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इंटरनेशनल कांफ्रेंस :: जेपी और उनका प्रयोग ‘भारतीय लोकतंत्र के परिपेक्ष्य में’ विषय पर आयोजित

राजू सिंह की रिपोर्ट दरभंगा : ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में जेपी और उनका प्रयोग “भारतीय लोकतंत्र के परिपेक्ष्य में” विषय पर एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस का आयोजन किया गया।

उद्घाटन सत्र में आगत अतिथियों का स्वागत व परिचय विभागाध्यक्ष प्रो० जितेंद्र नारायण ने कहा कि जेपी एक ऐसे स्वतंत्रता सेनानी थे जो कि देश के बाहरी दुश्मनों से तो लड़े ही साथ ही साथ सत्ता में पारदर्शिता और जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने को लेकर स्वतंत्रता बाद देश के आंतरिक सिस्टम से भी लड़ाई लड़ा। उनके शख्सियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज कई वर्तमान मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री से लेकर कई कैबिनेट मंत्री तक उनके आंदोलन के उपज हैं और आज भी वो अपना राजनीतिक गुरु जेपी को मानते हैं। संपूर्ण क्रांति के जनक जेपी साहब का खासकर आपातकाल के बाद भारतीय लोकतंत्र के परिपेक्ष्य में उनका अहम योगदान है।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी के कुलपति सह कांफ्रेंस के मुख्य अतिथि प्रो० संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि जेपी और उनके विचार सदैव प्रासंगिक रहेंगे। आपातकाल के दौरान लोकतंत्र को स्थापित करने में जेपी की अहम भूमिका रही।

स्वतंत्रता आंदोलन में तो उनका अहम योगदान था ही लेकिन इंदिरा गांधी की सरकार में आपातकाल में जो उन्होंने संपूर्ण क्रांति का बिगुल फूंका। वो हर काल में जीवंत रहेगा। मानवाधिकार के पुरोधा के रूप में जेपी सदैव याद किये जायेंगे।

महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी के प्रतिकुलपति सह सम्मानित अतिथि जी० गोपाल रेड्डी साहब ने कहा कि प्राचीन काल से लेकर वर्तमान काल तक बिहार का धरती सौभाग्यशाली रहा है जो देश को एक से एक सपूत दिया। आपातकाल के दौरान जेपी देश के ऐसे नेता थे जिन्होंने संपूर्ण क्रांति के माध्यम से सत्ता के द्वारा थोपित आपातकाल का विरोध किया। समाज को एकजुट किया और तत्कालीन सरकार का विरोध किया। वर्तमान में देश के कई मुख्यमंत्री से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री उनके आंदोलन के उपज रहे हैं। देश में लोकतंत्र की स्थापना में उनका अहम योगदान रहा।

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