लखनऊ: अब सड़क हादसों में घायल होने वाले मरीजों को इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों तक सीमित रहने की आवश्यकता नहीं होगी। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना कैशलैस ट्रीटमेंट ऑफ रोड एक्सीडेंट विक्टिम्स स्कीम-2025 के तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को नजदीकी निजी अस्पताल में भी नि:शुल्क इलाज उपलब्ध होगा। इस योजना का उद्देश्य सड़क हादसों में होने वाली जान-माल की हानि को कम करना और जख्मी मरीजों को तुरंत स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना है।

योजना का उद्देश्य और महत्व
सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना ही इस योजना का मुख्य लक्ष्य है। अक्सर देखा गया है कि गंभीर हादसे के बाद मरीज को सरकारी अस्पताल तक पहुँचाने में समय लग जाता है और शुरुआती इलाज के लिए खर्च भी मरीज और उसके परिवार पर भारी पड़ता है। इसे ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने इस योजना को शुरू किया है। अब मरीजों को डेढ़ लाख रुपये तक का कैशलैस इलाज मिलेगा, जो हादसे के तुरंत बाद लागू होगा।
लखनऊ में लागू हुआ नया सिस्टम
स्वास्थ्य विभाग ने लखनऊ के हाईवे और आसपास के 82 निजी और सरकारी अस्पतालों को इस योजना में शामिल किया है। इन अस्पतालों की सूची हाईवे के पुलिस थानों में भी उपलब्ध होगी। जिससे सड़क हादसे की सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत मरीज को किसी नजदीकी सूचीबद्ध अस्पताल में भर्ती करा सके।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. एनबी सिंह ने बताया कि यह योजना मार्च महीने से प्रभावी होगी। उन्होंने कहा कि अब किसी दुर्घटना में घायल व्यक्ति को तुरंत अस्पताल पहुंचाने के बाद शुरुआती जांच और इलाज के लिए किसी प्रकार की आर्थिक बाधा नहीं होगी।
विशेषज्ञ और जाँच सुविधा वाले अस्पताल
योजना में शामिल अस्पतालों का चयन इस आधार पर किया गया है कि वहां सर्जन, ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ, फिजिशियन और न्यूरो विशेषज्ञ डॉक्टर तैनात हों। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि अस्पताल में हादसे के तुरंत बाद आवश्यक जाँचें जैसे एक्स-रे, ब्लड टेस्ट और अन्य इमरजेंसी जांचें उपलब्ध हों।
लखनऊ के प्रमुख हाईवे जैसे अयोध्या रोड, कानपुर रोड, हरदोई रोड, सुलतानपुर रोड, रायबरेली रोड और अन्य सड़कों के पास स्थित बड़े निजी अस्पताल इस योजना में शामिल किए गए हैं। योजना के तहत मरीजों का इलाज कैशलैस यानी सीधे सरकार की तरफ से भुगतान किया जाएगा, ताकि परिवार को किसी प्रकार का आर्थिक दबाव न हो।
कैसे होगी सुविधा उपलब्ध
योजना के तहत दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति का इलाज एक सप्ताह तक किसी भी सूचीबद्ध सरकारी या निजी अस्पताल में नि:शुल्क किया जाएगा। जिला सड़क सुरक्षा समिति के माध्यम से अस्पताल का बिल सीधे सरकारी फंड से चुकाया जाएगा।
सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने आम जनता से अपील की कि सड़क पर यातायात नियमों का पालन करें, हेलमेट और सीट बेल्ट का इस्तेमाल करें। इसके साथ ही अगर किसी सड़क हादसे में व्यक्ति घायल होता है, तो उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाने में मदद करें। उनका कहना है कि शुरुआती इलाज समय पर मिलने से मरीज की जान बच सकती है और गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।
योजना के फायदे
मरीज को तुरंत इलाज: हादसे के तुरंत बाद मरीज को नजदीकी निजी या सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया जा सकता है।
आर्थिक बोझ कम होगा: परिवार को इलाज के शुरुआती खर्च की चिंता नहीं होगी।
विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध: गंभीर दुर्घटनाओं में जरूरत के अनुसार विशेषज्ञ डॉक्टर इलाज करेंगे।
समय पर जाँचें और इमरजेंसी सुविधा: एक्स-रे, ब्लड टेस्ट, फिजिकल और न्यूरोलॉजिकल जांचें तुरंत उपलब्ध होंगी।
सड़क सुरक्षा जागरूकता: जनता को यातायात नियमों का पालन करने और हादसों में तुरंत मदद करने की आदत डाली जाएगी।
अन्य राज्यों के लिए मॉडल
लखनऊ में यह योजना लागू होने के बाद अन्य जिलों और राज्यों में भी इसे लागू करने पर विचार किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना सफल रहती है तो सड़क हादसों में होने वाली मौतों और गंभीर जख्मों में काफी कमी आएगी।
सार्वजनिक सहयोग जरूरी
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जनता की भागीदारी भी जरूरी है। दुर्घटना स्थल पर लोगों का सहयोग और घायल व्यक्ति को सही समय पर अस्पताल पहुंचाना, योजना की सफलता में अहम भूमिका निभाएगा।
इस योजना के लागू होने के बाद लखनऊ में सड़क सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ा सुधार होने की उम्मीद है। घायल व्यक्तियों को मुफ्त इलाज, विशेषज्ञ डॉक्टर और समय पर जाँच मिलने से सड़क हादसे के बाद होने वाले भय और तनाव में भी कमी आएगी।
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