मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा असर अब भारत की हवाई सेवाओं पर भी दिखने लगा है। शनिवार को ईरान पर हुए हमले के बाद सुरक्षा कारणों से दुबई का एयरस्पेस बंद कर दिया गया। इस निर्णय ने अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात को अचानक प्रभावित कर दिया, जिसका असर उत्तर प्रदेश की राजधानी से संचालित उड़ानों पर भी पड़ा।

लखनऊ स्थित चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से खाड़ी देशों के लिए संचालित कई उड़ानों को तत्काल निरस्त करना पड़ा। एयरस्पेस बंद होने से दम्माम, मस्कट, शारजाह, रियाद और रसअलखैमा जैसे प्रमुख गंतव्यों के लिए उड़ानें प्रभावित हुईं। एयरपोर्ट सूत्रों के अनुसार कुल 17 अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रद्द किया गया, जिससे सैकड़ों यात्रियों की यात्रा योजनाएं बाधित हो गईं।
सबसे अधिक असर निजी विमानन कंपनी इंडिगो की सेवाओं पर पड़ा। लखनऊ से दम्माम जाने वाली कई उड़ानें, जिनमें कनेक्टिंग फ्लाइट्स भी शामिल थीं, निरस्त कर दी गईं। दम्माम से लौटने वाली उड़ानों को भी रद्द करना पड़ा। इसी तरह रियाद और मस्कट रूट पर संचालित उड़ानों का संचालन भी पूरी तरह प्रभावित रहा।
केवल इंडिगो ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विमानन कंपनी एयर इंडिया की एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान भी शनिवार को रद्द रही। एयरलाइंस का कहना है कि सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय एयर ट्रैफिक नियंत्रण के निर्देशों के चलते यह फैसला लिया गया।
उड़ानों के निरस्त होने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोग विदेश में नौकरी करते हैं और छुट्टियां खत्म होने के बाद वापस लौटने की तैयारी में थे। वहीं कुछ यात्रियों की मेडिकल, व्यापारिक और पारिवारिक यात्राएं भी प्रभावित हुईं। एयरपोर्ट पर लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को नई बुकिंग तथा रिफंड प्रक्रिया में समय लगा।
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के साथ-साथ घरेलू सेवाओं पर भी असर देखने को मिला। लखनऊ से किशनगढ़ और झारसुगड़ा के बीच संचालित स्टार एयर की चार उड़ानों को भी रद्द कर दिया गया। हालांकि एयरलाइंस ने इसे परिचालन कारण बताया, लेकिन यात्रियों का कहना है कि लगातार हो रही उड़ान बाधाओं ने यात्रा को अनिश्चित बना दिया है।
इसी बीच एक अन्य घटना ने यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ा दीं। एयर इंडिया एक्सप्रेस की एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान, जो बेंगलुरु से काठमांडू जा रही थी, खराब मौसम के कारण गंतव्य पर उतर नहीं सकी। विमान को अंततः लखनऊ डायवर्ट करना पड़ा।
सूत्रों के अनुसार विमान सुबह रवाना हुआ था और काठमांडू पहुंचने के बाद कई बार उतरने की कोशिश की, लेकिन मौसम की खराब स्थिति के कारण लैंडिंग संभव नहीं हो सकी। इसके बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल से अनुमति लेकर विमान को लखनऊ की ओर मोड़ा गया। शाम को यह विमान सुरक्षित उतर गया, लेकिन यात्रियों को कई घंटे विमान और एयरपोर्ट पर इंतजार करना पड़ा।
इससे पहले भी यही उड़ान मौसम की वजह से एक दिन पहले वाराणसी डायवर्ट की गई थी। लगातार दूसरी बार डायवर्जन होने से यात्रियों और उनके परिजनों में नाराजगी देखी गई। बेंगलुरु एयरपोर्ट पर परिजनों ने विरोध जताया और एयरलाइंस पर यात्रियों को समय पर जानकारी न देने का आरोप लगाया।
विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में अस्थिरता का असर लंबे समय तक वैश्विक विमानन पर पड़ सकता है। खाड़ी देशों के लिए जाने वाले अधिकांश विमान दुबई एयरस्पेस से होकर गुजरते हैं। यदि यह बंद रहता है तो उड़ानों के मार्ग बदलने पड़ते हैं, जिससे समय और ईंधन दोनों की लागत बढ़ जाती है। कई बार सुरक्षा कारणों से उड़ानें रद्द करना ही एकमात्र विकल्प बचता है।
लखनऊ एयरपोर्ट प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा से पहले अपनी उड़ान की स्थिति अवश्य जांच लें। एयरलाइंस भी लगातार अपडेट जारी कर रही हैं और यात्रियों को रिफंड या वैकल्पिक बुकिंग की सुविधा देने की बात कह रही हैं।
परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक राजनीति और सैन्य घटनाओं का असर अब आम नागरिकों की यात्रा पर भी तुरंत पड़ने लगा है। एक क्षेत्र में संघर्ष होने पर हजारों किलोमीटर दूर बैठा यात्री भी उसकी कीमत चुकाता है।
फिलहाल स्थिति पर नजर रखी जा रही है। यदि मध्य पूर्व में तनाव कम होता है और एयरस्पेस फिर खुलता है, तो उड़ान सेवाएं धीरे-धीरे सामान्य हो सकती हैं। लेकिन जब तक हालात स्पष्ट नहीं होते, यात्रियों को असुविधा झेलनी पड़ सकती है।
यह घटना बताती है कि आज की दुनिया कितनी जुड़ी हुई है—जहां एक देश की सैन्य कार्रवाई का असर दूसरे देश के यात्रियों की दिनचर्या तक पहुंच जाता है।
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