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दिल्ली का किराड़ी इलाका: सीवर और जलभराव से जूझते बच्चे, स्कूल में पढ़ाई खतरे में

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के किराड़ी इलाके में हालात दिनों-दिन गंभीर होते जा रहे हैं। यहाँ रहने वाले लोग और इस क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे लंबे समय से सीवर की बदबू और जलभराव की समस्या से जूझ रहे हैं। गलियों में खड़ा बदबूदार पानी और घरों में फैलती गंदगी ने न केवल लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित किया है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डालना शुरू कर दिया है।

स्कूल में पानी, बच्चों का भविष्य खतरे में

किराड़ी इलाके में स्थित सरकारी स्कूलों में हालात इतने खराब हैं कि बच्चे घुटनों तक पानी भरे मैदान और क्लासरूम में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। स्कूल के परिसर में भरा पानी केवल बच्चों की सुविधा में बाधा ही नहीं डाल रहा, बल्कि उनकी सेहत पर भी सीधा असर डाल रहा है। कई बच्चे लगातार सांस की समस्याओं से जूझ रहे हैं, जबकि कुछ छात्रों की त्वचा और आंखों में जलन जैसी शिकायतें भी सामने आई हैं।

छोटे बच्चों को मजबूरी में क्लासरूम की खिड़कियां बंद करके पढ़ाई करनी पड़ती है, जिससे हवा का संचार नहीं होता और बदबू सीधे उनके श्वसन तंत्र तक पहुँचती है। कई बार बच्चे लैंडफिल साइट के पास बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर होते हैं, जहाँ से उठती गंदगी और बदबू सीधे उनके स्वास्थ्य को प्रभावित करती है।

पिछले पांच सालों से समस्या बनी हुई

स्कूल के कुछ शिक्षक, जिनका नाम न छापने की शर्त पर लिया गया, बताते हैं कि यह स्थिति पिछले पांच सालों से बनी हुई है। पहले केवल स्कूल के बाहरी हिस्से में पानी जमा होता था, लेकिन अब यह समस्या क्लासरूम के फर्श तक फैल गई है। इसके चलते बच्चों को मजबूरी में पहले मंजिल पर बैठाया जाता है। लगातार जलभराव के कारण स्कूल परिसर में बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं और परिसर की साफ-सफाई लगभग असंभव हो गई है।

गवर्नमेंट सीनियर सेकंडरी स्कूल नंबर-2 में भी हालत बहुत खराब हैं। स्कूल में लगभग 2000 बच्चे दो शिफ्ट में पढ़ते हैं, लेकिन पानी भरे मैदान और क्लासरूम की बदबू ने शिक्षा के वातावरण को अत्यंत चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएँ

बच्चों की सेहत पर इसका असर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। कई क्लासरूम को खतरनाक घोषित कर दिया गया है। केवल 10 साल पहले बनी स्कूल की कुछ बिल्डिंगें अब जलभराव और गंदगी की वजह से डैमेज घोषित कर दी गई हैं। स्कूल परिसर से महज 200 मीटर की दूरी पर स्थित लैंडफिल साइट से उठती बदबू क्लासरूम तक पहुंच रही है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर लगातार खतरा बना रहता है।

एक शिक्षक का कहना है कि हालात इतने गंभीर हैं कि हर 15-20 दिनों में डॉक्टरों की टीम को स्कूल बुलाना पड़ता है, ताकि बच्चों की जांच की जा सके और उन्हें आवश्यक दवाइयाँ दी जा सकें। बच्चों में सांस लेने में कठिनाई, एलर्जी और त्वचा संबंधी समस्याएँ आम हो गई हैं।

बच्चों और परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित

इस समस्या का सबसे ज्यादा असर बच्चों के परिवारों पर भी पड़ा है। बच्चे स्कूल जाने के लिए जोखिम उठाते हैं, क्योंकि गली-गली भरा सीवर पानी उनके लिए स्वास्थ्य संबंधी खतरा बन गया है। लोग बताते हैं कि पिछले महीनों में कई बार स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ी है।

स्थानीय निवासियों के अनुसार, सीवर और जलभराव की यह समस्या केवल स्कूलों तक सीमित नहीं है। गलियों और घरों में भरा गंदा पानी उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी जीने में भी बाधित कर रहा है। कई बार लोग मजबूरी में जलभराव वाली गलियों में पैदल चलने या मोटर साइकिल से निकलने को मजबूर हैं।

प्रशासन की उदासीनता पर सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतें प्रशासन तक पहुंचाई गई हैं, लेकिन किसी ठोस कार्रवाई की दिशा में कदम नहीं उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि समस्या के लगातार बने रहने के कारण इलाके के लोग और बच्चे दोनों ही असहज जीवन जीने को मजबूर हैं।

स्थानीय शिक्षक भी कहते हैं कि स्कूल प्रशासन लगातार जलभराव और सीवर की समस्या के बारे में अधिकारियों को जानकारी दे रहा है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। उनकी चिंता यह है कि अगर जल्द ही कोई कदम नहीं उठाया गया, तो बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य दोनों ही गंभीर खतरे में पड़ सकते हैं।

समाधान की दिशा

विशेषज्ञों के अनुसार, इस समस्या का स्थायी समाधान केवल नियमित साफ-सफाई और सीवर सिस्टम की मरम्मत से संभव है। इसके अलावा लैंडफिल साइट की दूरी को स्कूल से कम करने और जल निकासी की सही व्यवस्था करने की जरूरत है।

स्थानीय प्रशासन और स्कूल अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे बच्चों और निवासियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जलभराव और सीवर समस्या का त्वरित समाधान करें।

निष्कर्ष

किराड़ी का यह मामला केवल एक इलाके की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे शहर के लिए चेतावनी है। बच्चों का भविष्य और उनके स्वास्थ्य पर यह प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। अगर तत्काल उपाय नहीं किए गए, तो शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों ही क्षेत्रों में गंभीर नुकसान हो सकता है।

किराड़ी इलाके में बच्चों को हथेली पर जान लेकर स्कूल जाना पड़ रहा है, और यह तस्वीर देश की राजधानी में शिक्षा और स्वास्थ्य के प्रति हमारी संवेदनशीलता पर सवाल खड़ा करती है। अब सवाल यह उठता है कि प्रशासन इस गंभीर स्थिति को सुधारने के लिए कब और कैसे कदम उठाएगा।

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