मुजफ्फरनगर जिले के खतौली स्थित लाल दयाल पब्लिक स्कूल के संचालक पर हुए हमले के मामले में नामजद पीटीआई आशीष चौधरी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे प्रकरण को नया मोड़ दे दिया है। आशीष चौधरी, जो ताजपुर गांव का निवासी बताया जा रहा है और इन दिनों खतौली के सैनीनगर में रह रहा था, ने मेरठ के दौराला क्षेत्र में जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया। गंभीर हालत में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस को उसकी जेब से ढाई पेज का सुसाइड नोट मिला है, जिसकी जांच की जा रही है।

गन्ने के खेत में बेहोशी की हालत में मिला
सोमवार को दिल्ली-दून हाईवे पर दौराला क्षेत्र के वलीदपुर कट के पास गन्ने के खेत में एक युवक के बेहोशी की हालत में पड़े होने की सूचना पुलिस को मिली। मौके पर पहुंची पुलिस ने उसे तत्काल एंबुलेंस के जरिए अस्पताल भिजवाया। चिकित्सकों के अनुसार युवक ने जहरीले पदार्थ का सेवन किया था। हालत नाजुक होने के कारण उसे बचाया नहीं जा सका। बाद में उसकी पहचान आशीष चौधरी के रूप में हुई, जो स्कूल संचालक पर हमले के मामले में आरोपी था।
घटनास्थल से कुछ दूरी पर हाईवे किनारे सरसों के खेत के पास उसकी ऑल्टो कार खड़ी मिली। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वह स्वयं वाहन चलाकर वहां पहुंचा और फिर जहरीले पदार्थ का सेवन किया। पुलिस ने कार को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
जेब से मिला ढाई पेज का सुसाइड नोट
पुलिस के मुताबिक, मृतक की तलाशी के दौरान उसकी जेब से ढाई पेज का हस्तलिखित सुसाइड नोट मिला। नोट में क्या लिखा है, इसका खुलासा अभी आधिकारिक तौर पर नहीं किया गया है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि नोट में कुछ व्यक्तियों के नाम और निजी तनाव का उल्लेख है। पुलिस हैंडराइटिंग और अन्य तकनीकी पहलुओं की भी जांच कर रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नोट उसी ने लिखा है या नहीं।
मेरठ के एसपी सिटी सत्य नारायण प्रजापत ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और फिलहाल आत्महत्या के कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही की जाएगी। मुजफ्फरनगर पुलिस से भी समन्वय स्थापित किया जा रहा है, क्योंकि मृतक वहां दर्ज एक गंभीर मामले में आरोपी था।
स्कूल संचालक पर हमले से जुड़ा था नाम
गौरतलब है कि खतौली के लाल दयाल पब्लिक स्कूल के संचालक राजवीर वर्मा पर कुछ समय पहले हमला हुआ था। इस मामले में आशीष चौधरी का नाम भी सामने आया था। पुलिस ने जांच के बाद उसे और अन्य आरोपियों को नामजद किया था। हमले के पीछे आर्थिक और व्यक्तिगत रंजिश की आशंका जताई गई थी।
मामले में अन्य आरोपी अजीत और पंकज ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया था, जबकि जानसठ निवासी रोबिन को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान पुलिस ने तीन आरोपियों पर अमानत में खयानत की धारा भी बढ़ाई थी। इनमें आशीष चौधरी के अलावा श्रीकांत और प्रमोद के नाम शामिल थे। ऐसे में आशीष की मौत ने इस पूरे केस को और उलझा दिया है।
प्रेम-प्रसंग की भी चर्चा
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि आशीष चौधरी किसी प्रेम-प्रसंग को लेकर मानसिक तनाव में था। बताया जा रहा है कि घटना से पहले उसका किसी महिला से मोबाइल फोन पर विवाद हुआ था। इसी विवाद के बाद उसने आवेश में आकर जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया। हालांकि पुलिस ने प्रेम-प्रसंग की पुष्टि नहीं की है और कहा है कि सुसाइड नोट की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
परिवार के लोगों ने भी प्रारंभिक पूछताछ में निजी तनाव की बात कही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल प्रबंधन से जुड़े विवाद और कानूनी दबाव ने भी आशीष को मानसिक रूप से परेशान कर रखा था।
कानूनी दबाव और मानसिक स्थिति
आशीष चौधरी पर हमले के मामले में धाराएं बढ़ाए जाने के बाद से वह कानूनी दबाव में था। पुलिस द्वारा चार्जशीट में संशोधन और नई धाराओं के जुड़ने से उसकी मुश्किलें बढ़ गई थीं। बताया जा रहा है कि वह कुछ समय से चुपचाप और तनावग्रस्त रहने लगा था। करीबी लोगों के अनुसार, वह भविष्य को लेकर आशंकित था और अक्सर कहता था कि उसके खिलाफ साजिश रची जा रही है।
हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है—चाहे वह कानूनी दबाव हो, पारिवारिक तनाव हो या फिर कथित प्रेम-प्रसंग।
पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच
मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। विसरा सुरक्षित रख लिया गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने किस प्रकार का जहरीला पदार्थ सेवन किया था। फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से भी कुछ साक्ष्य एकत्र किए हैं। मोबाइल फोन की कॉल डिटेल और चैट रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं, ताकि घटना से पहले की परिस्थितियों का स्पष्ट चित्र सामने आ सके।
परिवार में शोक की लहर
आशीष की मौत की खबर मिलते ही उसके गांव ताजपुर और खतौली के सैनीनगर में शोक की लहर दौड़ गई। परिजन सदमे में हैं और उनका कहना है कि वह ऐसा कदम नहीं उठा सकता था। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिवार का आरोप है कि उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था।
कई सवाल अनुत्तरित
इस पूरी घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह महज प्रेम-प्रसंग का मामला है? क्या कानूनी दबाव ने उसे यह कदम उठाने पर मजबूर किया? या फिर सुसाइड नोट में दर्ज तथ्यों से कोई नया खुलासा होगा? पुलिस इन सभी बिंदुओं पर जांच कर रही है।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि स्कूल संचालक पर हमले के मामले में आरोपी रहे पीटीआई की मौत ने जांच की दिशा बदल दी है। सुसाइड नोट की सामग्री और फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो पाएगी। तब तक यह मामला चर्चा और अटकलों का विषय बना रहेगा।
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