राष्ट्रीय पोषण दिवस :: 30 सितम्बर तक मनायेंगे पोषण माह, पोषण पुर्नवास केंद्र भी रहेंगे क्रियाशील

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दरभंगा : कुपोषण मुक्त समाज निर्माण को लेकर सरकार पूरी तरह संकल्पित एवं सजग है और बढ़ रहे कुपोषण की शिकायत पर विराम लगाने के लिए पोषण माह आयोजन के तहत लोगों को जागरूक करने का निर्णय लिया गया। ताकि कुपोषण मुक्त समाज का निर्माण हो सकें। कुपोषण माह के तहत होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों का जिले के विभिन्न इलाकों में तमाम गतिविधियाँ शुरू हो चुकी है। इसका समापन आगामी 30 सितम्बर होगी। कार्यक्रम का सफल संचालन के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार जिला पदाधिकारी को पत्र जारी कर आवश्यक निर्देश दिए हैं।

साथ ही कार्यक्रम का सफल संचालन के लिए मुस्तैदी के साथ हर आवश्यक कार्य व गतिविधियाँ पर नजर बनाए रखने को कहा। पत्र के माध्यम से भेजे गये निर्देश में कहा गया है कि कुपोषण की दर में सुधार लाने के लिए भारत सरकार द्वारा पोषण प्राइम मिनिस्टर ओवरआर्किंग स्कीम फॉर हॉलिस्टिक नॉरिशमेंट कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है।इसके तहत अतिगंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान, रेफरल एवं प्रबंधन, स्तनपान को बढ़ावा, गृह आधारित नवजात की देखभाल, सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा, राष्ट्रीय कृमिमुक्ति कार्यक्रम, विटामिन ए खुराक अभियान, आइएफए अनुपूरण, टीकाकारण व ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस के आयोजनों को क्रियान्वित किया जाना है।

डीआईओ डॉक्टर ए के मिश्रा ने बताया कि पूरे माह चलने पर पोषण माह से संबंधित सभी गतिविधियाँ गृहभेंट कार्यक्रम की तर्ज पर होगी। ताकि अधिक से अधिक लोगों को इसकी जानकारी मिल सके और वह कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए आगे आ सकें। इसके लिए आईसीडीएस व स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों द्वारा घर-घर जाकर लोगों को जागरूक किया जाएगा।

अति कुपोषित बच्चे को चिन्हित कर मुहैया कराया जायेगा इलाज

पोषण माह के दौरान ऑगनबाड़ी सेविका, आशा समेत अन्य कर्मियों द्वारा अपने-अपने क्षेत्र में अति कुपोषित बच्चे को चिन्हित किया जाएगा। जिसके बाद उन्हें समुचित इलाज के लिए जागरूक की जाएगी और इलाज के लिए सरकारी अस्पताल तक लाने के लिए सहयोग किया जाएगा। दरअसल सामान्य बच्चे के सापेक्ष अति कुपोषित बच्चे में 9 से 11 गुणा मृत्यु का खतरा अधिक होता है।

इस दौरान गर्भवती एवं धातृ महिलाओं व उनके परिजनों को स्तनपान से होने वाले लाभ की जानकारी देकर स्तनपान के बढ़ावा पर बल दिया जाएगा। इस दौरान हर लोगों बच्चे के जन्म के बाद छः माह तक सिर्फ और स्तनपान कराने के लिए जागरूक की जाएगी।

अति कुपोषित बच्चे का रिपोर्ट तैयारी करेगी एएनएम:

इस दौरान क्षेत्र पाए जाने वाले अति कुपोषित बच्चे की एएनएम द्वारा एक फार्म भरकर रिपोर्ट तैयारी की जाएगी। जिसमें बच्चे का पूरा पता भरा जाएगा। जैसे कि नाम, माता-पिता का नाम, नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र/उप केंद्र, ऑगनबाड़ी कोड संख्या, गाँव व पंचायत का नाम समेत अन्य जानकारियाँ प्राप्त कर फार्म में भरा जाएगा।

साफ-सफाई को लेकर भी किया जाएगा जागरूक

इस दौरान क्षेत्र के लोगों को साफ-सफाई को लेकर भी जागरूक किया जाएगा और बच्चे का स्वस्थ शरीर निर्माण को लेकर पोषण मंत्र दिया जाएगा। ताकि हर हाल में कुपोषण मुक्त समाज का निर्माण हो सकें।

बीमार, सुस्त दिखाई देने वाले, स्तनपान न करने वाले या भूख की कमी, दोनों पैरों में सूजन, सांस का तेज चलना, छाती का धंसना, लगातार उल्टी व दस्त होना, मिर्गी या चमकी आना, तेज बुखार, शरीर ठंडा पड़ना, खून की कमी, त्वचा पर घाव एवं उपरी बांह की गोलाई 11.5 सेंटीमीटर से कम आदि लक्षणों की जांच कर इन बच्चों को स्वास्थ्य केंद्र या पोषण पुर्नवास केंद्र रेफर करना है। अतिगंभीर कुपोषण के शिकार बच्चों के अभिभावकों को नियमित आयरन और फॉलिक एसिड की गोली, छह माही विटामिन ए सीरप एवं अल्बेंडाजोल टैबलेट की खुराक पर परामर्श भी देना है.

पोषण पुर्नवास केंद्र रहेंगे क्रियाशील:

सभी पोषण पुर्नवास केंद्र क्रियाशील रहेंगे और कोविड 19 प्रोटेक्शन प्रोटोकॉल का पालन करते हुए अतिगंभीर कुपोषित बच्चों का गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित किया जाना है।उपचार के बाद डिस्चार्ज बच्चों को फोन के माध्यम से फॉलोअप भी करना है।

पोषण माह के दौरान आशा द्वारा गृह आधारित नवजात की देखभाल कार्यक्रम के तहत अपने संबंधित क्षेत्र में नवजात के घर का भ्रमण कर शिशु एवं माता की जांच तथा पोषण संबंधी सलाह दिया जायेगा।

पत्र में बताया गया है कि 16 सितंबर से 29 सितंबर तक सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा, विटामिन ए खुराक अभियान चलाया जायेगा। आशा लाभार्थियों की सूची तैयार कर उन्हें आवश्यक खुराक देंगी। 6 से 59 माह तथा 5 से 10 वर्ष के बच्चों, किशोर, किशोरियों तथा गर्भवती महिलाओं में एनीमिया के रोकथाम के लिए आइएफए सिरप, आइएफए की गुलाबी, नीली व लाल गोली की उपलब्धता लाभार्थी तक सुनिश्चित कराना है। सत्र स्थलों पर शत प्रतिशत प्रतिरक्षण सुनिश्चित किया जाना है. नियमित टीकाकरण के साथ आशा, आंगनबाड़ी सेविका, एएनएम, स्वयं सहायता समूह, महिला मंडल , पंचायती राज के प्रतिनिधि कुपोषण, एनीमिया, स्वच्छता आदि पर चर्चा करेंगे। इन सभी गतिविधियों की सूचना पोषण अभियान डैशबोर्ड पर उपलब्ध कराना है।