New Delhi | Business News: बैंक यूनियनों की ओर से मंगलवार को पूरे दिन की हड़ताल के ऐलान के बाद सरकार और बैंकों ने मोर्चा संभाल लिया है। केंद्र सरकार ने बैंकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि हड़ताल के बावजूद आम ग्राहकों को न्यूनतम असुविधा हो और जरूरी बैंकिंग सेवाएं बिना रुकावट जारी रहें। हालांकि शाखाओं में कामकाज पर आंशिक असर पड़ सकता है, लेकिन एटीएम और डिजिटल बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से चालू रहेंगी।

उच्चस्तरीय बैठक में तय हुई रणनीति
हड़ताल से एक दिन पहले सोमवार को वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव की अध्यक्षता में एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के चेयरमैन, सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों के मैनेजिंग डायरेक्टर व सीईओ और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) के प्रमुख शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि यूनियनों की हड़ताल के दौरान भी बैंकिंग व्यवस्था पटरी से न उतरे।
ग्राहक सेवाओं को प्राथमिकता
सूत्रों के अनुसार, बैठक में बैंकों को खास तौर पर यह निर्देश दिया गया कि
ग्राहकों से जुड़ी जरूरी सेवाएं निर्बाध रूप से चलती रहें
इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई, कार्ड पेमेंट जैसी डिजिटल सेवाओं में कोई रुकावट न आए
चेक क्लीयरिंग और सेटलमेंट सिस्टम प्रभावित न हों
सरकारी भुगतान और योजनाओं से जुड़ी बैंकिंग सेवाएं जारी रहें
ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट के जरिए सेवाएं चालू रखी जाएं
एटीएम में कैश की कोई कमी नहीं
बैंकों ने सरकार को भरोसा दिलाया है कि एटीएम में पर्याप्त नकदी उपलब्ध कराई गई है। जरूरत पड़ने पर समय पर कैश रीफिल किया जाएगा, ताकि ग्राहकों को नकदी निकालने में परेशानी न हो। अधिकारियों का कहना है कि नकदी संकट जैसी स्थिति नहीं बनने दी जाएगी।
शाखाओं में कामकाज हो सकता है प्रभावित
हालांकि यह भी स्वीकार किया गया है कि हड़ताल के कारण कई शाखाओं में कामकाज आंशिक रूप से प्रभावित हो सकता है, क्योंकि बड़ी संख्या में बैंक कर्मचारी और अधिकारी हड़ताल में शामिल रहेंगे। इसके बावजूद, बैंकों का दावा है कि ऑनलाइन और डिजिटल माध्यमों से अधिकतर सेवाएं पूरी तरह उपलब्ध रहेंगी।
क्यों हो रही है बैंक हड़ताल?
यह हड़ताल यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) द्वारा बुलाई गई है, जिसमें नौ प्रमुख बैंक यूनियनें और संगठन शामिल हैं। उनकी मुख्य मांग है कि बैंकों में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू किया जाए, यानी शनिवार और रविवार दोनों दिन अवकाश मिले।
यूनियनों का कहना है कि 22 और 23 जनवरी को वित्तीय सेवा विभाग के साथ बातचीत जरूर हुई थी, लेकिन किसी ठोस समय-सीमा या लिखित सहमति पर बात नहीं बन सकी। इसी वजह से यूनियनों ने हड़ताल का फैसला बरकरार रखा।
सरकार और बैंकों की अपील
सरकार और बैंक प्रबंधन ने ग्राहकों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और जहां संभव हो, डिजिटल बैंकिंग सेवाओं का उपयोग करें। बैंक अधिकारियों का कहना है कि हड़ताल के बावजूद जरूरी सेवाएं सुचारु रखने की पूरी कोशिश की जा रही है, ताकि आम जनता को कम से कम परेशानी झेलनी पड़े।
कुल मिलाकर, आज बैंक शाखाओं में सीमित असर दिख सकता है, लेकिन डिजिटल लेन-देन, एटीएम और ऑनलाइन सेवाओं के जरिए बैंकिंग व्यवस्था सामान्य बनाए रखने की तैयारी पूरी है।
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