीच जगतवीर राय भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने पुलिस से पूछताछ शुरू की कि आखिर अजय राय को किस आधार पर पकड़ा जा रहा है।
परिजनों का आरोप है कि इसी बात को लेकर थानाध्यक्ष नाराज हो गए और उन्होंने जगतवीर राय के साथ अभद्र व्यवहार शुरू कर दिया। आरोप है कि पहले गाली-गलौच की गई और फिर मारपीट की नौबत आ गई। स्थिति धीरे-धीरे तनावपूर्ण होती चली गई।
अविनाश के अनुसार, जब उनके पिता ने इस पूरे मामले की शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) से करने की बात कही, तो थानाध्यक्ष और अधिक भड़क गए। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय थानाध्यक्ष नशे की हालत में थे और गुस्से में उन्होंने अपनी सर्विस रिवॉल्वर निकाल ली।
आरोप है कि इसके बाद थानाध्यक्ष ने गोली चला दी, जो सीधे जगतवीर राय के सीने में जाकर लगी। गोली लगते ही वह मौके पर गिर पड़े और उनकी वहीं मौत हो गई। यह घटना इतनी अचानक हुई कि मौके पर मौजूद लोग कुछ समझ ही नहीं पाए और पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
अविनाश ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने इस कार्रवाई का विरोध किया, तो उन्हें भी धमकाया गया। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें भी गोली मारने की धमकी दी और एक और फायर किया गया, जो पास में खड़ी एक भैंस को छूते हुए निकल गया। इस घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल बन गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अविनाश ने मौके पर ही पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायत दी और सभी संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज करने की मांग की। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर देर शाम नए थानाध्यक्ष राकेश कुमार ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज होने की पुष्टि की।
हालांकि, पुलिस का पक्ष भी सामने आया है। अधिकारियों का कहना है कि घटना के दौरान पुलिस पर हमला और सरकारी कार्य में बाधा डालने की कोशिश भी की गई थी। इस आधार पर पुलिस दूसरी प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू कर रही है। यानी मामले में दोनों पक्षों की ओर से कार्रवाई की जा रही है।
घटना के बाद जांच के लिए फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की टीम को मौके पर बुलाया गया। टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और कई अहम साक्ष्य जुटाए। जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई गई। मौके से मिले खोखे को भी जब्त किया गया और उसे जांच के लिए भेजा गया है।
इसके अलावा, पुलिस ने कई प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए हैं, ताकि घटना की सच्चाई सामने लाई जा सके। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
घटना के बाद प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से गायघाट थानाध्यक्ष राजा सिंह को पुलिस केंद्र वापस बुला लिया है। यह कदम मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। उनकी जगह तुर्की थाना में तैनात दारोगा राकेश कुमार को गायघाट का नया थानाध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जिन्होंने देर शाम अपना पदभार संभाल लिया।
यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि पुलिस की कार्यशैली को लेकर भी कई चिंताएं पैदा करती है। एक ओर जहां परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस अपने पक्ष को भी सामने रख रही है। ऐसे में यह मामला और अधिक संवेदनशील बन गया है।
फिलहाल पूरे प्रकरण की जांच जारी है और प्रशासन इस मामले पर नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस बीच, स्थानीय लोगों में घटना को लेकर आक्रोश और असुरक्षा की भावना भी देखी जा रही है।
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