चंडीगढ़: हरियाणा में रबी विपणन सीजन 2026-27 के दौरान गेहूं की खरीद ने एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शनिवार को इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि राज्य की मंडियों में इस बार गेहूं की आवक पिछले चार वर्षों के मुकाबले सबसे ज्यादा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा की गई व्यवस्थाओं और तकनीकी सुधारों के कारण खरीद प्रक्रिया बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से चल रही है।

मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि अब तक प्रदेश की विभिन्न मंडियों में 81 लाख टन से अधिक गेहूं की आवक दर्ज की जा चुकी है। इसमें से 70 लाख टन से ज्यादा गेहूं की खरीद की जा चुकी है, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि इस बार की खरीद न केवल मात्रा के लिहाज से बेहतर है, बल्कि पारदर्शिता और गति के मामले में भी पिछले वर्षों से काफी आगे है।
उन्होंने आगे जानकारी दी कि कुल खरीदे गए गेहूं में से लगभग 59 लाख 77 हजार मीट्रिक टन की खरीद का सत्यापन हो चुका है। इसके अलावा 34 लाख 56 हजार मीट्रिक टन गेहूं का उठान भी किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आंकड़े बताते हैं कि खरीद प्रक्रिया पूरी तरह व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ रही है और किसी प्रकार की अव्यवस्था नहीं है।
मुख्यमंत्री ने एक अहम जानकारी साझा करते हुए बताया कि 11 अप्रैल को एक ही दिन में 7 लाख टन से अधिक गेहूं मंडियों में पहुंचा था, जो एक दिन की सबसे बड़ी आवक मानी जा रही है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में फसल का आना और उसका सफलतापूर्वक प्रबंधन करना सरकार की मजबूत व्यवस्था को दर्शाता है।
सैनी ने कहा कि इस सीजन में अब तक 5.80 लाख से अधिक किसान अपनी फसल लेकर मंडियों में पहुंच चुके हैं। उन्होंने इसे किसानों के भरोसे और सरकार की नीतियों की सफलता का प्रमाण बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को मंडियों में किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।
विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ दल जानबूझकर गलत जानकारी फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि बायोमेट्रिक सत्यापन जैसी व्यवस्था को लेकर जो भ्रम फैलाया जा रहा है, वह पूरी तरह निराधार है। सैनी ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था किसानों की सुविधा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लागू की गई है, ताकि खरीद प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोका जा सके।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि किसानों को उनकी फसल का सही मूल्य समय पर मिले। इसके लिए भुगतान प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया गया है, जिससे किसानों के खातों में सीधे पैसा पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई है और किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है।
डिजिटल पहल के तहत मुख्यमंत्री ने बताया कि इस सीजन में अब तक 13.47 लाख डिजिटल गेट पास जारी किए जा चुके हैं। इससे किसानों को मंडियों में लंबी कतारों में खड़े होने की जरूरत नहीं पड़ रही है और उनका समय भी बच रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार भविष्य में भी इस तरह की सुविधाओं को और बेहतर बनाएगी।
सैनी ने एक और महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि अगले सप्ताह से किसानों को व्हाट्सएप के माध्यम से क्यूआर कोड आधारित जे-फॉर्म भेजे जाएंगे। इससे किसानों को अपने दस्तावेज आसानी से मिल सकेंगे और उन्हें बैंक से ऋण लेने में भी किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि यह कदम किसानों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि आने वाले सीजन में “ई-खरीद” एप भी लॉन्च किया जाएगा। इस एप के जरिए किसानों को उनकी फसल से जुड़ी हर जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी। इसमें जे-फॉर्म, भुगतान की स्थिति, बुआई का विवरण, भूमि सत्यापन और गेट पास जैसी सभी सुविधाएं शामिल होंगी। इससे किसानों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और उनका काम घर बैठे ही हो सकेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल फसल खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को हर स्तर पर सुविधा देना है। आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से खेती और उससे जुड़े कार्यों को सरल बनाया जा रहा है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो सके।
अंत में मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि हरियाणा सरकार किसानों के हितों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी इसी दिशा में काम जारी रहेगा। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और नई तकनीकों को अपनाकर अपनी खेती को और अधिक लाभकारी बनाएं।
इस तरह हरियाणा में इस बार गेहूं की रिकॉर्ड आवक और सफल खरीद प्रक्रिया ने यह साबित कर दिया है कि सही नीतियों और पारदर्शी व्यवस्था के जरिए कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
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