Haryana में एक बार फिर मौसम ने करवट ली है। मध्यम तीव्रता के पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से प्रदेश के कई जिलों में अचानक मौसम बदल गया। बुधवार दोपहर के बाद आसमान में घने बादल छा गए, तेज हवाएं चलने लगीं और कई जगहों पर हल्की बारिश के साथ ओलावृष्टि भी दर्ज की गई। इस बदलाव ने जहां लोगों को गर्मी से राहत दी, वहीं किसानों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि गेहूं की तैयार फसल को भारी नुकसान पहुंचा है।

अचानक बदला मौसम का मिजाज
प्रदेश के हिसार, महेंद्रगढ़, भिवानी, चरखी-दादरी और मेवात जैसे जिलों में मौसम ने तेजी से करवट ली। कई जगहों पर बूंदाबांदी हुई, जबकि कुछ इलाकों में ओले भी गिरे। मौसम में आए इस बदलाव ने तापमान को भी नीचे ला दिया, जिससे वातावरण में ठंडक महसूस की गई।
दिनभर बादलों की आवाजाही बनी रही और धूप पूरी तरह से गायब रही। इस कारण तापमान सामान्य से कम दर्ज किया गया।
तेज हवाओं ने बढ़ाई परेशानी
इस दौरान कई जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। Hisar, Sirsa, Fatehabad, Bhiwani, Mahendragarh, Rewari और Gurugram जैसे इलाकों में तेज हवाओं का असर साफ देखा गया।
तेज हवाओं के कारण खेतों में खड़ी गेहूं की फसल कई जगहों पर झुक गई या गिर गई, जिससे किसानों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है।
ओलावृष्टि से फसलों पर मार
महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी जिलों में कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि भी हुई। ओलों के गिरने से गेहूं की बालियां टूट गईं और फसल की गुणवत्ता पर असर पड़ा।
किसानों का कहना है कि इस समय गेहूं की फसल लगभग तैयार थी और कटाई के करीब थी। ऐसे में ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया।
तापमान में आई गिरावट
मौसम में आए बदलाव का असर तापमान पर भी पड़ा है। प्रदेश के अधिकांश जिलों में रात का तापमान 13 से 18 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया।
Hisar में न्यूनतम तापमान 13.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से लगभग 2.7 डिग्री कम है। वहीं दिन का अधिकतम तापमान 29 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा, जो सामान्य से थोड़ा कम है।
पहले बढ़ी थी गर्मी
मार्च महीने की शुरुआत में ही तापमान तेजी से बढ़ने लगा था। कुछ दिन पहले हिसार में अधिकतम तापमान 37.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जिससे गर्मी का एहसास होने लगा था।
लेकिन अब पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से मौसम ठंडा हो गया है और लोगों को गर्मी से राहत मिली है।
अगले कुछ दिन भी ऐसा ही रहेगा मौसम
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, यह पश्चिमी विक्षोभ अभी सक्रिय बना रहेगा और इसका असर अगले दो से तीन दिनों तक जारी रहेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि 21 मार्च के आसपास पूरे प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। इस दौरान तेज हवाएं, आंधी और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि भी हो सकती है।
किसानों की बढ़ी चिंता
इस समय गेहूं की फसल पककर तैयार हो चुकी है और किसान कटाई की तैयारी में जुटे हुए थे। लेकिन अचानक आए इस मौसम परिवर्तन ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।
फसल के गिरने और ओलावृष्टि के कारण उत्पादन में कमी आने की आशंका है। कई किसानों ने सरकार से मुआवजे की मांग भी शुरू कर दी है।
मौसम बना “कूल”
मार्च के दूसरे पखवाड़े में मौसम सामान्य से ठंडा बना हुआ है। अधिकतम तापमान भी सामान्य से नीचे चल रहा है, जिससे दिन में भी हल्की ठंडक महसूस हो रही है।
यह स्थिति तब है जब आमतौर पर इस समय गर्मी बढ़ने लगती है। लेकिन पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम का यह “कूल” अंदाज बना हुआ है।
आम लोगों को राहत
जहां किसानों के लिए यह मौसम परेशानी लेकर आया है, वहीं आम लोगों को इससे राहत मिली है। तेज गर्मी के बीच अचानक आई ठंडक ने लोगों को सुकून दिया है।
हालांकि, लगातार बदलते मौसम के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं, इसलिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
क्या है पश्चिमी विक्षोभ?
पश्चिमी विक्षोभ एक मौसम प्रणाली है, जो भूमध्यसागर क्षेत्र से उत्पन्न होकर उत्तर भारत तक पहुंचती है। यह अपने साथ नमी लेकर आती है, जिससे बारिश और ओलावृष्टि होती है।
हर साल सर्दियों और वसंत के मौसम में इसका असर देखा जाता है, लेकिन कभी-कभी यह फसलों के लिए नुकसानदायक भी साबित होता है।
निष्कर्ष
Haryana में मौसम का यह बदलाव एक तरफ राहत लेकर आया है, तो दूसरी तरफ किसानों के लिए चिंता का कारण भी बन गया है। गेहूं की फसल को हुए नुकसान ने कृषि क्षेत्र पर असर डालने के संकेत दिए हैं।
अब सभी की नजर आने वाले दिनों के मौसम पर टिकी है। यदि मौसम जल्द सामान्य नहीं हुआ, तो नुकसान और बढ़ सकता है। ऐसे में जरूरी है कि प्रशासन और किसान दोनों मिलकर स्थिति का सामना करें और नुकसान को कम करने के उपाय खोजें।
स्वर्णिम टाईम्स : Swarnim Times आपका अपना इंटरनेट अख़बार !