राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) में हाल के दिनों में सामने आई आत्महत्या की घटनाओं ने अब एक गंभीर और बहुआयामी संकट का रूप ले लिया है। इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया मंगलवार को संस्थान पहुंचीं, जहां उन्होंने करीब साढ़े चार घंटे तक अधिकारियों, पुलिस और छात्रों से बातचीत कर स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्होंने न केवल संस्थान प्रशासन बल्कि पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

रेणु भाटिया ने खुलासा किया कि संस्थान के कई छात्र भारी कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं। यह कर्ज मुख्य रूप से क्रेडिट कार्ड के माध्यम से लिया गया है, जिस पर लगभग 36 प्रतिशत तक की ऊंची ब्याज दर वसूली जा रही है। छात्रों के लिए यह आर्थिक दबाव इतना बढ़ गया है कि वे पुराने कर्ज को चुकाने के लिए नया कर्ज लेने पर मजबूर हो रहे हैं। इस तरह वे एक ऐसे चक्र में फंसते जा रहे हैं, जहां से निकल पाना उनके लिए बेहद कठिन हो जाता है।
उन्होंने बताया कि इस पूरे मामले में सट्टेबाजी की भी भूमिका सामने आई है। कुछ छात्रों ने निजी तौर पर जानकारी दी कि संस्थान के अंदर या आसपास इस तरह की गतिविधियां हो रही हैं, जिससे कई छात्र प्रभावित हो रहे हैं। यह स्थिति न केवल उनकी पढ़ाई पर असर डाल रही है, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव डाल रही है।
जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया, जिसमें एक व्यक्ति की भूमिका संदिग्ध पाई गई। यह व्यक्ति क्रेडिट कार्ड बनवाने का काम करता था और वह करीब 3500 छात्रों के व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ा हुआ था। यह तथ्य अपने आप में कई सवाल खड़े करता है—कैसे इतनी बड़ी संख्या में छात्रों तक उसकी पहुंच बनी और बिना अभिभावकों की जानकारी या संस्थान की अनुमति के क्रेडिट कार्ड जारी किए गए।
इस व्यक्ति को बैठक में बुलाकर पूछताछ की गई, लेकिन वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। इसके बाद महिला आयोग की अध्यक्ष ने पुलिस प्रशासन को निर्देश दिए कि इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जाए और यदि किसी प्रकार की साजिश सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
संस्थान प्रशासन ने भी इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया दी है। कार्यवाहक निदेशक ब्रह्मजीत सिंह ने बताया कि 9 अप्रैल को हुई एक छात्र की आत्महत्या के बाद ही उन्होंने संबंधित बैंक को पत्र लिखकर कैंपस में क्रेडिट कार्ड बनाने की प्रक्रिया को रोकने के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही अन्य बैंकों और एजेंसियों को भी स्पष्ट कर दिया गया कि वे संस्थान परिसर में इस तरह की गतिविधियां न करें।
इस मामले में पहले भी कर्ज को लेकर गंभीर आरोप सामने आ चुके हैं। 31 मार्च को एक छात्र पवन कुमार ने हॉस्टल में आत्महत्या कर ली थी। उसके परिवार ने दावा किया था कि वह क्रेडिट कार्ड के कर्ज में फंसा हुआ था और उसी दबाव के कारण उसने यह कदम उठाया। उसके पिता ने बताया था कि उन्होंने बेटे की मदद के लिए करीब 75 हजार रुपये दिए थे, लेकिन इसके बावजूद स्थिति नहीं सुधर सकी।
महिला आयोग की अध्यक्ष ने हाल में हुई सभी आत्महत्या की घटनाओं का विस्तृत ब्यौरा मांगा है। उन्होंने विशेष रूप से 16 अप्रैल को हुई छात्रा दीक्षा दुबे की आत्महत्या और 17 अप्रैल को एक अन्य छात्रा द्वारा आत्महत्या के प्रयास की घटनाओं पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि इन घटनाओं के पीछे के वास्तविक कारणों को समझना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
इसके अलावा उन्होंने यह भी जानने की कोशिश की कि आखिर किन कारणों से छात्रों को हॉस्टल खाली करने के निर्देश दिए गए थे और इसका उनके मानसिक स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ा। छात्रों से मिली जानकारी के आधार पर उन्होंने प्रशासन के साथ कई बिंदुओं पर चर्चा की और सुधार के सुझाव दिए।
रेणु भाटिया ने यह भी कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि छात्राएं आत्महत्या जैसे कदम उठा रही हैं और समाज उन्हें समय पर सहारा नहीं दे पा रहा है। उन्होंने पीड़ित छात्रों के परिवारों से सीधे संपर्क करने की बात कही है, ताकि उनकी समस्याओं को समझा जा सके और उन्हें उचित सहायता दी जा सके।
उन्होंने उस छात्रा से भी बातचीत की, जिसने आत्महत्या का प्रयास किया था। फिलहाल वह मानसिक रूप से गहरे आघात में है और अपने माता-पिता के साथ नहीं रहना चाहती। भाटिया ने कहा कि जब वह दोबारा संस्थान में लौटेगी, तो वे व्यक्तिगत रूप से उससे मिलकर उसकी स्थिति को समझने और उसे सहयोग देने की कोशिश करेंगी।
पिछले दो महीनों में एनआईटी में चार छात्रों द्वारा आत्महत्या और एक छात्रा द्वारा प्रयास की घटनाओं ने पूरे सिस्टम को हिला कर रख दिया है। इन घटनाओं के बाद संस्थान में अनिश्चितकालीन अवकाश घोषित कर दिया गया है, ताकि स्थिति को संभाला जा सके और छात्रों को समय दिया जा सके।
इस मामले में मानवाधिकार आयोग ने भी संज्ञान लिया है और संस्थान प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है। अब इस पूरे प्रकरण की अगली सुनवाई 19 मई को होगी, जिससे यह उम्मीद की जा रही है कि जांच में और स्पष्टता आएगी।
कुल मिलाकर, यह मामला केवल आत्महत्या की घटनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, आर्थिक दबाव, और संस्थागत जिम्मेदारी जैसे कई गंभीर मुद्दों को उजागर करता है। अब यह जरूरी हो गया है कि संबंधित एजेंसियां मिलकर ठोस कदम उठाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके और छात्रों को सुरक्षित, सहायक और स्वस्थ वातावरण मिल सके।
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