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हरियाणा के सीआरपीएफ जवान ने मध्य प्रदेश में दी जान, पैतृक गांव में पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

हरियाणा के एक जवान की असमय मौत की खबर ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में तैनात एक जवान ने मध्य प्रदेश में आत्महत्या कर ली। घटना मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले की बताई जा रही है, जहां जवान की ड्यूटी लगी हुई थी।

मृतक की पहचान हरियाणा के हरियाणा राज्य के नारनौल क्षेत्र के गांव बड़कोदा निवासी जोगेंद्र सिंह के रूप में हुई है। वे लगभग 48 वर्ष के थे और वर्ष 2004 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। अपनी सेवा के दौरान उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में जिम्मेदारी निभाई और लंबे समय तक राष्ट्र की सुरक्षा में योगदान दिया।

बताया जा रहा है कि जोगेंद्र सिंह वर्तमान में शिवपुरी में कांस्टेबल पद पर तैनात थे। सोमवार शाम को उनके परिजनों को इस दुखद घटना की सूचना दी गई, जिसके बाद परिवार सहित पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। सूचना मिलते ही परिवार के सदस्य गहरे सदमे में आ गए।

मंगलवार को उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव बड़कोदा लाया गया, जहां पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार, पुलिसकर्मी और सीआरपीएफ के जवान शामिल हुए। जवान को अंतिम विदाई देते समय लोगों की आंखें नम दिखीं और हर कोई उनकी सेवा और मिलनसार स्वभाव को याद करता नजर आया।

ग्रामीणों ने बताया कि जोगेंद्र सिंह करीब 22 वर्षों से देश सेवा में लगे थे। वे व्यवहार से सरल, मिलनसार और मददगार स्वभाव के व्यक्ति थे। गांव में उनकी अच्छी छवि थी और लोग उन्हें सम्मान की नजर से देखते थे। उनके पिता भी सीआरपीएफ से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जिससे परिवार का देश सेवा से पुराना जुड़ाव रहा है।

परिवार में उनके माता-पिता, पत्नी, दो बेटे और एक विवाहित बेटी हैं। उनके अचानक चले जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव के लोग परिवार को सांत्वना देने के लिए लगातार उनके घर पहुंच रहे हैं।

फिलहाल जवान द्वारा यह कदम उठाने के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। संबंधित अधिकारी मामले की जांच में जुटे हुए हैं और घटना से जुड़े सभी पहलुओं को खंगाला जा रहा है। सीआरपीएफ तथा स्थानीय प्रशासन की ओर से आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं।

यह घटना एक बार फिर उन मानसिक और भावनात्मक दबावों की ओर संकेत करती है, जिनका सामना सुरक्षा बलों के जवान अक्सर करते हैं। लंबे समय तक परिवार से दूर रहना, कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी और जिम्मेदारियों का बोझ कई बार उनके लिए चुनौतीपूर्ण साबित होता है।

जोगेंद्र सिंह की शहादत भले युद्धभूमि में न हुई हो, लेकिन देश सेवा में बिताए उनके वर्षों को गांव वाले गर्व से याद कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि उन्होंने अपना जीवन देश के नाम समर्पित किया और उनकी स्मृति हमेशा सम्मान के साथ याद की जाएगी।

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