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अहमदाबाद में बिहार महोत्सव 28 फरवरी से, गुजरात सीएम से मुलाकात कर मंत्री प्रमोद कुमार ने किया आमंत्रित

पटना (संजय कुमार मुनचुन) : गुजरात और बिहार के संबंधों को प्रगाढ़ करने के उद्देश्‍य से कला, संस्‍कृति एवं युवा विभाग, बिहार के द्वारा आगामी 28 फरवरी 2020 से 1 मार्च 2020 तक अहमदाबाद में बिहार महोत्‍सव का आयोजन किया जा रहा है। इस सिलसिले में सोमवार को कला, संस्‍कृति एवं युवा विभाग, बिहार सरकार के मंत्री प्रमोद कुमार और प्रधान सचिव रवि परमार ने अहमदाबाद में गुजरात के कला संस्‍कृति मंत्री पटेल ईश्‍वरसिन ठकोरभाई से मुलाकात की। इस दौरान उन्‍होंने गुजरात के मुख्‍यमंत्री श्री विजय रूपाणी और गुजरात के कला प्रेमियों को बिहार महोत्‍सव में शि‍रकत करने के लिए आमंत्रित किया।

इस मौके पर मंत्री प्रमोद कुमार ने कहा कि विकसित बिहार की पहचान को देश भर में पहुंचाने के उद्देश्य से कला संस्कृति एवं युवा विभाग ने पूरे देश के साथ एक सांस्कृतिक सेतु विकसित करने की कोशिश की है। बिहार की संस्कृति और यहां की बदलती छवि का संदेश लेकर विभाग ने कला के विभिन्न रुपों के साथ पहले कोलकाता, दिल्ली, इलाहाबाद, जयपुर और गोवा की यात्रा की। इस बार यह आयोजन गुजरात में होगा।

वहीं रवि परमार ने कहा कि बिहार महोत्‍सव दो अलग – अलग संस्‍कृति का समागम होगा। इससे गुजरात के लोगों को बिहार की समृद्धशाली संस्‍कृति और कला को नजदीक से जानने का मौका मिलेगा। ऐसे आयोजन हमें हमारे देश की अन्‍य प्रदेशों की संस्‍कृति, कला, रहन – सहन आदि चीजों को नजदीक से देखने – समझने का मौका देती है।

वहीं, कला और साहित्‍य के क्षेत्र में उत्‍कृष्‍ट योगदान देने के लिए पद्मश्री पुरूस्‍कार से सम्‍मानित डॉ. शांति जैन और प्रो श्याम शर्मा को कला, संस्‍कृति एवं युवा विभाग, बिहार सरकार के मंत्री श्री प्रमोद कुमार ने बधाई व शुभकामनाएं दी। उन्‍होंने कहा कि डॉ. शांति जैन और प्रो श्याम शर्मा को पद्म अवार्ड मिलने से हमें बेहद प्रसन्‍नता हुई है।

पद्म अवार्ड से सम्‍मानित इन दोनों व्‍यक्तियों ने कला और साहित्‍य के क्षेत्र में काम कर रहे लोगों को गौरवान्वित करता है और प्रेरणा भी देता है। बिहार गौरव गान लिखनेवाली डॉ. शांति जैन को लोक साहित्य पर विशेष कार्य करने के लिए पद्म पुरस्कार मिला है। तो प्रो श्याम शर्मा को कला के क्षेत्र में उत्‍कृष्‍ट योगदान के लिए यह अवार्ड मिला है। वे सफेद सांप (कविता संग्रह), स्याह, देखा-देखी बात (नाटक के संस्मरण), गांधी और सूक्तियां, काष्ठ छापाकला, चित्र परंपरा और बिहार, पटना कलम सहित दर्जनों पुस्तकें लिख चुके हैं।

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