देश की राजधानी दिल्ली की दूषित हवा अब सिर्फ सांसों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे दिल की सेहत पर हमला कर रही है। एक ताज़ा वैज्ञानिक अध्ययन में सामने आया है कि जैसे-जैसे वायु प्रदूषण बढ़ता है, वैसे-वैसे दिल से जुड़ी बीमारियों और इमरजेंसी मामलों में तेज़ी से इजाफा होता है।

शोध के मुताबिक, हवा में मौजूद महीन कणों यानी PM 2.5 में हर 10 यूनिट की बढ़ोतरी पर हृदय रोगों के मामलों में करीब 2 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। यही नहीं, एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) और PM 10 के बढ़ते स्तर का भी दिल की बीमारियों से सीधा संबंध पाया गया।
अगले ही दिन बढ़ जाती है मरीजों की संख्या
अध्ययन में यह भी सामने आया कि जब दिल्ली में AQI, PM 10 और PM 2.5 का स्तर बढ़ता है, तो उसके अगले ही दिन अस्पतालों में दिल के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। AQI में हर 10 अंकों की वृद्धि पर कार्डियोवैस्कुलर मामलों में औसतन 1.8 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया। वहीं, PM 10 में 10 यूनिट की बढ़ोतरी पर 1.2 प्रतिशत और PM 2.5 में 10 यूनिट बढ़ने पर 2 प्रतिशत ज्यादा मरीज सामने आए।
दिल्ली बनाम शिमला: असर में दिखा बड़ा अंतर
यह रिसर्च वर्ष 2021 के दौरान दिल्ली और शिमला के प्रमुख अस्पतालों में इलाज कराने वाले 41 हजार से अधिक मरीजों के आंकड़ों पर आधारित है। दिल्ली में जहां 11 हजार से ज्यादा दिल के मामले सामने आए, वहीं शिमला में यह संख्या लगभग 3,900 रही।
दिलचस्प बात यह रही कि दिल्ली के मरीज औसतन कम उम्र के पाए गए, जबकि शिमला में तंबाकू सेवन और ठोस ईंधन से खाना पकाने का चलन ज्यादा देखा गया। दिल्ली में हार्ट अटैक और कोरोनरी आर्टरी डिजीज सबसे आम बीमारियां रहीं।
जीवनशैली भी बनी बड़ा कारण
अध्ययन के अनुसार, दिल्ली के मरीजों में शारीरिक गतिविधि की कमी, ज्यादा नमक और फैट वाला भोजन, उच्च रक्तचाप और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं अधिक देखने को मिलीं। वहीं शिमला में प्रदूषण कुछ महीनों में बढ़ा जरूर, लेकिन दिल की बीमारियों से उसका स्पष्ट और स्थायी संबंध स्थापित नहीं हो सका।
विशेषज्ञों की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वायु प्रदूषण के आंकड़ों को दिल की बीमारियों के डेटा के साथ नियमित रूप से जोड़ा जाए, तो प्रदूषण से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है। इससे दिल्ली जैसे अत्यधिक प्रदूषित शहरों में न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी मजबूत होगी, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण की रणनीतियों को भी नई दिशा मिलेगी
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