हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र में उस वक्त माहौल अचानक गर्म हो गया, जब विश्वविद्यालय नियुक्तियों के मुद्दे पर कांग्रेस विधायक जस्सी पेटवार और खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम आमने-सामने आ गए। चर्चा की शुरुआत वेतन असमानता और भर्ती प्रक्रिया पर सवालों से हुई, लेकिन RSS का नाम आते ही बहस तीखी नोकझोंक में बदल गई।

सदन की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस विधायक जस्सी पेटवार ने हरियाणा की एक यूनिवर्सिटी में हो रही नियुक्तियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों को हरियाणा के युवाओं की तुलना में अधिक वेतन दिया जा रहा है। पेटवार ने इसे प्रदेश के युवाओं के साथ अन्याय बताते हुए सरकार से जवाब मांगा और पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग की।
अपनी बात रखते हुए पेटवार ने नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े किए। इसी दौरान उन्होंने RSS का जिक्र किया, जिससे सदन का माहौल तुरंत बदल गया। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने इस टिप्पणी पर आपत्ति जताई और मंत्री से जवाब देने की मांग की।
खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम ने बिना देर किए कांग्रेस विधायक के आरोपों का कड़ा जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों से RSS का कोई संबंध नहीं है। मंत्री ने कहा, “RSS का इसमें क्या लेना-देना है? क्या RSS कुलपति नियुक्त करती है? यदि ऐसा कोई आरोप है तो उसके प्रमाण सदन में प्रस्तुत किए जाएं।”
मंत्री के इस पलटवार के बाद सदन में हंगामा बढ़ गया। दोनों पक्षों के सदस्य अपनी-अपनी जगह से बोलने लगे, जिससे कुछ देर के लिए कार्यवाही बाधित होती नजर आई। अध्यक्ष को बीच-बचाव कर व्यवस्था बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा।
गौरव गौतम ने अपने जवाब में यह भी कहा कि बिना ठोस सबूत किसी संगठन का नाम लेना अनुचित है और इससे सदन की गरिमा प्रभावित होती है। उन्होंने जस्सी पेटवार को चुनौती देते हुए दोहराया कि यदि उनके पास कोई पुख्ता साक्ष्य है तो वह सदन के पटल पर रखें, अन्यथा इस तरह के आरोप निराधार माने जाएंगे।
दूसरी ओर, जस्सी पेटवार ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी संगठन को निशाना बनाना नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। उन्होंने दोहराया कि हरियाणा के युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता मिलनी चाहिए और वेतन में यदि असमानता है तो उसकी जांच होनी चाहिए।
हालांकि, मंत्री की सख्त प्रतिक्रिया और सत्ता पक्ष के लगातार विरोध के बीच बहस का रुख बदलता दिखा। बढ़ते हंगामे के दौरान आखिरकार जस्सी पेटवार को सदन में यह स्पष्ट करना पड़ा कि वह RSS का नाम नहीं ले रहे हैं और उनका सवाल केवल नियुक्तियों की निष्पक्षता को लेकर है।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान विधानसभा का माहौल कई बार तनावपूर्ण रहा। सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर अनावश्यक राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया, जबकि विपक्ष ने सरकार पर गंभीर सवालों से बचने की कोशिश करने की बात कही। अध्यक्ष ने दोनों पक्षों को संयम बरतने की नसीहत दी और चर्चा को मूल विषय पर केंद्रित रखने का आग्रह किया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हरियाणा में सरकारी नौकरियों और विश्वविद्यालयों में स्थानीय युवाओं को अवसर देने का मुद्दा हमेशा संवेदनशील रहा है। ऐसे में बजट सत्र के दौरान इस विषय पर उठी बहस का राजनीतिक रूप लेना स्वाभाविक माना जा रहा है। RSS का नाम जुड़ने से विवाद ने और ज्यादा तूल पकड़ लिया।
विधानसभा की कार्यवाही बाद में सामान्य रूप से आगे बढ़ गई, लेकिन यह मुद्दा दिनभर राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना रहा। विपक्ष इस मामले में पारदर्शिता की मांग पर कायम है, जबकि सरकार का कहना है कि बिना प्रमाण लगाए गए आरोपों का कोई आधार नहीं है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार विश्वविद्यालय नियुक्तियों और वेतन असमानता के मुद्दे पर कोई औपचारिक स्पष्टीकरण या जांच की घोषणा करती है, या फिर यह मामला केवल राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित रहता है। फिलहाल, बजट सत्र की यह तीखी बहस सत्ता और विपक्ष के बीच बढ़ती तल्खी की एक और झलक बनकर सामने आई है।
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