असम में अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 35 जिलों में से 24 जिलों में मतदाताओं की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है, जबकि 11 जिलों में वृद्धि हुई है। खास बात यह है कि पश्चिमी और निचले असम के कुछ मुस्लिम बहुल जिलों में मतदाताओं की संख्या बढ़ी है, वहीं कई जनजातीय और पहाड़ी क्षेत्रों में कमी देखने को मिली है।

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अंतिम मतदाता सूची में कुल 2.49 करोड़ मतदाता शामिल हैं। यह संख्या प्रारूप सूची की तुलना में 0.97 प्रतिशत कम है। विशेष पुनरीक्षण अभियान के दौरान लगभग 2.43 लाख नाम सूची से हटाए गए। जिला स्तर पर यह बदलाव कुछ सौ से लेकर 30 हजार से अधिक तक दर्ज किया गया है, जिससे क्षेत्रवार अलग-अलग रुझान सामने आए हैं।
मुस्लिम बहुल जिलों में वृद्धि
पश्चिमी और निचले असम के जिन जिलों में मुस्लिम आबादी अधिक है, वहां मतदाताओं की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। धुबरी, दक्षिण सलमारा, गोलपाड़ा और बारपेटा जैसे जिलों में मतदाता संख्या बढ़ी है। इनमें बारपेटा जिले में सबसे अधिक, 25 हजार से ज्यादा नए मतदाता जुड़े हैं।
मध्य असम के मोरीगांव और नगांव जिलों में भी मतदाताओं की संख्या में इजाफा हुआ है। हालांकि इसी क्षेत्र के दरांग और होजई जिलों में कमी दर्ज की गई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि एक ही भौगोलिक क्षेत्र में भी अलग-अलग जिलों में मतदाता सूची का प्रभाव भिन्न रहा है।
जनजातीय और पहाड़ी क्षेत्रों में गिरावट
छठी अनुसूची के अंतर्गत आने वाले जनजातीय और पहाड़ी जिलों में मतदाताओं की संख्या घटी है। दीमा हसाओ, कार्बी आंगलोंग और पश्चिम कार्बी आंगलोंग में गिरावट दर्ज की गई है। इसके अलावा बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र (BTR) के पांचों जिलों में भी मतदाता संख्या कम हुई है।
गुवाहाटी से जुड़े कामरूप और कामरूप महानगर जिलों में भी कमी दर्ज की गई है। यह संकेत देता है कि गिरावट केवल दूरदराज या जनजातीय इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि शहरी क्षेत्रों में भी मतदाता संख्या में बदलाव हुआ है।
पूर्वी असम और बराक घाटी का अलग रुझान
पूर्वी असम के 11 जिलों में से 10 में मतदाताओं की संख्या में गिरावट हुई है। केवल माजुली जिले में मामूली बढ़ोतरी, लगभग 100 मतदाताओं की, दर्ज की गई है।
वहीं बराक घाटी क्षेत्र में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला। कछार और श्रीभूमि जिलों में मतदाता संख्या घटी है, जबकि हैलाकांडी जिले में बढ़ोतरी हुई है। इससे स्पष्ट है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का प्रभाव अलग-अलग क्षेत्रों में अलग रूप में सामने आया है।
सियासी प्रतिक्रिया और सवाल
अंतिम सूची जारी होने के बाद राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं और पारदर्शिता की मांग की है। वहीं निर्वाचन विभाग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों और दिशा-निर्देशों के तहत संपन्न हुई है।
राज्य में आगामी चुनावों को देखते हुए यह मतदाता सूची अहम मानी जा रही है। आंकड़ों में आए इस बदलाव ने न केवल प्रशासनिक स्तर पर, बल्कि राजनीतिक समीकरणों में भी नई चर्चा को जन्म दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बहस होने की संभावना है।
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