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रोहतक में आग का कहर: एक चिंगारी ने 45 मिनट में जलाए किसानों के सपने, साढ़े 34 एकड़ फसल राख

हरियाणा के Rohtak जिले में सोमवार का दिन किसानों के लिए किसी त्रासदी से कम नहीं रहा। किलोई खास और रुड़की गांव में अचानक लगी आग ने कुछ ही मिनटों में ऐसा विकराल रूप ले लिया कि देखते ही देखते साढ़े 34 एकड़ में खड़ी गेहूं की फसल राख में बदल गई। जिन खेतों में कुछ दिन बाद कटाई की उम्मीद थी, वहां अब सिर्फ काली पड़ी जमीन और धुएं के निशान बाकी हैं।

घटना की शुरुआत एक मामूली चिंगारी से हुई, लेकिन तेज हवाओं ने इसे भयंकर आग में बदल दिया। करीब 45 मिनट के भीतर ही आग ने सात किसानों की मेहनत को निगल लिया। खेतों में काम कर रहे किसानों को जैसे ही आग लगने की सूचना मिली, वे बिना समय गंवाए मौके की ओर दौड़ पड़े। किसी ने पेड़ों की टहनियों से आग बुझाने की कोशिश की, तो किसी ने ट्रैक्टर लेकर खेतों की जुताई शुरू कर दी, ताकि आग को आगे बढ़ने से रोका जा सके।

किलोई खास के किसान सुरेंद्र हुड्डा ने बताया कि जब उन्हें आग लगने की खबर मिली, तो वे तुरंत खेतों की ओर भागे। वहां का दृश्य बेहद भयावह था—तेज हवा के साथ आग तेजी से फैल रही थी और हर कोई उसे रोकने की कोशिश में जुटा था। किसानों ने करीब 15 से अधिक ट्रैक्टरों की मदद से खेतों की जुताई कर आग की रफ्तार को कम करने की कोशिश की, जिससे कुछ हद तक नुकसान को सीमित किया जा सका।

फिर भी, नुकसान बहुत बड़ा हुआ। किलोई खास में करीब 32.5 एकड़ और पास के रुड़की गांव में लगभग 2 एकड़ गेहूं की फसल जलकर पूरी तरह नष्ट हो गई। जिन किसानों की फसलें जलीं, उनमें दीपक की 11 एकड़, नरेंद्र की 9 एकड़, सुरेंद्र और राजेश की 4-4 एकड़, प्रकाश की 4.5 एकड़ और ओमबीर व जोगिंद्र की 2-2 एकड़ फसल शामिल है। इन सभी किसानों के लिए यह नुकसान सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी बेहद दर्दनाक है।

कई किसानों ने बताया कि उन्होंने गेहूं की फसल के लिए कर्ज लिया था। बीज, खाद, पानी और मेहनत—इन सब पर उन्होंने अपनी जमा पूंजी लगा दी थी। अब जब फसल तैयार थी और कटाई का समय नजदीक था, तभी यह हादसा हो गया। एक किसान ने कहा कि उसकी छह महीने की मेहनत कुछ ही मिनटों में राख हो गई। किसी को अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसे जुटाने थे, तो कोई बेटी की शादी की तैयारी कर रहा था। इस आग ने उनके सारे सपनों को झुलसा दिया।

घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। किसान सभा के वरिष्ठ उपप्रधान अशोक राठी के अनुसार, चार दमकल गाड़ियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। करीब सवा 12 बजे तक आग को पूरी तरह बुझा दिया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। खेतों में खड़ी पूरी फसल जल चुकी थी।

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि आग लगने का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि जिन खेतों में आग लगी, वहां से बिजली की लाइन भी नहीं गुजरती थी, जिससे शॉर्ट सर्किट की संभावना से इनकार किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आग के कारणों की जांच की जा रही है और जल्द ही इसका पता लगाया जाएगा।

इस घटना ने एक बार फिर किसानों की असुरक्षा को उजागर किया है। हर साल इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं, जहां आग लगने से किसानों की फसलें बर्बाद हो जाती हैं। इसके बावजूद, सुरक्षा उपायों और जागरूकता की कमी के कारण ऐसी घटनाओं को पूरी तरह रोका नहीं जा सका है।

जिला अग्निशमन अधिकारी उत्कर्ष ने किसानों को आग से बचाव के लिए कई जरूरी सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा कि खेतों में ट्रैक्टर स्प्रे मशीन हमेशा तैयार रखनी चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत पानी का छिड़काव किया जा सके। इसके अलावा, सोलर ट्यूबवेल को चालू अवस्था में रखना चाहिए, ताकि आग लगने पर तुरंत पानी उपलब्ध हो सके।

उन्होंने यह भी सलाह दी कि फसल कटाई के बाद उसे बिजली के तारों के नीचे इकट्ठा न किया जाए। खेतों में धूम्रपान से भी बचना चाहिए और यदि कोई बीड़ी या सिगरेट पीता है, तो उसे पूरी तरह बुझाकर ही फेंकना चाहिए। आग लगने की स्थिति में तुरंत 112 नंबर पर पुलिस और 101 नंबर पर दमकल विभाग को सूचना देना बेहद जरूरी है।

इस घटना के बाद किसानों ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है। उनका कहना है कि सरकार को उनके नुकसान की भरपाई करनी चाहिए, ताकि वे दोबारा खेती शुरू कर सकें। किसानों का यह भी कहना है कि यदि समय पर सहायता नहीं मिली, तो उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।

पिछले दो दिनों में जिले के भैयापुर, लाढ़ौत, गांधरा, किलोई खास और रुड़की गांवों में आग की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे कई किसानों की फसलें जल चुकी हैं। इससे यह साफ है कि इस समय आग लगने का खतरा ज्यादा है और किसानों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

कुल मिलाकर, रोहतक की यह घटना न केवल एक हादसा है, बल्कि यह किसानों की कठिनाइयों और चुनौतियों को भी उजागर करती है। जब तक ठोस सुरक्षा उपाय और त्वरित राहत व्यवस्था नहीं की जाएगी, तब तक ऐसे हादसे किसानों के जीवन को बार-बार प्रभावित करते रहेंगे। अब जरूरत है कि प्रशासन, विशेषज्ञ और किसान मिलकर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं, ताकि खेतों में मेहनत से उगाई गई फसलें यूं ही राख में न बदलें।

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