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10 साल बाद नई दिल्ली में भारत-अरब विदेश मंत्रियों का दूसरा सम्मेलन, 22 अरब देशों के साथ साझेदारी को मिलेगी नई गति

भारत और अरब देशों के संबंधों को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से भारत-अरब विदेश मंत्रियों का दूसरा सम्मेलन शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित होने जा रहा है। यह सम्मेलन करीब एक दशक के अंतराल के बाद हो रहा है, जिसे दोनों पक्षों के बीच सहयोग को और व्यापक बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इस उच्चस्तरीय बैठक में अरब लीग के 22 सदस्य देशों के विदेश मंत्री, अरब लीग के महासचिव और भारत के वरिष्ठ प्रतिनिधि भाग लेंगे।

इस सम्मेलन की सह-अध्यक्षता भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक में राजनीतिक संवाद के साथ-साथ आर्थिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, शिक्षा, संस्कृति, मीडिया, व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है।

भारत-अरब विदेश मंत्रियों का पहला सम्मेलन वर्ष 2016 में बहरीन में आयोजित किया गया था। उस समय दोनों पक्षों ने सहयोग के लिए पांच प्रमुख क्षेत्रों—अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, शिक्षा, मीडिया और संस्कृति—को प्राथमिकता दी थी। इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई ठोस प्रस्ताव भी रखे गए थे। अब दूसरा सम्मेलन उन पहलों को आगे बढ़ाने और बदलते वैश्विक परिदृश्य में साझेदारी को और मजबूत करने पर केंद्रित रहेगा।

भारत और अरब देशों के बीच यह मंच सबसे बड़ा संस्थागत संवाद तंत्र माना जाता है। इसकी नींव मार्च 2002 में भारत और अरब लीग के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर के साथ रखी गई थी। इसके बाद दिसंबर 2008 में अरब-भारत सहयोग मंच की स्थापना के लिए एक और सहयोग ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए, जिसे वर्ष 2013 में संशोधित किया गया। भारत, 22 सदस्य देशों वाली अरब लीग का पर्यवेक्षक देश है और दोनों पक्षों के संबंध लगातार गहराते जा रहे हैं।

सम्मेलन से पहले सूडान और फलस्तीन के विदेश मंत्री नई दिल्ली पहुंचे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सूडान के विदेश मामलों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मंत्री मोहिएल्डिन सलीम अहमद इब्राहिम तथा फलस्तीन की विदेश मंत्री वार्सेन अघबेकियन शाहीन का राजधानी में स्वागत किया।

जायसवाल ने सोशल मीडिया पर कहा कि दूसरे भारत-अरब विदेश मंत्रियों के सम्मेलन के लिए दोनों मंत्रियों का स्वागत करते हुए खुशी हो रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह यात्रा भारत-सूडान और भारत-फलस्तीन के बीच लोगों से लोगों के संबंधों को और मजबूत करेगी तथा आपसी सहयोग को नई दिशा देगी।

कुल मिलाकर, यह सम्मेलन भारत और अरब दुनिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को और सशक्त करने, आपसी विश्वास बढ़ाने और 22 अरब देशों के साथ सहयोग के नए अवसर खोलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है।

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