हरियाणा के कुरुक्षेत्र में साइबर ठगी का एक और मामला सामने आया है, जिसमें शातिर ठगों ने “दिव्या” नाम की फर्जी पहचान बनाकर एक व्यापारी को अपने जाल में फंसा लिया। अच्छे मुनाफे का लालच देकर आरोपियों ने उससे लाखों रुपये ठग लिए। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सचिन माथुर और दानिश ठाकुर के रूप में हुई है, जो पंजाब के लुधियाना के रहने वाले हैं। पुलिस ने दोनों को अदालत में पेश कर आगे की पूछताछ शुरू कर दी है।
मामले की शुरुआत तब हुई जब कुरुक्षेत्र के सेक्टर-4 निवासी अर्पित गुप्ता के मोबाइल पर व्हाट्सएप के जरिए एक अनजान मैसेज आया। अर्पित, जो लाडवा में दुकान चलाते हैं, ने शुरुआत में इसे सामान्य बातचीत समझकर जवाब दिया। लेकिन धीरे-धीरे यह बातचीत एक सुनियोजित ठगी में बदल गई।
मैसेज करने वाले ने खुद को “दिव्या” बताया और अर्पित से दोस्ताना अंदाज में बातचीत शुरू की। कुछ समय बाद उसने एक ऑनलाइन ट्रेडिंग ऐप के जरिए निवेश करने का प्रस्ताव दिया। उसने दावा किया कि अगर अर्पित उसके बताए तरीके से निवेश करेंगे, तो उन्हें हर महीने अच्छा मुनाफा मिल सकता है।
पहले चरण में भरोसा जीतने के लिए आरोपी ने अर्पित से छोटी राशि निवेश करने को कहा। अर्पित ने 50 हजार रुपये लगाए, और कुछ समय बाद उन्हें यह रकम मुनाफे के साथ वापस मिल गई। इससे अर्पित को पूरा विश्वास हो गया कि निवेश सही जगह हो रहा है।
इसके बाद ठगों ने अपना असली खेल शुरू किया। उन्होंने अर्पित को अधिक पैसे लगाने के लिए प्रेरित किया और बड़े मुनाफे का लालच दिया। धीरे-धीरे अर्पित ने करीब 12 लाख 50 हजार रुपये निवेश कर दिए। लेकिन जब उन्होंने पैसे निकालने की कोशिश की, तो उन्हें कोई रकम वापस नहीं मिली।
यहीं से अर्पित को ठगी का एहसास हुआ। उन्होंने तुरंत साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
इस कार्रवाई को थाना साइबर कुरुक्षेत्र की टीम ने अंजाम दिया। टीम ने डिजिटल ट्रैकिंग और अन्य तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल करते हुए आरोपियों तक पहुंच बनाई। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी लोगों को पहले छोटे निवेश पर मुनाफा देकर विश्वास में लेते थे और फिर बड़ी रकम हड़प कर फरार हो जाते थे।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह ठगी पूरी तरह से योजनाबद्ध तरीके से की गई थी। इसमें फर्जी नाम, नकली प्रोफाइल और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया, जिससे पीड़ित को शक न हो। इस तरह के मामलों में आरोपी अक्सर अलग-अलग राज्यों से काम करते हैं, जिससे उन्हें पकड़ना मुश्किल हो जाता है।
पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इस गिरोह ने और कितने लोगों को इसी तरह अपना शिकार बनाया है। साथ ही आरोपियों के बैंक खातों और लेन-देन की भी जांच की जा रही है, ताकि ठगी की पूरी रकम का पता लगाया जा सके।
इस घटना के बाद पुलिस ने आम लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर ऑनलाइन निवेश करना खतरनाक हो सकता है। खासकर जब कोई व्यक्ति कम समय में ज्यादा मुनाफे का वादा करे, तो सावधान हो जाना चाहिए।
पुलिस ने यह भी कहा कि किसी भी ऐप या वेबसाइट पर पैसा लगाने से पहले उसकी पूरी जांच करें और केवल भरोसेमंद प्लेटफॉर्म का ही इस्तेमाल करें। अगर किसी को इस तरह का कोई संदिग्ध मैसेज मिलता है, तो उसे नजरअंदाज करें और तुरंत इसकी सूचना साइबर सेल को दें।
यह मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि साइबर ठग नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।
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