यह घटना सिर्फ एक आत्महत्या नहीं, बल्कि टूटते रिश्तों, अनकहे तनाव और एक मासूम की छिन गई दुनिया की कहानी है। सोमवार दोपहर मेरठ के विजयनगर इलाके में एक घर के भीतर जो हुआ, उसने पूरे मोहल्ले को स्तब्ध कर दिया। पत्नी भविष्य की तैयारी में बैंक गई थी और घर लौटने पर उसे ऐसा दृश्य मिला, जिसने उसकी जिंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया।

आरजी इंटर कॉलेज में सहायक अध्यापिका के पद पर कार्यरत बबीता जब बैंक से लौटकर घर पहुंचीं, तो बाहर से सब कुछ सामान्य दिख रहा था। दरवाजा खुला था, घर शांत था और उनका दो साल का बेटा केशव सोफे पर बैठा खिलौनों से खेल रहा था। लेकिन घर के अंदर एक कमरे में जिंदगी हार चुकी थी—पंखे से तार के सहारे बबीता के पति रजनीश सैनी (40) का शव लटका हुआ था।
सुबह सामान्य थी, दोपहर में सब खत्म
सोमवार की सुबह भी अन्य दिनों की तरह ही शुरू हुई थी। बबीता ने बैंक जाने से पहले रजनीश से बात की थी। परिवार गंगानगर क्षेत्र में एक मकान खरीदने की तैयारी कर रहा था। मंगलवार को रजिस्ट्री होनी थी और इसी के लिए बबीता बैंक से पैसे निकालने गई थीं।
रजनीश घर पर ही थे। वर्क फ्रॉम होम करते हुए वह बेटे केशव की देखभाल भी करते थे। बबीता जब बैंक में थीं, तब उन्होंने किसी जानकारी के लिए पति को फोन किया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई। उन्होंने सोचा कि शायद रजनीश बेटे में व्यस्त होंगे।
करीब एक घंटे बाद जब बबीता घर लौटीं, तो उन्हें कुछ अजीब सा सन्नाटा महसूस हुआ।
सोफे पर खेलता बेटा, कमरे में लटका पिता
घर में कदम रखते ही बबीता की नजर सबसे पहले अपने बेटे पर पड़ी। केशव बेफिक्र होकर सोफे पर खेल रहा था। मां ने पूछा भी नहीं, क्योंकि उसे लगा कि रजनीश कहीं आसपास होंगे। लेकिन जब वह स्टोर रूम की ओर गईं, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
कमरे के भीतर रजनीश का शव पंखे से लटका हुआ था। यह दृश्य देखते ही बबीता की चीख निकल गई। आवाज सुनकर मकान मालिक और पड़ोसी दौड़कर पहुंचे। कुछ ही देर में पुलिस को सूचना दी गई।
मौके पर पहुंची पुलिस, पत्नी बेसुध
सिविल लाइन थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को नीचे उतारा और पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इस दौरान बबीता सदमे में बेहोश हो गईं। मोहल्ले में मातम छा गया। लोग यह समझ नहीं पा रहे थे कि शांत स्वभाव का रजनीश इतना बड़ा कदम कैसे उठा सकता है।
नौ साल पुरानी शादी, बाहर से सामान्य दिखती जिंदगी
रजनीश मूल रूप से मुजफ्फरनगर के जानसठ क्षेत्र के निवासी थे। करीब नौ साल पहले उनकी शादी देवबंद की रहने वाली बबीता से हुई थी। शादी के कुछ समय बाद बबीता का चयन सहायक अध्यापिका के रूप में हो गया। पिछले तीन वर्षों से वह मेरठ के आरजी इंटर कॉलेज में पढ़ा रही थीं।
दो साल पहले बेटे केशव का जन्म हुआ। उसी समय से रजनीश ने वर्क फ्रॉम होम करना शुरू कर दिया था, ताकि पत्नी की नौकरी और बच्चे की देखभाल दोनों में संतुलन बना रहे। पिछले दो वर्षों से परिवार विजयनगर इलाके में किराए के मकान में रह रहा था।
पड़ोसियों के मुताबिक, बाहर से परिवार पूरी तरह सामान्य नजर आता था। कभी तेज झगड़े या विवाद की आवाज नहीं सुनाई दी।
माता-पिता का आरोप, सवालों के घेरे में हालात
घटना की जानकारी मिलते ही रजनीश के पिता वेदप्रकाश, मां निर्मला और भाई अमित जानसठ से मेरठ पहुंचे। बेटे का शव देखकर परिजन टूट गए। पुलिस के अनुसार, मृतक के परिजनों ने बबीता पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि आरोपों की प्रकृति को लेकर पुलिस अभी कुछ भी सार्वजनिक नहीं कर रही है।
एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि मामला बेहद संवेदनशील है। सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
आत्महत्या या दबाव?
फिलहाल पुलिस इसे आत्महत्या का मामला मान रही है, लेकिन परिजनों के आरोप और परिस्थितियां कई सवाल खड़े कर रही हैं। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या रजनीश किसी मानसिक तनाव से गुजर रहे थे, या फिर पारिवारिक, आर्थिक या सामाजिक दबाव इसका कारण बना।
पुलिस रजनीश के मोबाइल, कॉल डिटेल्स और डिजिटल गतिविधियों की भी जांच कर रही है, ताकि आत्महत्या से पहले की मानसिक स्थिति का पता लगाया जा सके।
मासूम के भविष्य पर सवाल
इस पूरे मामले में सबसे दर्दनाक पहलू दो साल का केशव है। जिस उम्र में बच्चा पिता की उंगली पकड़कर चलना सीखता है, उसी उम्र में उसके सिर से पिता का साया उठ गया। उसे अभी यह भी समझ नहीं कि घर में जो सन्नाटा है, वह हमेशा के लिए है।
मोहल्ले में गम और खामोशी
घटना के बाद विजयनगर इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है। लोग धीमी आवाज में बातें कर रहे हैं। हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल है—अगर सब कुछ ठीक था, तो आखिर रजनीश ने यह कदम क्यों उठाया?
आगे की राह
पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों पर अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई और वजह।
लेकिन सच यही है कि एक घर उजड़ चुका है, एक पत्नी विधवा हो चुकी है और एक मासूम बच्चा अपने पिता को हमेशा के लिए खो चुका है।
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