मोदीनगर में पुलिस ने वाहन चोरी करने वाले एक बड़े संगठित गिरोह का पर्दाफाश कर दिया है। स्वाट टीम, क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में ऐसे गैंग का खुलासा हुआ है, जो पिछले दस वर्षों से एनसीआर में कार चोरी की वारदातों को अंजाम दे रहा था। पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है, जबकि अन्य सदस्यों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।
पुलिस ऑपरेशन में पकड़े गए शातिर
एसीपी मोदीनगर भास्कर वर्मा ने बताया कि गिरफ्तार आरोपितों की पहचान हरेंद्र उर्फ हन्नी गुर्जर और अमित चौधरी के रूप में हुई है। हरेंद्र मूल रूप से मेरठ के रोहटा थाना क्षेत्र के गांव किनोनी का निवासी है और फिलहाल दिल्ली के खजूरी खास इलाके में रह रहा था। वह गैंग का सरगना बताया जा रहा है। वहीं अमित चौधरी मेरठ के कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र की ड्रीम सिटी का रहने वाला है।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक हरेंद्र के खिलाफ दिल्ली, गाजियाबाद, बुलंदशहर, मेरठ और हापुड़ में कुल 27 मुकदमे दर्ज हैं। इससे साफ है कि वह लंबे समय से संगठित वाहन चोरी में शामिल रहा है।
12 सदस्यों का संगठित नेटवर्क
जांच में सामने आया कि इस गिरोह में कुल 12 सदस्य सक्रिय थे। सभी के बीच काम का स्पष्ट बंटवारा था। कुछ सदस्य रेकी करते थे, कुछ चोरी को अंजाम देते थे, जबकि अन्य आरोपी नंबर प्लेट और ईसीएम बदलकर गाड़ियों को नए रूप में तैयार करते थे। इसके बाद अलग टीम चोरी की कारों को दूसरे राज्यों में बेचने और डिलीवरी कराने का काम संभालती थी।
पुलिस के अनुसार, गिरोह पिछले दस वर्षों में करीब 250 कारें चोरी कर चुका है। ये वाहन राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और दिल्ली में बेहद कम कीमत पर बेच दिए जाते थे।
हाल की स्कॉर्पियो चोरी से खुली परत
कुछ दिन पहले मोदीनगर क्षेत्र से एक स्कॉर्पियो एन चोरी हुई थी। इसी मामले की जांच करते-करते पुलिस को गिरोह की गतिविधियों का सुराग मिला। पूछताछ में आरोपितों ने कबूल किया कि वह स्कॉर्पियो राजस्थान में बेच दी गई है, हालांकि पुलिस अभी तक उस वाहन को ट्रेस नहीं कर पाई है।
बरामद हुआ चोरी का पूरा ‘किट’
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से स्कॉर्पियो एन, आई-20 और ब्रेजा कार बरामद की। जांच में पता चला कि बरामद ब्रेजा भी चोरी की है और उसका इस्तेमाल रेकी के लिए किया जाता था।
इसके अलावा पांच फर्जी नंबर प्लेट, रिमोट चाबी, ईसीएम और अन्य उपकरण भी बरामद किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि बरामद ईसीएम एक थार कार का भी है, जिसे दिल्ली के मयूर विहार से चोरी किया गया था।
मिनटों में पार कर देते थे कार
स्वाट टीम प्रभारी अनिल राजपूत ने बताया कि गिरोह बेहद प्रोफेशनल तरीके से काम करता था। सबसे पहले सदस्य ब्रेजा कार से इलाके की रेकी करते और टारगेट वाहन चुनते थे।
इसके बाद आरोपी कार का शीशा तोड़ते, बोनट खोलते और तुरंत ईसीएम तथा लॉक बदल देते थे। पूरी प्रक्रिया इतनी तेजी से होती थी कि कुछ ही मिनटों में कार उनके कब्जे में आ जाती थी और वे फरार हो जाते थे। चोरी के बाद नंबर प्लेट बदलकर वाहन को दूसरे राज्य भेज दिया जाता था।
फॉर्च्यूनर-स्कॉर्पियो पर था खास फोकस
पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि बाजार में फॉर्च्यूनर और स्कॉर्पियो की मांग सबसे ज्यादा है। इसी वजह से उनका मुख्य निशाना यही गाड़ियां होती थीं। वे चोरी की फॉर्च्यूनर करीब चार लाख रुपये और स्कॉर्पियो लगभग तीन लाख रुपये में बेच देते थे। इसके बाद रकम गैंग के सदस्यों में बांट ली जाती थी।
कम कीमत होने के कारण खरीदार आसानी से मिल जाते थे और वाहन जल्दी खप जाते थे।
डिलीवरी का जिम्मा संभालता था अमित
पुलिस के अनुसार, अमित चौधरी का मुख्य काम चोरी की कारों की डिलीवरी कराना था। उसने पिछले पांच वर्षों में करीब 50 गाड़ियों की सप्लाई कराई है। जिन वाहनों की डिलीवरी होती थी, उनमें पहले से नंबर प्लेट और ईसीएम बदले जा चुके होते थे, जिससे उन्हें पहचानना मुश्किल हो जाता था।
सोतीगंज से सीखा ‘कारोबार’
पूछताछ में खुलासा हुआ कि गैंग का सरगना हरेंद्र वर्ष 2014 से अपराध की दुनिया में सक्रिय है। शुरुआत में वह एक ठग गिरोह के साथ मिलकर कारों से मोबाइल चोरी करता था। जेल जाने के बाद जमानत पर छूटकर वह मेरठ के सोतीगंज इलाके में पहुंचा, जहां उसने गोल्डी सरदार और उसके साथियों के संपर्क में आकर कार चोरी की तकनीक सीखी।
यहीं से उसने जीतू, उमरदराज और मेहराज के साथ मिलकर अपना गिरोह तैयार किया और संगठित तरीके से वाहन चोरी शुरू कर दी। वर्ष 2021 में परतापुर पुलिस ने उन्हें जेल भेजा था, लेकिन बाहर आते ही गिरोह फिर सक्रिय हो गया।
बाकी आरोपितों की तलाश जारी
फिलहाल पुलिस ने दोनों गिरफ्तार आरोपितों को जेल भेज दिया है। गिरोह के फरार सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही पूरे नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया जाएगा।
इस बड़े खुलासे के बाद एनसीआर में हुई कई वाहन चोरी की घटनाओं के सुलझने की उम्मीद बढ़ गई है। पुलिस अब जब्त मोबाइल, ईसीएम और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की मदद से गिरोह के पुराने मामलों की भी पड़ताल कर रही है।
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