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लेंटर गिरने से निर्माण स्थल पर बड़ा हादसा, बल्ली खिसकी और मलबे में दबे 6 मजदूर

साहा-शहजादपुर रोड पर बुधवार दोपहर एक निर्माणाधीन दुकान में उस समय बड़ा हादसा हो गया, जब लेंटर डालने का काम अचानक दुर्घटना में बदल गया। काम के दौरान सहारे के लिए लगाई गई बल्ली के खिसकने से पूरा लेंटर भरभराकर नीचे गिर पड़ा, जिससे वहां काम कर रहे छह मजदूर मलबे के नीचे दब गए। इस घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई।

मिली जानकारी के अनुसार, यह हादसा संदीप वेल्डिंग वर्कशॉप के पास बने रहे एक नए निर्माण स्थल पर हुआ। दोपहर करीब 4 बजे लेंटर डालने की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में थी। उस समय वहां करीब 8 से 10 मजदूर और मिस्त्री मौजूद थे, जो काम को पूरा करने में लगे हुए थे। सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन अचानक एक बल्ली अपनी जगह से खिसक गई, जिससे पूरा ढांचा असंतुलित हो गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पहले हल्की कंपन महसूस हुई और कुछ ही पलों में लेंटर का हिस्सा नीचे गिरने लगा। इससे पहले कि कोई स्थिति को समझ पाता, भारी कंक्रीट का ढांचा मजदूरों पर आ गिरा। छह मजदूर मलबे के नीचे दब गए, जबकि बाकी लोग बाल-बाल बच गए।

हादसे के बाद वहां मौजूद मजदूरों में हड़कंप मच गया। हर तरफ चीख-पुकार सुनाई देने लगी। घायल मजदूर मलबे के नीचे फंसे हुए मदद के लिए पुकार रहे थे। साथी मजदूरों और आसपास के लोगों ने बिना समय गंवाए राहत कार्य शुरू किया। किसी के पास मशीनें नहीं थीं, इसलिए सभी ने अपने हाथों और उपलब्ध औजारों से मलबा हटाना शुरू किया।

इस दौरान माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया था। लोग तेजी से मलबा हटाने की कोशिश कर रहे थे, ताकि दबे हुए मजदूरों को जल्द से जल्द बाहर निकाला जा सके। करीब आधे घंटे की कड़ी मेहनत के बाद सभी घायलों को मलबे से बाहर निकाला गया। कुछ मजदूरों की हालत गंभीर थी और वे दर्द से कराह रहे थे।

घटना की सूचना तुरंत एंबुलेंस सेवा को दी गई। मौके पर पहुंची एंबुलेंस के जरिए घायलों को नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया गया। घायलों में हेमा माजरा गांव के निवासी रवि (26), राजाराम (24) और विपिन कुमार (26) को कैंट के नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं दो अन्य मजदूरों को मुलाना स्थित एमएम अस्पताल में दाखिल करवाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। एक अन्य घायल का भी उपचार किया जा रहा है।

ठेकेदार रामचरण ने बताया कि वह मजदूरों के साथ मिलकर लेंटर डालने का काम करवा रहे थे। काम लगभग पूरा हो चुका था और अंतिम चरण चल रहा था। अचानक बल्ली के खिसकने से यह हादसा हो गया। उन्होंने कहा कि किसी को अंदाजा नहीं था कि ऐसा हो सकता है, क्योंकि सब कुछ सामान्य तरीके से चल रहा था।

स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पूरा ध्यान नहीं रखा गया था। यदि ढांचे को मजबूत सहारा दिया गया होता और सुरक्षा के जरूरी इंतजाम किए गए होते, तो शायद यह हादसा टल सकता था। इस घटना ने एक बार फिर निर्माण स्थलों पर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि लेंटर डालते समय सपोर्ट सिस्टम बेहद मजबूत होना चाहिए। बल्ली और अन्य सहारे सही तरीके से फिट और संतुलित होने चाहिए। साथ ही, मजदूरों को हेलमेट और अन्य सुरक्षा उपकरण दिए जाने चाहिए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में उनकी जान बचाई जा सके।

घटना के बाद इलाके में डर और चिंता का माहौल है। मजदूरों के परिवार वाले अस्पतालों में पहुंचने लगे हैं और अपने परिजनों की स्थिति को लेकर चिंतित हैं। डॉक्टरों की टीम घायलों का इलाज कर रही है और उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

यह हादसा न केवल एक निर्माण स्थल की लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि सुरक्षा उपायों की अनदेखी कितनी भारी पड़ सकती है। छोटे-छोटे एहतियात बड़े हादसों को टाल सकते हैं, लेकिन जब इन्हें नजरअंदाज किया जाता है, तो परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं।

फिलहाल, राहत और बचाव कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन इस घटना की गूंज पूरे इलाके में सुनाई दे रही है। लोग इस हादसे को लेकर चर्चा कर रहे हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के उपायों पर जोर दे रहे हैं।

यह हादसा एक चेतावनी है कि निर्माण कार्यों में जल्दबाजी या लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। मजदूरों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना और सभी जरूरी मानकों का पालन करना बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी परिवार को इस तरह के दर्दनाक हादसे का सामना न करना पड़े।

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