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बिहार के लाल ललित का कमाल,अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का करेंगे प्रतिनिधित्व

डेस्क : गरीब तथा जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त में शिक्षा देने के लिए देशभर में मिशाल बने संयुक्त राष्ट्र संघ से सम्मानित युवा समाजसेवी ललित किशोर कुमार को अन्तर्राष्ट्रीय गाँधी पीस फाउंडेशन नेपाल के द्वारा भारत से अन्तर्राष्ट्रीय गाँधी शांति एम्बेसडर बनाया।भारत के पड़ोसी देश नेपाल में पहली बार आयोजन किया गया है।

यह आयोजन अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रत्येक साल अलग-अलग देशों में आयोजित होती है।इस बार यह अन्तर्राष्ट्रीय आयोजन नेपाल की राजधानी काठमांडू में 7 अक्तूबर से 9 अक्तूबर 2019 में आयोजित होगी।बताते चलें कि महात्मा गाँधी पीस एम्बेसडर काॅन्फ्रेंस के माध्यम से पूरी दुनिया में किसी भी क्षेत्र में बेहतर सामाजिक सरोकार कार्य करनें वाले को अन्तर्राष्ट्रीय गाँधी पीस एम्बेसडर अवार्ड से सम्मानित किया जाता है।ज्ञात हो कि ललित किशोर कुमार के द्वारा विगत नौ सालों से गरीब तथा जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त में शिक्षा देने का काम कर रहे हैं।इस सम्मेलन में पूरी दुनिया भर से अपने-अपने क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाले लोगोें को नेपाल की राजधानी काठमांडू में अन्तर्राष्ट्रीय एम्बेसडर काॅन्फ्रेंस में अन्तर्राष्ट्रीय गांधी पीस एम्बेसडर अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा।बातचीत के दौरान युवा समाजसेवी ललित किशोर कुमार ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह पहला मौका है कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मुझे भारत का प्रतिनिधित्व करनें का मौका मिला है।

ललित ने बताया कि मेरा पहला प्रयास है कि हम अपनी देश कि पहचान अन्तर्राष्ट्रीय स्तर बनाएँगे।ललित किशोर कुमार ने बातचीत के दौरान भावुक होते हुए बताया कि हमारा पहला प्रयास है ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा से वंचित बच्चें जो पैसे कि अभाव में पढ़ाई नहीं कर रहें हैं।उन बच्चों को खोजकर उसे विधालय से जोड़ना ताकि कोई भी गरीब, असहाय, निर्धन,पीड़ित, लाचार,बेघर तथा जरूरतमंद बच्चें शिक्षा से वंचित न रहे।ललित ने बताया कि मेरी जिन्दगी का अंतिम लक्ष्य है कि मरते दम तक गरीब तथा जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त में शिक्षा देकर उसे आगें बढ़ाना।

मालूम हो कि ललित का बचपन आम बच्चों की तरह संघर्षों से होकर गुजरा है। वे बताते है कि जब गाँव के स्कूल में पढ़ने जाते थे। तो बहुत सारे बच्चे मजबूरी में पढ़ने नही आ पाते थे। किसी के पास स्लेट नही, तो किसी के कपड़े नही होते थे। आर्थिक तंगी इतनी थी कि दो जून की रोटी के लिए बच्चों को बीच में पढ़ाई छोड़कर काम करना पड़ता था। कई तरह कि समस्याएं खड़ी हो जाती थी। फिर भी ललित उन बच्चों को अपने पॉकेट खर्च में से बचाए हुए रुपयों से कुछ हद तक मदद करने की कोशिश करते रहते है।

कार्यक्रम में श्रीलंका, जापान, भारत, इंडोनेशिया, रूस, अफगानिस्तान,पाकिस्तान,बंगलादेश,भूटान,आस्ट्रेलिया,फिलीपींस,सिंगापुर,अमेरिका,चीन ,कम्बोडिया, सहित अन्य देशों के प्रतिनिधि आएंगे।

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