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युवराज की मौत से टूटा परिवार, अमेरिका जाने और शादी की ख्वाहिश अधूरी रह गई

दिल्ली के बसंत कुंज इलाके में रहने वाले इंजीनियर युवराज मेहता की मौत ने उनके परिवार और दोस्तों को गहरे सदमे में डाल दिया है। युवराज, जो पिता के लिए जीवन का सहारा थे, जल्द ही बहन के पास यूके में शिफ्ट होने और शादी करने की योजना बना रहे थे। उनकी अचानक मौत ने पिता राजकुमार मेहता और उनके परिवार की दुनिया ही बदल दी है।

युवराज के पिता राजकुमार मेहता, जो एक रिटायर्ड बैंक अधिकारी हैं, ने अपने बेटे के साथ कई योजनाएं बनाई थीं। युवराज चाहते थे कि वे पिता को साथ लेकर बहन के पास विदेश जाएँ, ताकि परिवार एक साथ रह सके। युवराज के पिता विदेश जाने के मामले में असमर्थ थे, लेकिन बेटे की खुशियों और भविष्य के लिए युवराज लगातार प्रयासरत रहते थे।

युवराज की मां की दो साल पहले बीमारी के कारण मृत्यु हो गई थी। इसके बाद से युवराज अपने पिता के साथ ही रहते थे और उनका पूरा ध्यान पिता पर ही रहता था। पिता-पुत्र का रिश्ता बेहद खास और घनिष्ठ था। युवराज का जीवन अपने परिवार और करीबी दोस्तों के इर्द-गिर्द ही घूमता था। वह पिता को अकेला नहीं छोड़ना चाहते थे और यही वजह थी कि वह दोस्तों के साथ अक्सर बाहर भी नहीं जाते थे।

युवराज के करीबी दोस्त पंकज कुमार ने ‘हिंदुस्तान’ से बातचीत में युवराज के व्यक्तित्व और योजनाओं के बारे में कई बातें साझा की। पंकज, जो दिल्ली में युवराज के साथ ही रहते थे और पहले उनकी कंपनी में काम करते थे, ने बताया कि युवराज एक होनहार और जिम्मेदार युवक थे। वह हमेशा अपने पिता के लिए सोचते थे और चाहते थे कि उनका परिवार खुश और सुरक्षित रहे।

पंकज ने कहा कि युवराज अक्सर बहन के पास यूके जाने की बात करते रहते थे। उनके मन में विदेश में बसने की योजना थी, लेकिन पिता की असहमति की वजह से वह अभी पूरी तरह कदम नहीं बढ़ा पाए थे। पिता ने लगभग डेढ़ साल पहले टाटा यूरेका सोसाइटी में एक फ्लैट खरीदा था, जहाँ वे दोनों पिता-पुत्र रहते थे। युवराज हमेशा चाहते थे कि पिता उनके साथ विदेश जाएँ, लेकिन पिता के मन में अपनी जड़ें और घर की यादें थीं।

युवराज के पिता उनके विवाह की तैयारी में भी जुटे हुए थे। पिता चाहते थे कि युवराज की शादी जल्द से जल्द हिंदू रीति-रिवाज से संपन्न हो, ताकि परिवार का सुख और खुशहाली बनी रहे। पंकज ने बताया कि युवराज का ध्यान केवल पिता और परिवार पर ही था, यही कारण था कि वह दोस्तों के साथ ज्यादा समय नहीं बिताते थे।

घटना के दिन की बात करें तो युवराज ने अपने पिता को फोन किया और उन्हें बताया कि उनकी कार नाले में गिर गई है और मदद की आवश्यकता है। पिता तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और उम्मीद की कि सरकारी मदद से युवराज सुरक्षित बाहर निकल आएँगे। लेकिन दुखद घटना में सिस्टम के सामने युवराज की जिंदगी बच नहीं पाई। यह हादसा पिता के लिए असहनीय दुख और सदमे का कारण बन गया।

पंकज ने कहा कि पिता-पुत्र हमेशा एक साथ खाना खाते थे और एक-दूसरे का ध्यान रखते थे। युवराज की मौत ने परिवार के भीतर एक खालीपन और टूटन पैदा कर दी है, जिसे भर पाना मुश्किल है। पिता अब केवल बेटे की यादों में ही जी रहे हैं।

युवराज की जिंदगी में दोस्ती और परिवार के महत्व को देखकर साफ होता है कि वह एक संवेदनशील और जिम्मेदार युवक थे। वह हमेशा अपने प्रियजनों की भलाई के लिए सोचते थे और अपने परिवार के लिए किसी भी हद तक जाते। पंकज ने यह भी साझा किया कि युवराज के पिता बेटे की शादी की तैयारी में इतने व्यस्त थे कि उन्हें खुद का ध्यान देने का समय भी नहीं मिल पाता था।

युवराज का सपना था कि वह अपने पिता को साथ लेकर विदेश जाएँ, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। पिता को विदेश जाने से मना करने की वजह से यह योजना अधूरी रह गई। इसके साथ ही, युवराज की शादी की योजना भी अब केवल यादों में ही सीमित रह गई है।

यह दुखद घटना यह भी याद दिलाती है कि जीवन कितना अस्थिर और अनिश्चित हो सकता है। युवराज के पिता, जो बेटे के बिना अकेले रह गए हैं, अब केवल उसकी यादों और तस्वीरों में उसे ढूंढते हैं। पंकज ने कहा कि युवराज का परिवार और दोस्त उसे हमेशा याद रखेंगे, क्योंकि वह केवल एक होनहार युवक ही नहीं बल्कि एक आदर्श पुत्र और दोस्त भी थे।

युवराज की मौत ने न केवल उनके परिवार को, बल्कि उनके दोस्तों और समाज को भी झकझोर कर रख दिया है। उनके जाने से परिवार में एक स्थायी खालीपन बन गया है। पिता अब केवल अपने बेटे की यादों में जी रहे हैं और हर क्षण उसकी कमी महसूस कर रहे हैं।

युवराज की कहानी हमें यह सिखाती है कि जीवन की अनिश्चितताओं के बीच परिवार और प्रियजनों का महत्व कभी कम नहीं होना चाहिए। उनके पिता और दोस्त पंकज के लिए यह समय अत्यंत कठिन है, लेकिन वे युवराज की यादों और उसकी अच्छी आदतों को हमेशा संजोकर रखेंगे।

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